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पीड़ित ने जताया मुख्यमंत्री का आभार बोला: सीएम विंडो ना हो तो जनता को लूट खाए अधिकारी-कर्मचारी


आरटीए कार्यालय पर चला मुख्यमंत्री का डंडा 
कार्यालय में बुलाकर पीड़ित को दी बगैर हस्ताक्षर की रसीद 
लाइसेंस भी हाथों-हाथ दिया, पीड़ित ने जताया मुख्यमंत्री का आभार 
बोला: सीएम विंडो ना हो तो जनता को लूट खाए अधिकारी-कर्मचारी 

धनेश विद्यार्थी, रेवाड़ी। जिले के गांव बालावास अहीर के मूल निवासी श्रीप्रकाश ने मंगलवार को उसकी गुहार सुनने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल का आभार जताया क्योंकि वह आरटीए कार्यालय की कारगुजारी से परेशान था और उसकी बात नहीं सुनी जा रही थी। सीएम विंडो में गुहार लगाने के बाद उसे बाकायदा कार्यालय में बुलाकर उसे रसीद जारी की तथा उसकी शिकायत का समाधान करते हुए हाथों हाथ लाइसेंस भी जारी कर दिया। 

इस मामले में श्रीप्रकाश ने कहा कि उसने स्थानीय आरटीए कार्यालय में भारी वाहन चलाने का अपना लाइसेंस नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था। आवेदन जमा कराते वक्त सीट पर बैठे कर्मचारी ने उससे बतौर लाइसेंस फीस 2730 रूपए मांगे। उसने यह राशि उसकी वक्त उस कर्मचारी को सौंप दी। जब उसने इसी रसीद मांगी तो कर्मचारी ने कहा कि इसकी कोई रसीद नहीं दी जाती। श्रीप्रकाश के अनुसार कुछ दिन बाद जब वह इस कार्यालय में अपना लाइसेंस लेने आया तो उसे बताया गया कि 20 मई को आपका लाइसेंस उसके स्थायी निवास पते पर डाक से भेज दिया गया। कुछ चक्कर काटने के बाद जब श्रीप्रकाश को  ना लाइसेंस मिला और ना ही जमा कराए गए शुल्क की रसीद, तब उसने 11 जून को सीएम विंडो पर अपनी गुहार लगाई। असर यह हुआ कि उधर सीएम विंडो पर श्रीप्रकाश की शिकायत पहुंची, तुरंत प्रभाव से उसके घर एक डाक पहुंची, जिसमें उनसे जल्द सचिव आरटीए से मिलने का आग्रह किया गया। मंगलवार को श्रीप्रकाश एडीसी एवं सचिव आरटीए प्रदीप दहिया से मुलाकात करने उनके कार्यालय पहुंचे, जहां एक कर्मचारी ने उसका लाइसेंस यह कहते हुए उसके हाथ में थमा दिया कि आपका पता गलत था और डाक वापस गई थी। 

उधर इस मामले का खास पहलू यह है कि पीड़ित श्रीप्रकाश के बयान अनुसार उसके लाइसेंस में जो पता दर्ज है, वह सही है और उसी पते पर सीएम विंडो को गुहार लगाने के बाद सचिव आरटीए कार्यालय से आई चिट्ठी पहुंची। फिलहाल श्रीप्रकाश को उसका लाइसेंस तो मिल गया मगर जब वे इस कार्य के लिए वसूल किए गए शुल्क की पावती लेने के लिए सचिव आरटीए प्रदीप दहिया से मिले तो उन्हें तुरंत बिना किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी के हस्ताक्षर वाली पावती थमा दी गई और उसकी सीएम विंडो पर लगाई गई गुहार को बंद कराने को कहा गया। श्रीप्रकाश ऐसा करने के लिए सहमत है मगर वह चाहता है कि उसे बताया जाए कि उस वक्त उसे इस शुल्क की पावती जारी करने से मना क्यों किया गया और अब सीएम विंडो पर गुहार लगाने के बाद यह क्यों दी जा रही है। इस तथ्य पर सचिव आरटीए भी निरुत्तर हो गए। फिलहाल श्रीप्रकाश अपने घर इस बिना हस्ताक्षर वाली रसीद को लेकर चले गए हैं। 

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