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हरियाणा जितेगा, टी. बी. हारेगा ,राह ग्रुप फाउंडेशन का जन जागृति अभियान लांच

20 जिलों में प्रदेश के 56 राह क्लब चलाएंगे जागरुकता अभियान 



हिसार। हरियाणा प्रदेश को टी.बी. मुक्त बनाने के लिए राह ग्रुप फाउंडेशन की ओर से वीरवार को हरियाणा जितेगा, टी. बी. हारेगा जन जागृति अभियान शुरु किया गया। इस अभियान की शुरुआत राह ग्रुप फाउंडेशन ब्रांड एम्बेसडर मांऊट एवरेस्ट विजेता मनीषा पायल, हरियाणा की नामी कलाकार एनी. बी. व राह क्लबों के जन जागृति अभियान की सह-प्रभारी डा. बबली चाहर ने संयुक्त रुप से की। इससे पहले ईवेंट कॉर्डिनेटर मीनू चौहान फेमिना ने सभी मेहमानों को गुलदस्ते भेंट कर उनका स्वागत किया। इस दौरान केश कलां एवं कौशल विकास बोर्ड हरियाणा सरकार के निदेशक नरेश सेलपाड़ ने कहा कि यदि हमें अपने समाज को टी.बी. मुक्त बनाना है तो हम सब को इस दिशा में सरकार या जिला प्रशासन का सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा टी.बी पर पूर्ण रूप से नियंत्रण पाने के लिए संशोधित राष्ट्रीय तपेदिक नियंत्रण कार्यक्रम (आरएनटीसीपी) चलाया जा रहा है। 

उन्होंने कहा कि यदि लगातार 14 दिन तक खांसी ठीक न हो तो उसकी जांच निकटवर्ती सरकारी अस्पताल में करवानी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत मरीज का पूरा इलाज तो होता ही है, साथ ही मरीज के खाते में उसके विशेष प्रकार के भोजन के लिए 500-500 रुपये की माह की किस्तों के अनुसार छह किश्तों में 3000 रुपये भी सरकार देती है। इस दौरान प्रदेश स्तर पर विभिन्न स्थानों पर कार्यरत राह क्लबों की अलग-अलग यूनिटों के पदाधिकारियों को टी.बी. जागरुकता अभियान के विभिन्न तथ्यों की विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान राह क्लब हिसार की अध्यक्षा पूनम मलिक, सुनिता तंवर, उपाध्यक्ष निर्मला सैनी, सुषमा बांगड़वा, मीनू चौहान फेमिना, दीपिका सहगल सहित भारी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे। 


सूचना देने पर मिलेगा ईनाम:-
इस दौरान राह ग्रुप के टी.बी. जागरुकता अभियान की सह-प्रभारी डा. बबली चाहर ने बताया कि प्रदेश में नए टी.बी. मरीज के बारे में स्वास्थ्य विभाग को प्रथम सूचना देने वाले को सरकार की ओर से 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलती है। साथ ही मरीज के उपचार, उसकी दवाई व खुराक की व्यवस्था भी पूर्ण रुप से नि:शुल्क होती है। 


पंचायतें व आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सम्मान:- 
इस दौरान राह क्लब हिसार की अध्यक्षा पूनम मलिक ने कहा कि इस जन जागरण अभियान में सराहनीय सहयोग करने वाली पंचायतों, आंगनवाड़ी वर्करों, आशा वर्करों, युवा क्लबों व समाजसेवी संस्थाओं को नव वर्ष पर विशेष सम्मान समारोह में सम्मानित किया जाएगा। 

कौन-कौन हैं ईनाम का पात्र:-
नए टी.बी. मरीज के बारे में स्वास्थ्य विभाग को प्रथम सूचना देकर प्रोत्साहन राशि पाने वालों में कोई व्यक्ति, संस्था, एनजीओ, युवा क्लब, निजी अस्पताल या केमिस्ट में से जो भी इसकी प्रथम सूचना देता है, उसे 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।


क्या है टी.बी. रोग:-
टी.बी. का पूरा नाम है ट्यूबरकुल बेसिलाइ है। यह एक छूत का रोग है और इसे प्रारंभिक अवस्था में ही न रोका गया तो जानलेवा साबित होता है। यह व्यक्ति को धीरे-धीरे मारता है। टी.बी. रोग तपेदिक, क्षय रोग तथा यक्ष्मा के नाम से भी जाना जाता है। 


टी.बी. रोग के कारण:-
वैसे तो टी. बी. रोग के यूं तो कई कारण हैं, जिनमें प्रमुख कारण निर्धनता, गरीबी के कारण अपर्याप्त व कम पौष्टिक भोजन, कम जगह में बहुत लोगों का रहना, स्वच्छता का अभाव के कारण होता है। इसके अलावा टी.बी. रोगी के संपंर्क में आने या उसकी वस्तुओं का सेवन करने या प्रयोग करने से भी यह रोग हो सकता है। इसके अलावा टी.बी. मरीज द्वारा यहां-वहां थूक देने से इसके विषाणु उडक़र स्वस्थ व्यक्ति पर आक्रमण कर सकते हैं। मदिरापान तथा धूम्रपान करने वाले भी इस रोग की चपेट में आ सकते हैं। साथ ही स्लेट फेक्टरी या अधिक प्रदूषित उद्योग मेंं काम करने वाले मजदूरों को भी इसका खतरा रहता है।


क्या हैं टी. बी. के लक्षण:-
आमतौर पर टी.बी. के मरीज को भूख नहीं लगती या बहुत ही कम लगती और उसका वजन अचानक कम हो हाता है। हमेशा बेचैनी एवं सुस्ती छाई रहती है, सीने में दर्द का एहसास होता है। साथ ही उसे हमेशा थकावट का आभास होता है और मरीज को रात के समय पसीना भी आता है। आमतौर पर मरीज को हलका बुखार रहता है और हरारत रहती है। खांसी आती रहती है और खांसी में बलगम आता है तथा बलगम में खून भी आ सकता है। कभी-कभी जोर से अचानक खांसी आने पर खून भी आ जाता है। टीबी में अक्सर गहरी सांस लेने में सीने में दर्द होता है, कमर की हड्डी पर सूजन आ जाती है और घुटने में दर्द, घुटने मोडऩे में परेशानी आना आदि इसके महत्वपूर्ण लक्षण हैं। 


ये हंै तथ्य विशेष :-
भारत वर्ष में प्रत्येक वर्ष साल 20 लाख लोग टीबी की चपेट में आते हैं 
जिनमें से एक चौथाई, यानि लगभग 5 लाख प्रतिवर्ष मर जाते हैं। 
भारत में टीबी के मरीजों की संख्या दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा है। 
औसतन दुनिया के 30 प्रतिशत टीबी रोगी अकेले भारत में पाए जाते हैं।

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