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गांव नैनसुखपुरा में बाल्मिकी परिवार की महिलाएं पुलिस सुरक्षा में मंदिर में चढ़ी



छुआछुत और धार्मिक भेदभाव का प्रतिरोध 

दबंगों ने भंडारा लगाने नहीं दिया ,भंडारे का सारा सामान गौशाला भिजवाया 
गांव में तनाव, पुलिस बल तैनात 

धनेश विद्यार्थी, रेवाड़ी। जिले के खंड जाटुसाना के गांव नैनसुखपुरा के शनिवार को प्रकाश में आए मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और अगर यह आगे बढ़ा तो यह मामला धार्मिक भेदभाव और छुआछूत का रंग ले सकता है। दोनों पक्ष अपनी बात पर अड़े हुए हैं जबकि पुलिस दोनों पक्षों को पूरी तरह संतुष्ट करने में नाकाम साबित हो रही है। 


बता दें कि जिले के गांव नैनसुखपुरा में कुछ प्रभावशाली लोग, बाल्मिकी समाज के एक परिवार की ओर से मन्नत पूरी होने पर एक मंदिर में भंडारा आयोजित करना चाहते थे, तब कुछ लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। जब इस वाक्या की सूचना पुलिस को मिली तो पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच समझौता करा दिया। रविवार को भारी पुलिस सुरक्षा के बीच बाल्मिकी समाज की महिलाएं संबंधित मंदिर में चढ़ी और वहां पूजा-अर्चना की। इसका दबंग परिवारों ने विरोध भी किया मगर पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में यह विरोध बेअसर साबित हुआ। इस मौके पर किसी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए इस गांव में प्रशासन ने एम्बुलेंस और अग्निशमन गाड़ियां भी भिजवा दी थी, ताकि किसी प्रकार की अनहोनी से निपटा जा सके। इस स्थिति के बावजूद जहां दबंग परिवार के लोगों ने मंदिर में बाल्मिकी समाज के लोगों को भंडारा लगाने नहीं दिया। प्रभावशाली लोगों ने भंडारे का सारा सामान ट्रैक्टर में डालकर गौशाला भिजवा दिया। हालांकि गत दिवस यह तय हुआ था कि बाल्मिकी परिवार भंडारे के लिए मात्र नकद राशि देगा मगर परिवार ना तो सामान को हाथ लगाएगा और ना ही इस परिवार को मंदिर में चढ़ने दिया जाएगा। यह निर्णय गत दिवस जाटुसाना थाने में डीएसपी की मौजूदगी में हुआ मगर मीडिया में आने के बाद इस मामले में प्रशासन सजग हो गया और उसने किसी अप्रिय वारदात को रोकने के लिए डयूटी मैजिस्ट्रेट नियुक्त करते हुए उपरोक्त गांव में एम्बुलेंस और अग्निशमन वाहन भी भिजवा दिए। 


विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक उक्त गांव में एक दलित परिवार ने अपनी मन्नत पूरी होने पर अपने ईष्ट देव के मंदिर में भंडारा करना चाहा तो गांव के कुछ लोगों ने इसका विरोध किया। बाल्मीकि समाज के लोगों को उस मंदिर में चढ़ने नहीं देने और उनके भंडारे के प्रसाद को किसी के द्वारा नहीं खाने की अन्दरूनी रणनीति बना ली गईं। पुलिस ने इस मामले में दखल देते हुए दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने के मकसद से बीच का रास्ता निकालते हुए यह तय किया कि बाल्मिकी परिवार भंडारे के लिए केवल पैसे देगा। 


भंडारे का सारा काम प्रभावशाली जाति के लोग करेंगे और बाल्मिकी समाज को मंदिर में नहीं चढ़ने दिया जाएगा। रविवार को बाल्मिकी समाज की महिलाएं प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना करने में तो कामयाब हो गई मगर उसके बाद प्रभावशाली लोगों ने भंडारा लगाने नहीं दिया। कुछ लोगों ने भंडारे के लिए लगाया गया पंडाल गिरा दिया और भंडारे का सारा सामान ट्रैक्टर में भरकर गौशाला में भिजवा दिया। पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच जमकर जातिसूचक अपशब्द कहे गए। देर शाम तक गांव में तनावपूर्ण स्थिति है और पुलिस बल तैनात है। पीड़ित विजयपाल और उसकी पत्नी ने इस मामले में उनको न्याय दिलाने की सरकार और प्रशासन से अपील की। 

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