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हरियाणा विधानसभा का चुनाव: भाजपा टिकट के लिए रेवाड़ी सीट का असली हकदार कौन ?

मौजूदा विधायक या कोई युवा, नेताओं के चम्मचों को टिकट मिलना मुश्किल 


धनेश विद्यार्थी, रेवाड़ी।
हरियाणा विधानसभा की रेवाड़ी सीट पर इस बार चुनाव से पहले भाजपा टिकट पाने की जंग देखने को मिलेगी। इसके लिए अभी से भाजपा के नेताओं ने हाथ-पांव मारने शुरू कर दिए हैं। रेवाड़ी सीट के लिए भाजपा में विश्वसनीय चेहरा कौन, इस बात को लेकर मौजूदा रेवाड़ी विधायक या किसी अन्य युवा के नाम को लेकर अभी से कयास लगाए जाने लगे हैं। फिलहाल पार्टी में अंदर की खबर रखने वालों का कहना है कि भाजपा में वर्कर के काम की पूजा होती है, इसलिए नेताओं की चिलम भरने वाले चम्मचों को इस बार टिकट मिलना मुश्किल नजर आ रहा है। 

चूंकि अभी विधानसभा चुनाव को करीब तीन माह का समय शेष है मगर भाजपा की टिकट के लिए अभी से नेताओं ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। जनता के बीच जाकर खुद को उनका हितैषी बताकर सरकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। इन नेताओं को कमल के निशान पर विधानसभा चुनाव जीतना तय लगने लगा है। भाजपा को मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में पांच नगर निगमों के चुनाव और जींद उप चुनाव में विजय-श्री मिलने के बाद लोकसभा आम चुनाव में बंपर जीत मिली, जिसके बाद विपक्ष के चेहरे पर मायुसी साफ देखी जा सकती है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवारों की हार की मुख्य वजह से एक-दूसरे का सहयोग करने की बजाए उनकी हार की चाहत दिल में पालना था। ऐसे चुनाव परिणाम की कांग्रेस के बड़े चेहरों को कतई कल्पना नहीं थी। इनेलो के दो-फाड़ होने के बाद प्रदेश में वोट बैंक बंट गया और पीएम नरेंद्र मोदी के नाम का लाभ भाजपा उम्मीदवारों को भरपूर मिला और इस बात को चुनाव परिणाम भी सही ठहराते हैं। 

इसके बाद तो विपक्ष और भाजपा के हर नेता को रात-दिन, सोते-जागते बस विधायक की कुर्सी नजर लगी है। मोदी बुखार भाजपा के अलावा विपक्ष के नेताओं के सिर पर चढ़ गया है। दक्षिण हरियाणा में हाल यह है कि कांग्रेस में भी भाजपा में जाने की बात बड़े चेहरे भी सोचने लगे हैं। अहीरवाल में भाजपा बड़े कद के एक नेता के नखरों से तंग है और यह नहीं चाहती कि उनकी राजनीतिक ताकत ज्यादा बढ़े। राजनीतिक नफा-नुकसान के आंकलन के बाद ही उन्हें रूतबा भी दिया गया। उधर इस नेता से पटखनी खाने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी भाजपा में घुसने की राह पर खड़े हैं मगर यह निर्णय उनके लिए पोलिटिक्ल सुसाइड ही कहा जाएगा। 

उधर भाजपा में रेवाड़ी से विधानसभा पहुंचने से पहले भाजपा की टिकट के लिए एक अजब-गजब जंग भी अभी से नजर आने लगी है। भाजपा के मौजूदा रेवाड़ी विधायक रणधीर सिंह सबसे मजबूत दावेदार हैं मगर उनकी दावेदारी पर उम्र की वजह से अगर कोई सवाल उठता है तो उनके एक युवा रिश्तेदार मुकेश कापड़ीवास के लिए टिकट मांगा जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो भाजपा का एक अन्य युवा चेहरा अमित यादव भी मुकेश कापड़ीवास की राह रोकता नजर आएगा। उधर भाजपा जिलाध्यक्ष पंडित योगेंद्र पालीवाल के पार्टी संगठन, विधायक और सांसद के साथ मधुर संबंध रेवाड़ी से उन्हें पार्टी टिकट दिलाने में मददगार साबित हो सकते हैं। उधर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डा. हरीश यादव के भाजपा टिकट पर दावा जताने के बाद अन्य नेताओं के स्वर मंद पड़ गए हैं। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष डा. अरविन्द और सतीश खोला ने भी अपनी ओर से अलग-2 तरीके से रेवाड़ी सीट से टिकट के लिए अभी से प्रयास शुरू कर दिए है। उधर रेवाड़ी बार के उप-प्रधान रविंद्र यादव के भाजपा टिकट की दावेदारी जताने के बाद स्थिति एक अनार-सौ बीमार वाली बन गई है।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल के पंजाबी समाज पर मेहरबान होने की वजह से रेवाड़ी से विधानसभा में पहुंचने के लिए कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाली वंदना पोपली का नाम भी भाजपा टिकट के नाम लिया जा रहा है। उधर केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की बेटी आरती राव को भी मौजूदा रेवाड़ी विधायक रणधीर सिंह की टिकट की राह में बड़ी रूकावट माना जा रहा है। अगर किसी वजह से एमपी राव आरती को टिकट नहीं दिला पाते हैं तो उनके पीछे पूर्व जिला प्रमुख सतीश यादव और जिला पार्षद प्रशांत यादव का नाम भी टिकट के लिए चलाया जा सकता है। इनके अलावा बनिया समाज से दीपक मंगला का नाम भी भाजपा टिकट के दावेदारों में लिया जा रहा है। 

अहम बात यह है कि विधानसभा चुनाव में धनबल के अलावा एकजुट टीम साथ होना भी भाजपा टिकट के साथ उम्मीदवार की जीत का बड़ा आधार हो सकता है। भाजपा जिलाध्यक्ष योगेंद्र पालीवाल का नाम ऐसे निर्विवाद नेता के रूप में लिया जा रहा है, जो पार्टी लाइन पर चलते हुए सबका साथ लेकर आगे बढ़ने में कामयाब हो रहे हैं। एमपी राव इंद्रजीत के सामने अगर भाजपा आलाकमान जिलाध्यक्ष योगेंद्र पालीवाल को विधानसभा टिकट देने का प्रस्ताव रखते हैं तो राव के लिए पार्टी प्रत्याशी के नाम पर हामी भरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। मौजूदा स्थिति में भाजपा हाईकमान के सामने रेवाड़ी विधानसभा सीट के लिए यादव उम्मीदवार या किसी नए चेहरे को आगे लगाने का विकल्प मौजूद रहेगा। चूंकि मोदी लहर का असर अभी तक जनता के दिमाग से नहीं उतरा है, इसलिए किसी नए और युवा चेहरे पर भी भाजपा विधानसभा चुनाव में सियासी दांव खेल सकती है। फिलहाल भाजपा नेताओं के सामने विधानसभा टिकट पाने के लिए करीब 3 माह तक अपनी छवि को निखार कर जनता का दिल जीतने का मौका उपलब्ध है मगर पार्टी किसे अपना टिकट देगी, यह आने वाला वक्त बताएगा, फिलहाल सब अपनी गोटी फिट करने में जुटे हैं। 

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