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जानिए विवाह का समयकाल एवम वैवाहिक जीवन ओर मेरा अनुभव


लग्न/राशी /चलित /नवमांश कुंडली मे 7 वा भाव पति/पत्नी,पति/पत्नी का स्वभाव ,कास्ट ,चरित्र ,शक्ल(लुक) ,स्वास्थ्य को दर्शाता है मगर वैवाहिक जीवन का सुखमय/दुखमय के लिए ,मेरे अनुभव के मुताबिक 7 वे भाव ,8 वे भाव ,12 वे भाव ,2 रे भाव एवम 4 भाव के साथ इन भावो में स्थित ग्रह ,भावेशों की स्थिति ,भावो एवम भावेशों पर शुभ /अशुभ/क्रूर/पापी ग्रहों की दृस्टि /युति को अस्तकवर्ग /भावबल/षड्बल से एवम भावो /भावेशों के साथ इन भावेशों के रूलिंग प्लानेट (जिस भाव मे ऊपर वर्णित भावो के स्वामी जिस भाव/राशी में स्थित हो ,उस भाव राशी स्वामी) की स्थिति एवम इन रूलिंग प्लानेट पर शुभ/अशुभ/क्रूर/पाप/मित्र ग्रहो की युति/दृस्टि को कंसीडर करना अति आवश्यक होता है ।।

साथ मे नर्सिगिक स्त्री वर्ग के लिए पतिकारक गुरु एवम मंगल ग्रह एवम अंशांतमक पतिकारक (दाराकारक) एवम पुरुष वर्ग के पत्नीकारक शुक्र मगर अंशांतमक दाराकारक एवम दोनो स्त्री एवम पुरुष वर्ग में वैवाहिक जीवन का कारक शुक्र की स्थिति(राशी एवम भाव मे स्थिति) एवम इन ग्रहो  की शुभ ग्रह /मित्र/पाप/क्रूर/पापी ग्रहो की युति एवम दृस्टि सम्बन्धो को नेरसगिक एवम तात्कालिक देखनी अति आवश्यक है ।।

अष्टकवर्ग से विवाह का समयकाल एवम वैवाहिक जीवन का सुखमय/दुखमय देखने के लिए सभी ज्योतिष प्रेमियों/ज्योतिष विधार्थिया/ज्योतिषियो को  प्रेक्टिकल होना आवश्यक है क्योंकि अस्तकवर्ग में 7 वे ,8 वे ,12 वे ,2 रे एवम 4 भाव मे यदि किसी भी जातक /जातिका का वैवाहिक जीवन यदि सुखमय है तो इन वर्णित भावो में से कभी कभी 2 रे ,4 भाव मे कम बिंदु मिल सकते है जो यह धन एवम विलासिता के जीवन जीने का धोतक है मगर दुखमय वैवाहिक जीवन मे मेरे अनुभव में दोनो वर्गों में प्रायः यह देखने मे आया कि 2 रे एवम 4 भाव मे 30+ बिंदु मिले जो धन एवम विलासिता को दर्शाता है और ऐसे जातको को मैने एक्टर /एक्ट्रेस/उधोगपति/व्यापारियों को पाया ।।

सुखमय वैवाहिक जीवन को मेरे अनुभव में 7 वे ,8 वे ,12 वे भावो में 28 या 28+ बिंदुओं को अस्तकवर्ग में पाया चाहे 2 रे एवम 4 भाव मे अस्तकवर्ग में बिंदु 28 - हो या 28+ एवम दुखमत वैवाहिक जीवन मे वर्णित सुखमय जीवन का अस्तकवर्ग में एकदम उल्टा पाया ।।

7 वे ,8 वे ,12 वे ,2 रे एवम 4 भाव मे स्थित शुभ/मित्र ग्रहों से वैवाहिक जीवन को सुखमत एवम दुखमय दोनो को देखा इसका मुख्य कारण की इन भावो में से ज्यादा भावो के स्वामी (भावेशों ) एवम रूलिंग प्लानेट का 6 ,8, 12 भावो में स्थिति होना एवम साथ मे पाप/क्रूर/शत्रु ग्रहो की युति एवम दृष्टि पाया हैं।

विवाह के समयकाल के लिए दोनो वर्गों में सप्तमेश,अष्टमेश ,शुक्र ,दाराकारक  की युति या दृस्टि संबंध राहु या शनि ग्रह या सप्तम भाव एवम 8 वे भाव पर मंगल या शनि या राहु की दृस्टि से विवाह का समयकाल 26 के बाद ही मगर कई बार इन 7 या 8 वे भाव मे बुध की दृस्टि या स्थिति के कारण 32 या 32 + में ही विवाह का होना पाया ।।


