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आईएमए की राष्ट्र-व्यापी हड़ताल का रेवाड़ी में व्यापक असर, चार दर्जन से अधिक निजी अस्पताल बंद रहे



प्रैस के रूबरू होकर निजी चिकित्सकों ने रखा अपना पक्ष 
धनेश विद्यार्थी, रेवाड़ी।

पश्चिमी बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ दो बार समझौता वार्ता असफल होने के बाद पूरे देश में इंडियन मेडीकल एसोसिएशन यानी आईएमए के जुड़े निजी चिकित्सकों ने अपनी स्वास्थ्य सेवाएं रोककर आम जनता के साथ-साथ केंद्र एवं राज्य सरकारों को ऐसी स्थिति को लेकर समुचित तैयारी करने के लिए सोमवार को मजबूर कर दिया। जिला मुख्यालय रेवाड़ी में आईएमए की यह काम रोको हड़ताल आम लोगों पर व्यापक असर डाल गई। हालांकि देर शाम तक जिले के किसी भी कोने से इस विरोध के दौरान किसी मरीज व्यक्ति की मौत की सूचना नहीं मिली है, वहीं जिला स्वास्थ्य विभाग ने इस हड़ताल के बाद इस मामले पर पूरी तरह चुप्पी साध ली। 

जानकारी के मुताबिक अकेले रेवाड़ी जिला मुख्यालय में करीब पांच दर्जन निजी अस्पताल में हैं, जिनमें दंत क्लीनिक और चर्म रोग अस्पताल भी शामिल हैं। आईएमए के पदाधिकारियों की माने तो जिले में उनके करीब 200 सदस्य हैं और उनको यह विरोध सोमवार को पूरा दिन कामयाब रहा। अहम बात यह है कि इस विरोध के दौरान निजी चिकित्सकों ने अपने अस्पतालों में दाखिल पुराने मरीजों के इलाज की अन्दरूनी व्यवस्था तो की मगर बाहर से अस्पताल में दाखिल होने आए मरीजों एवं उनके परिजनों को इलाज के लिए दाखिल करने से इंकार कर दिया। उधर सरकारी क्षेत्र में तैनात चिकित्सकों ने भी आईएमए के 24 घंटे के इस काम रोको विरोध यानी हड़ताल को पूर्ण रूप से अपना समर्थन दिया। अहम बात यह है कि सोमवार को 24 घंटे के लिए हुई इस हड़ताल को लेकर किए गए विशेष प्रबंधों को लेकर जिला स्वास्थ्य विभाग ने स्थानीय मीडिया में कोई जानकारी सांझा करना भी मुनासिब नहीं समझा, जिससे साफ है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस मामले में कितने गंभीर थे। 

बता दें कि यानी आईएमए की ओर से बंगाल में एक चिकित्सक के साथ मारपीट की घटना के बाद हरियाणा प्रदेश में भी 24 घंटे के लिए निजी अस्पतालों को बंद करने का अहम निर्णय लिया गया है। इस संबंध में शनिवार को आईएमए के जिला प्रधान डा. नरेंद्र यादव की अध्यक्षता में यहां एक अहम बैठक हुई, जिसमें मौजूदा स्थिति पर चर्चा के साथ ही 17 जून को 24 घंटे के लिए सभी निजी अस्पताल बंद रखने का अहम निर्णय लिया गया। इस दिन सभी प्रकार के निजी अस्पतालों में नए मरीजों को इलाज के लिए दाखिल नहीं किया जाएगा। आईएमए के जिला प्रधान डा. नरेंद्र यादव ने आज देर शाम यहां बताया कि इस हड़ताल का असर जिला मुख्यालय स्थित करीब 50 से अधिक निजी अस्पतालों पर भी पड़ेगा। 

