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लक्ष्मी रूठ जाएगी यदि किया बिस्तर पर बैठकर भोजन

 

पुराने समय में घरों में जब भोजन बनता था तो रसोई में या रसोई के बाहर जमीन पर चटाई बिछा कर लोगों को गर्म-गर्म भोजन परोसा जाता था मगर आज की आधूनिक जीवनशैली में जमीन पर बैठ कर खाना खाने को बैठ हैबिट में शामिल कर लिया गया है।

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री जी इस विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में(आजकल) तो लोगों के घरों में आलीशान डाइनिंग टेबल होती हैं, मगर दुर्भाग्‍य की बात तो यह है कि लोग डाइनिंग टेबल को सिर्फ दिखावे के लिए ही घर में सजा कर रख देते हैं और खाना खाने के लिए बेड या सोफे का इस्‍तेमाल करते हैं। बेड पर खाना खाने वाले दिवार , तकिये आदि का सहारा ले लेते है , कोई कोई तो लेटे लेटे ही भोजन करते है | यह सभी अवस्थाये खाना खाते समय बहुत गलत मानी गयी है जो शरीर पर दुष्प्रभाव डालती है |

शास्त्रों में कहा गया है जैसा खाए भोजन वैसा हो जाएं मन अर्थात व्यक्ति जैसा भोजन खाता है उसकी मन स्थिती भी वैसी हो जाती है।

रामायण में भी वर्णन आता है, जब देवी सीता अशोक वाटिका में थी तो उस समय उन्होंने त्रिजटा को सात्विक भोजन की महत्ता बताई थी।

आजकल जमीन पर भोजन करने की प्रथा लगभग समाप्त होती जा रही है । जमीन पर भोजन करना हमारे स्वास्थ के लिए बहुत उपयोगी है । हमे बिस्तर पर बैठकर भोजन करने से मना किया जाता हैं क्योकि इसके बहुत नुकसान है ।आज आधुनिकता के युग में बहुत सी ऐसी बात है जो हमारे शास्त्रों में उद्धृत है या हमारे बुजुर्ग हमे बताते है, उन्हें हम अंधविश्वासी या दकियानूसी की संज्ञा दे देते है । शास्त्रों के अनुसार भोजन करने का सही समय क्या है। प्रातः और सायं ही भोजन का विधान है, क्योंकि पाचनक्रिया की जठराग्नि सूर्योदय से 2 घंटे बाद तक एवं सूर्यास्त से 2.30 घंटे पहले तक प्रबल रहती है। शास्त्रों की मानें तो जो व्यक्ति सिर्फ एक समय भोजन करता है वह योगी और जो दो समय करता है वह भोगी कहा गया है।

शास्‍त्रों की माने तो बिस्‍तर या किसी ऐसे स्‍थान पर जहां विश्राम किया जाता है वहां पर बैठ कर खाना खाया जाए तो माता लक्ष्‍मी रूठ जाती हैं और घर में धन की कमी होने लगती है। आज के लोग इस बात को अंधविश्‍वास मान कर इन बातों पर भरोसा नहीं करते मगर सच तो यह है कि बिस्‍तर पर बैठ कर भोजन करने से केवल धन की हानि नहीं होती बल्कि इससे सेहत को भी नुकसान पहुंचता है। आईए हम आपको बताते हैं कैसे बिस्‍तर पर बैठ कर खाना खाना सेहत के लिए नुकसानदायक है।

ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि बिस्‍तर वह स्‍थान होता है जहां आदमी लेट कर आराम करता है। खाना हमेशा बैठ कर खाया जाता है और खाना खाने का एक आसान होता है। यादि उस आसन में बैठ कर खाना न खाया जाए तो न तो वह ठीक से पचता है और न ही उसका स्‍वाद आता है। अगर बिस्‍तर में बैठ कर आराम से खाना खाया जाएगा तब भी वह ठीक से नहीं पचेगा।