विवाह के समयकाल के लिए तुला एवम वरसचिक राशी के साथ 7 वे भाव एवम 8 वे भाव के स्वामी को नवमांश कुंडली मे जिस राशि मे स्थित हो ,जब भी नवमांश कुंडली के इस राशि मे गुरु ग्रह का गोचर होगा या इस नवमांश कुंडली की राशि से त्रिकोण एवम सप्तम भाव /राशी  में जब भी गुरु का गोचर मार्गी गुरु में  या नावनांश कुंडली के  इस राशि से 2रे भाव या 6 भाव या 8 वे भाव या 10 वे भाव में गुरु ग्रह का गोचर वक्री अवस्था मे होने पर ,विवाह होता है मगर देश,काल,परस्थितियों को कंसीडेड करना अतिआवश्यक है ।।

इसी प्रकार नवमांश कुंडली।के सप्तमेश की स्थिति ,लग्न कुंडली मे जिस भाव/राशी में स्थित हो तो गुरु ग्रह का गोचर वक्री अवस्था मे इस लग्न राशि से 2 रे भाव ,6भाव ,8 वे एवम 10 वे भाव तथा मार्गी गुरु के गोचर में इस लग्न राशी में गुरु का गोचर ,इस राशि से 5 वे ,7 वे एवम 9 वे भाव मे हो तो 100./. सटीक समयकाल मिलता है मगर साथ ग्रहो की उपयुक्त दशा /अन्तर्दशा/प्रत्यंतर  के साथ गुरु ग्रह एवम शनि ग्रह का लग्न/राशी कुंडली के साथ नवमांश कुंडली मे भी लागू करने के बाद तीनों विधियों यानी गुरु के गोचर जैसा मैंने ऊपर पेरेग्राफ में नवमांश/राशी कुंडलियों में ,गुरु एवम शनि ग्रहो का डबल गोचर लग्न कुंडली एवम नवमांश कुंडलियों में एक साथ लगाने पर एवम डबल गोचर गुरु के साथ उस समय चल रही दशा /अंतर या विवाह के लिए उपयुक्त ग्रहो की  दशा /अंतर/प्रत्यन्तर के साथ गुरु ग्रह का गोचर राशी/लग्न/नवमांश में साथ ही साथ इसी समय मे डबल गोचर गुरु ग्रह का लग्न कुंडली एवम नवमांश कुंडली पर लगाने से 100./., विवाह के लिए सटीक समय निकाला जा सकता है मगर साथ मे ग्रहो की स्थिति से सर्वप्रथम यह देख लेना चाहिए कि जातक /जातिका का विवाह भी प्रॉमिस हो रहा है या नही ।।

कई बार मेरे अनुभव /शौध में आया कि जातक/जातिका की दशा ,गुरु ग्रह का गोचर एवम डबल गुरु एवम शनि ग्रह का गोचर ,विवाह के लिए उपयुक्त था मगर लग्न कुंडली-चलित कुंडली एवम नवमांश कुंडली मे ग्रहो की स्थिति के कारण इन जातक जातिकाओ का विवाह प्रॉमिस नही था ।।

दूसरा कारण जब इन जातक जातिका का विवाह प्रॉमिस भी था ,दशा भी उपयुक्त थी उसी समय गुरु ग्रह का गोचर के साथ डबल गोचर गुरु एवम शनि का लग्न/चलित एवम नवमांश में उपयुक्त स्ट्रोंगली था मगर किसी भी कारण जातक /जातिका ने या इनसे सम्बंधित परिवार के सदस्यों ने, विवाह करने के लिए  मना कर दिया या जो इनके लिए उस उपयुक्त विवाह के  समय ,रिश्ते आये जिनको किसी भी कारण ,विवाह के उपयुक्त समय को भविष्य में देरी से विवाह करने के लिए उपयुक्त विवाह समय को लंबित करने के कारण फिर दोबारा उपयुक्त विवाह का समयकाल दशा ,गुरु का गोचर एवम डबल गोचर गुरु एवम शनि का आया ही नही जिससे जातक /जातिका 50+ के बाद विवाह का मन बनाया एवम उपयुक्त समय भी आया मगर उपयुक्त जीवनसाथी ना मिलने के कारण ,ऐसे जातक/जातिकाये ताउम्र अविवाहित रहकर जीवन को गुजारा।।


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