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1 टन कागज को रिसाइकल किया जाए तो 20 पेड़ों और 7 हजार गेलन पानी को बचाया जा सकता है

नारनौल :प्रमोद बेवल 

भारत सरकार के क्षेत्रीय प्रचार निदेशालय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मनाए जा रहे विश्व पर्यावरण सप्ताह के तहत आज फिल्ड आऊटरीच ब्यूरो राजेश अरोड़ा की अध्यक्षता में स्थानीय आईटीआई में पर्यावरण दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया। 

श्री अरोड़ा ने बताया कि जिले में मनाए जा रहे विश्व पर्यावरण सप्ताह के तहत आज आईटीआई व निकटवर्ती पार्क में पौधारोपण किया। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर पर्यावरण से संबंधित पोस्टर लगाकर पर्यावरण के बारे में लोगों को जागरूक किया। उन्होंने बताया कि पोस्टरों के माध्यम से आम जनता से अनुरोध किया है कि मानसून आने तक कम से कम एक पेड़ लगाकर पर्यावरण को बचाने में सहयोग कर धरती मां के प्रति अपनी सद्भावना व्यक्त करें। 

उन्होंने कहा कि हमें पर्यावरण दिवस पर ही अपनी नहीं अपितु अन्य दिवस पर भी अधिक से अधिक पौधारोपण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण हम सभी का दायित्व है इसमें समाज के सभी वर्गों को अपना योगदान देना चाहिए ताकि हम लोग धरती को हरा-भरा कर अनेक रोगों से अपना व समाज का बचाव कर हरे भरे वातावरण व स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण में सहयोग कर सकें। 

श्री अरोड़ा ने बताया कि पर्यावरण का सीधा संबंध प्रकृति से है। अपने परिवेश में हम तरह-तरह के जीव-जंतु, पेड़-पौधे तथा अन्य सजीव-निर्जीव वस्तुएं पाते हैं। ये सब मिलकर पर्यावरण की रचना करते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक समाज को पर्यावरण से संबंधित समस्याओं की शिक्षा व्यापक स्तर पर दी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि यदि 1 टन कागज को रिसाइकल किया जाए तो 20 पेड़ों और 7 हजार गेलन पानी को बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इससे जो बिजली बचेगी उससे 6 महीने तक घर को रोशन किया जा सकता है। 

उन्होंने कहा बिना पेपर के काम करने से हम लोग 1.4 ट्रिलियन पाअंड पेपर व 72 हजार 800 सौ पेड़ बचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर टायलेट पेपर इस्तेमाल नहीं करते हैं तो हर साल करीब 27 हजार पेड़ बचा सकते हैं। उन्होंने बताया कि यदि आप घर पर खाना बनाएंगे तो प्लास्टिक का कचरा कम होगा और 260 प्रजातियों की जान बच सकती है। 
क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी ने बताया कि प्रदूषण एक अभिशाप के रूप में सम्पूर्ण पर्यावरण को नष्ट करने के लिए हमारे सामने खड़ा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण से संबंध उपलब्ध ज्ञान को व्यावहारिक बनाने की आवश्यकता है ताकि समस्या को जनमानस सहज रूप से समझ सकें। उन्होंने कहा बदलती जलवायु व अत्यधिक गर्मी से निजात पाने के लिए अधिक से अधि पौधारोपण करना चाहिए।

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