बिस्‍तर पर उठने बैठने से कपड़ों में चिपके कीटाणू बेडशीट और पिलो में भी चिपक जाती हैं। यह इतनी महीन होते है कि इन्‍हें देख पाना आसान नहीं होता। इसलिए कहा जाता है कि सोने से पहले बिस्‍तर को साफ कर लेना चाहिए मगर उसी बिस्‍तर पर बैठ कर जब आप खाना खाती हैं तो वहीं कीटाणू उड़ कर आपके भोजन में मिल कर आपके पेट में पहुंच जाते हैं और फिर वही बीमारी का कारण बनते हैं।

समझें वैज्ञानिक कारण को....

वैज्ञानिक द्रष्टिकोण से भी बिस्तर पर बैठकर खाना खाने से कई तरह के स्वास्थ्य सम्बन्धी नुकसान होते है | ज्यादातर  बिस्तर रुई से बने होते हैं | रुई को उर्जा प्रवाह का अवरोधक बताया गया है | यही बिस्तर शरीर में लीवर  की ऊर्जा को निकलने नहीं देती है। जिससे हमारा पाचन तंत्र खराब होने लगता है। हमारा शरीर अपच , गैस और पेट दर्द आदि बीमारियों से ग्रसित हो जाता है |
इसलिए हो सके तो खाना हमेशा जमीन पर बैठ कर खाना चाहिए।

 दरअसल खाना खाते वक्‍त शरीर से जो गर्मी निकलती है वह बिस्‍तर पर खाना खाते वक्‍त हमारे शरीर के अंदर ही रह जाती है। वहीं अगर जमीन पर बैठ कर खाना खाया जाए तो वही गर्मी जमीन की ठंडक मिलने से उसी में प्रवेश कर जाती है।

पण्डित दयानन्द शास्त्री बताते हैं कि यदि आप भोजन सही आसन में बैठकर नहीं करते हैं तो आपको लीवर से जुड़ी बीमारियां, गैस, कब्‍ज और खाना न पचने की बीमारी हो सकती है।

दरअसल, हमने देखा हें कि कामकाज की जल्‍दबाजी में पुरुष और महिलाएं खड़े हो कर ही भोजन कर लेते हैं मगर ऐसा नहीं करना चाहिए। भोजन हमेशा बैठ कर अच्‍छे से खाना चाहिए। खाते वक्‍त प्‍लेट को भी हाथ में नहीं लेना चाहिए ऐसा करने से पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं करता है।

कई लोगों की आदत होती है कि बिस्‍तर पर बैठ कर भोजन करने के बाद वह झूठे बर्तन भी वहीं छोड़ देते हैं। ऐसा करना सेहत के लिए और भी हानिकारक है क्‍योंकि झूठे बर्तन में बैक्‍टीरिया जमा हो जाते हैं जो स्‍वास्‍थ को नुकसान पहुंचाते हैं।

पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार जो लोग बिस्तर पर बैठकर भोजन करते है और टीवी देख-देख कर खाना खाते हैं उनके शरीर में भोजन कभी नहीं लगता क्‍योंकि खाना हमेशा शांति से बैठकर धीरे-धीरे चबते हुए और स्‍वाद लेते हुए खाने से ही शरीर में लगता है।

होता है योगाभ्यास....
योग का हर आसन आपके शरीर को किसी न किसी रूप में लाभ पहुंचाता है और जब आप जमीन पर बैठकर भोजन करते हैं तो आप वास्तव में किसी आसन जैसे सुखासन या सिद्धासन में बैठे होते हैं। इससे आपको भोजन के दौरान उस आसन से मिलने वाले लाभ भी प्राप्त होते हैं। साथ ही इससे भोजन के पाचन में भी सहायता मिलती है।