उन्होंने बताया कि इस विषय पर शनिवार को आईएमए के सदस्यों की एक अहम बैठक बुलाई गई, जिसमें मौजूदा स्थिति को लेकर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि चूंकि 17 जून को सरकारी अवकाश, यानी कबीरदास जयंती है, इसे ध्यान में रखते हुए 17 जून को 24 घंटे के लिए आईएमए की ओर से जिले में निजी चिकित्सक सांकेतिक हड़ताल पर जाएंगे। उन्होंने कहा कि काली पटटी बांधकर हमारा विरोध जारी है और यह रविवार को भी जारी रहेगा। डा. यादव ने साफ कहा कि जिले के निजी अस्पताल में इनडोर मरीजों को पहले की भांति इलाज की सुविधा मिलेगी लेकिन नए मरीजों को इलाज के लिए दाखिल नहीं किया जाएगा। बता दें कि जिले में आईएमए के 120 से अधिक निजी चिकित्सक सदस्य हैं। शनिवार को आईएमए के जिला प्रधान डा. नरेंद्र यादव की अध्यक्षता वाली बैठक में कई अन्य मुददों पर भी बात हुई। इस बैठक में कलावती अस्पताल से बाल रोग चिकित्सक डा. नरेंद्र यादव, डा. शिवरतन, डा. अनिल यादव, डा. आत्मप्रकाश, डा. तारा सक्सेना, डा. सुनील समेत अन्य निजी चिकित्सक शामिल हुए। 

उधर सोमवार को आईएमए के अध्यक्ष डा. नरेंद्र सिंह यादव आस्था लैब वाले की अध्यक्षता में लायनेस भवन में इस हड़ताल को लेकर मीडिया में अपना पक्ष रखने के लिए प्रैसवार्ता बुलाई गई। इसमें चार दर्जन से अधिक निजी चिकित्सक शामिल हुए। इस मामले पर आईएमए के जिला प्रैस प्रवक्ता डा. शिवरतन ने निजी चिकित्सकों के इस विरोध को पूरी तरह जायज बताते हुए प्रशासन और सरकारों की ओर से निजी चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर जरूरी कदम नहीं उठाए जाने और पश्चिमी बंगाल में एक बुजुर्ग की मौत के बाद एक चिकित्सक पर किए गए जानलेवा हमले की पुरजोर निंदा की। इस मौके पर आईएमए के जिला प्रधान डा. नरेंद्र सिंह यादव ने कहा कि केंद्र सरकार निजी चिकित्सकों की जान-माल की सुरक्षा के लिए केंद्रीय स्तर पर एक कड़ा कानून बनाकर उसे पूरे देश में लागू करे। उन्होंने कहा कि समाज के प्रबुद्ध वर्गाें, जिनमें मीडिया भी शामिल है, वह निजी चिकित्सकों पर मरीजों के परिजनों के साथ बात के बाद उनकी छवि खराब करने वाले प्रहार ना करे। 

आईएमए प्रधान ने सवाल उठाया कि आखिर निजी चिकित्सक कब तक अपने सिर पर वार झेलते रहेंगे। उन्होंने कहा कि आयुर्विज्ञान में किसी एक बीमारी के लिए निर्धारित दवा का इस्तेमाल निजी चिकित्सक करते हैं और उनका प्रभाव और दुष्प्रभाव केवल मरीज के शरीर में जाने के बाद होता है। निजी चिकित्सक इसका पूर्वाकांलन नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि हर जिले में किसी मरीज की मौत की स्थिति में लापरवाही तय करने के लिए जिलास्तर पर कमेटियां गठित हैं, जिनमें निजी चिकित्सक भी सदस्य होते हैं, उनमें शिकायत करने की बजाए पहले मीडिया ट्राॅयल और बाद में पुलिस और उस निजी अस्पताल और चिकित्सक की छवि खराब करने का कुप्रयास किया जाता है, इसे रोका जाना चाहिए। उन्होंने मीडिया से इस काम में जनता के साथ निजी चिकित्सकों को भी सहयोग देने की अपील की। 

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