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हर पल मिट सी रही ज़िन्दगी में, कुछ पल जीना चाहता हूँ मैं: युवाकवि अरमान राज़


मेरी कलम से....
हर पल मिट सी रही ज़िन्दगी में,
  कुछ पल जीना चाहता हूँ मैं।।
बस कुछ पल जीने के बाद,
  फिर से मिट जाना चाहता हूँ मैं।।।
बस कुछ पल....

टिक टिक करती घड़ी की सुइयां,
  और बढ़ती वक़्त की रफ्तार।।
इस रफ्तार में ही कहीं अब,
  खो जाना चाहता हूँ मैं।।।
बस कुछ पल....

चेहरे पर झूठ का नकाब लिए,
  बस छल और कपट से लड़ रहा।।
इस छल और झूठ के जाल से,
  आज़ाद हो जाना चाहता हूँ मैं।।।
बस कुछ पल....

मुश्किल से मिलती राह ए सहर,
  तो कभी एक पल में रात जाती ढल।।
आँख मिचौली के इस खेल में,
  खुद से ही खो जाना चाहता हूँ मैं।।।
बस कुछ पल....

राहत पाने की लालसा लिए,
  सुकून जैसे कफ़न होना चाहता हूँ मैं।।
बन कर अरमान हर दिल के,
  किसी कोने में दफन होना चाहता हूँ मैं।।।
बस कुछ पल...

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