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जिले की औद्योगिक इकाईयों में श्रम कानूनों की घोर अवहेलना


कई इकाईयों में मजदूरों को प्राथमिक सहायता तक नहीं मिल रही
समय पर मासिक वेतन नहीं जबकि पीएफ को लेकर भी गड़बड़ी के आरोप

धनेश विद्यार्थी, रेवाड़ी। जिले के कस्बा धारूहेड़ा और बावल स्थित औद्योगिक
इकाईयों में सरकार की ओर से लागू श्रम कानूनों की घोर अवहेलना हो रही है।
मानव अधिकारों की अनदेखी की वजह से कंपनी प्रबंधकों से श्रमिकों की
नाराजगी बढ़ती जा रही है और श्रमिक यूनियनें इस मामले में कोई बड़ा आन्दोलन
चलाने की राह पर जाने को तैयार खड़ी हैं।

चूंकि सरकार ने श्रम विभाग के अधिकारियों को नियमित तौर पर औद्योगिक
इकाइयों के श्रमिकों एवं प्रबंधकों के साथ तालमेल स्थापित करके यह
सुनिश्चित करना होता है कि उनके क्षेत्र में चल रही औद्योगिक इकाईयों में
काम कर रहे श्रमिकों को सरकार की ओर से निर्धारित एवं लागू नियम-कानून के
अनुसार मजदूरी अन्य सुविधाएं मिल रही हैं। 

जिले में श्रमिकों की बात नहीं सुनी जा रही, इस वजह से उनकी परेशानी बढ़ी हुई है। इनको समयबद्ध मासिक वेतन एवं अन्य सुविधा नहीं मिल रही। इन कर्मचारियों के भविष्य निधि
के खाते कहीं जगह खुलवाए ही नहीं गए जबकि कई जगह खाते खुलवाने के बावजूद
उसमें पीएफ काटने के बाद कंपनी और ठेकेदार ने पूरी धनराशि सरकार के खजाने
में जमा नहीं कराई। श्रमिकों को आपात स्थिति में जरूरत अनुसार चिकित्सा
सहायता एवं स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रही। निर्धारित समय से अधिक समय तक
काम कराया जा रहा है। समय पर वेतन नहीं मिल रहा। कुछ कंपनियों में
कर्मचारियों ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ बगावत भी की है। कुछ कंपनियों के
कर्मचारियों ने उपायुक्त के अलावा श्रम आयुक्त को इस विषय में शिकायतें
भेजी मगर मजदूरों के पक्ष में निर्णय आने के बाद भी श्रमिकों को न्याय
नहीं मिला। 

श्रम एवं समझौता अधिकारी भी कंपनी प्रबंधन के साथ दोनों
पक्षों की बैठकें कराने के बावजूद ऐसे मामले नहीं निपटा पाए। कुछ मामले
अदालत तक जा पहुंचे। इस स्थिति में जिले में श्रमिक यूनियनों में नाराजगी
पनप रही है और इससे श्रमिक नेता नाराज हैं। बावल क्षेत्र की कुछ कंपनियों
में ठेकेदार ने अपने कर्मचारियों का पीएफ तो काटा मगर उसे समयबद्ध सरकारी
खजाने में जमा नहीं कराया। यह सिलसिला लम्बे समय से चल रहा है। बता दें
कि बावल क्षेत्र की कंपनियों में राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश और यूपी
के प्रवासी श्रमिकों को कम वेतन पर लगाकर उनसे काम कराया जा रहा है तथा
उनका पीएफ तक नहीं काटा जा रहा। यह समस्या धारूहेड़ा और बावल दोनों
औद्योगिक क्षेत्रों में चल रही है। छोटी औद्योगिक कंपनियों में इस समस्या
के कारण श्रमिकों को अपने घर एवं परिजनों का पालन-पोषण करने में काफी
परेशानी हो रही है। 

विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक श्रमिक संबंधित कंपनियों के खिलाफ श्रम विभाग और प्रशासन को शिकायत भेजने से इसलिए कतरा रहे हैं क्योंकि ऐसा करते ही उनका गेट बंद करने के साथ उनका मासिक वेतन रोक दिया जाएगा। यह स्थिति अगर लंबी चली तो इससे जिला रेवाड़ी के उद्योगों के विकास पर भविष्य में गहरा असर पड़ेगा और किसी बड़े श्रमिक आंदोलन की पृष्ठभूमि जन्म लेगी, जिससे जिले की औद्योगिक इकाईयों पर ग्रहण लगा सकता है। अगर
ऐसा हुआ तो हरियाणा सरकार की छवि के साथ-साथ जिला प्रशासन के मुखिया और
श्रम विभाग पर भी इसका नजला गिर सकता है। कर्मचारी नेता रविन्द्र कुमार
ने कहा कि औद्योगिक कंपनियों में पीएफ नहीं काटने, उसे लम्बे समय तक
सरकार के खजाने में जमा नहीं कराने, मासिक वेतन समय पर श्रमिकों को नहीं
देने समेत कई अन्य समस्याओं से श्रमिक जूझ रहे हैं। उधर एक सामाजिक
कार्यकर्ता ने जल्द इस मामले में आरटीआई लगाकर जल्द अहम जानकारी जुटाकर
इस मामले को अदालत में ले जाने के संकेत दिए हैं। उधर देर शाम तक श्रम
विभाग का पक्ष ज्ञात नहीं हो पाया है।



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