डरती हूँ मैं ज़िंदगी जीने से अब, मुझे कोख में ही मरने दो: अरमान राज़


हे माँ!!!
  मुझे कोख में ही मरने दो,
बस इतनी सी इच्छा पूरी करने दो,
  मुझे कोख में ही मरने दो।।।

आपकी दुलारी और पापा की प्यारी हूँ ना,
  बस इस कल्पना में ही ज़िंदा रहने दो।।
डरती हूँ मैं ज़िंदगी जीने से अब,
  मुझे कोख में ही मरने दो।।।

किसी की जिस्मानी भूख का खाना,
  तो किसी की हवस की प्याऊ बन गयी हूँ।।
मुझे अपने गर्भ में ही कैद रहने दो,
  मुझे कोख में ही मरने दो।।।

दरिंदों की दरिंदगी और शैतान का शिकार,
  क्यूँ होता मुझ पर ही हर अत्याचार।।
मुझे जैसे पानी मे स्वच्छंद हवा तरने दो,
  बस मुझे कोख में ही मरने दो।।।।

क्या हर क़सूर मेरा ही है,
  क्यूँ मेरे लिए ही सब सूना है।।
अपने वात्सल्य के दरिया में बहने दो
  मुझे कोख में ही मरने दो।।।

हे माँ!!!
मुझे कोख में ही मरने दो।।।।

युवाकवि अरमान राज़

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