बढ़ता है शरीर का लचीलापन और स्ट्रेंथ ...
जब आप जमीन पर पैरों को क्रॉस करके बैठते हैं तो इससे आपका शरीर मजबूत व अधिक लचीला होता है। सिटिंग पोजिशन में आपके हिप्स, टखनों व घुटनों पर जोर पड़ता है। साथ ही आपकी रीढ़ की हड्डी, कंधों और छाती का लचीलापन भी बढ़ जाता है। ऐसा होने पर आप बहुत सी बीमारियों से खुद-ब-खुद बच जाते हैं।

रक्त प्रवाह में सुधार...
बेहतर स्वास्थ्य के लिए यह बेहद आवश्यक है कि आपके शरीर में रक्त का प्रवाह बेहतर तरीके से हो। अपने शरीर में ब्लड सर्कुलेशन के लिए आपको जमीन पर बैठकर खाना खाने की आदत डालनी चाहिए। दरअसल, ऐसा करने से आपके हदय से शरीर के अन्य भागों तक रक्त का प्रवाह बेहतर हो जाता है। इसके अतिरिक्त जमीन पर बैठकर खाना खाने से आपका हृदय बेहतर तरीके से काम करता है और आप हृदय संबंधी परेशानियों से खुद को काफी हद तक बचा लेते हैं।

होता है पॉश्चर सही....
यह तो आप जानते ही होंगे कि आपका गलत पॉश्चर आपकी बहुत सी परेशानियों का कारण बनता है लेकिन जब आप जमीन पर पैर क्रॉस करके बैठे होते हैं तो आपके शरीर का पॉश्चर एकदम सही होता है। जिसके कारण आपकी कमर, मसल्स और ज्वांइट्स पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता। इस प्रकार आपको कमर में दर्द, घुटनों में दर्द या गर्दन में दर्द आदि शिकायत का सामना नहीं करना पड़ता।

पथरी होने का खतरा भी बढ़ जाता है---
जब हम बिना चबाये खाना खाते हैं, तो हमारे स्वास्थ्य पर इसका बहुत बूरा असर पड़ता है. भोजन को अच्छे से चबाने से लार में उपस्थित एंजाइम भोजन को लसलसा और पचने योग्य बनता है. जब भोजन को सही तरीके से चबाया नहीं जाता है तो भोजन का सही पाचन नहीं हो पाता है जिसका नतीजा यह होता है कि हमें पेट से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
खाना खाते समय जल्दी-जल्दी खाना खाने से भोजन की सही लुगदी नहीं बन पाती है, और भोजन बिना पीसे पाचन तंत्र में पहुंचता है. जिससे पेट में सूजन, जलन, अपच की शिकायत होती है, इसलिए कभी भी जल्दीबाज़ी में भोजन न करें।भोजन को अच्छे से चबाने से लार में उपस्थित एंजाइम भोजन को लसलसा और पचने योग्य बनता है. जब भोजन को सही तरीके से चबाया नहीं जाता है तो भोजन का सही पाचन नहीं हो पाता है जिसका नतीजा यह होता है कि हमें पेट से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

यह हें धार्मिक कारण...

ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि बिस्तर या जिस स्थान पर हम सोते है ,वहा  बैठकर खाना या पीना नहीं चाहिए। इससे घर में लक्ष्मी का निवास नहीं होता और दरिद्रता आती है।

ध्यान रखें-- भोजन से पहले दोनों हाथ, दोनों पैर और मुंह को धोने के पश्चात ही भोजन करना चाहिए। मान्यता के अनुसार गीले पैरों के साथ भोजन करने से स्वास्थ्य संबंधी लाभ होता है और उम्र में बढ़ौतरी होती है।

समझें भोजन और वास्तु का सम्बंध...

हमारी जीवनशैली और वास्तुशास्त्र के बीच गहरा संबंध है। हमारे इर्द गिर्द फैले हुए वास्तुदोषों की वजह से हमारे जीवन में ऋणात्मक उर्जा का संचय होता है। वास्तु दोष मूलतः हमारे रहन-सहन की प्रणाली से उत्पन्न होता है। यह हमारी जीवनशैली के साथ-साथ अमूल्य देह को भी नष्ट करता है।
वास्तु की मान्यता है कि पूर्व की ओर मुख करके भोजन करने से आयु बढ़ती है। जो लोग उत्तर दिशा की ओर मुख करके भोजन करते हैं, उन्हें लंबी आयु के साथ ही लक्ष्मी कृपा भी प्राप्त होती है। दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी जाती है और इस ओर मुख करके खाना खाने से भय बढ़ता है। बुरे सपने दिखाई देते हैं। कहते हैं कि दक्षिण दिशा की ओर किया हुआ भोजन प्रेत को प्राप्त होता है। तथा पश्चिम दिशा की ओर किया हुआ भोजन खाने से रोग की वृद्धि होती है।

पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि भोजन करने से पूर्व अन्न देवता, अन्नपूर्णा माता अौर देवी-देवताओं का स्मरण कर उन्हें धन्यवाद करें। भोजन स्वादिष्ट न लगने पर उसका तिरस्कार न करें। ऐसा करने से अन्न का अपमान होता है। 

पूरे परिवार को साथ मिल बैठकर ही भोजन करना चाहिए। नियम अनुसार अलग-अलग भोजन करने से परिवारिक सदस्यों में प्रेम और एकता कायम नहीं हो पाती।

भोजन के पश्चात दिन में टहलना एवं रात में सौ कदम टहलकर बाईं करवट लेटने अथवा वज्रासन में बैठने से भोजन का पाचन अच्छा होता है। भोजन के एक घंटे पश्चात मीठा दूध एवं फल खाने से भोजन का पाचन अच्छा होता है।

भोजन के तुरंत बाद पानी या चाय नहीं पीना चाहिए। भोजन के पश्चात घुड़सवारी, दौड़ना, बैठना, शौच आदि नहीं करना चाहिए। यह कारण चिकित्सीय दुनिया के हिसाब से भी सही माने जाते हैं।

भोजन के दौरान भी कुछ बातों का ख्याल रखें, जैसे कि भोजन करते समय हमेशा मौन रहें। यदि किन्हीं कारणों से बोलना जरूरी हो तो सिर्फ सकारात्मक बातें ही करें। भोजन करते वक्त किसी भी प्रकार की समस्या पर चर्चा न करें। और भोजन को खुशी से और पूरा चबा-चबाकर ही खाएं।

तैलीय खाना, फास्ट फूड, जंक फूड, स्पाइसी फूड, ग्रेवी फूड आदि का सेवन न करके स्वच्छ सात्विक अौर पौष्टिक भोजन करें। खाने के पश्चात कुछ मीठा खाना अौर फल का सेवन अच्छा होता है।

परोसे हुए भोजन में त्रुटियां न निकालें।

भोजन बनाने वाले व्यक्ति को स्नान करके और पूरी तरह से पवित्र होकर ही भोजन बनाना चाहिए। भोजन बनाते समय मन शांत रखना चाहिए। जहां तक हो सके भोजन बनाते समय अपने परिवार के स्वस्थ रहने के विचार करें या मंत्र जप अथवा स्तोत्र पाठ करते रहें।

शांत मन से भोजन करें, किसी की निंदा चुगली न करें।शास्त्रीय नियमों के अनुसार जब व्यक्ति क्रोध में हो, किसी से ईर्ष्या की भावना रखता हो, तो उसे भोजन नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसे में वह भोजन उसे पचता नहीं है। यदि आसपास कोई लड़ाई-झगड़ा या फिर काफी शोर हो रहा हो, तब भी ऐसे स्थान पर बैठकर भोजन नहीं करना चाहिए। भोजन हमेशा शांत माहौल में ही करें, ताकि पेट के साथ मन को भी शांति मिले।


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