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रेवाड़ी के मुख्य अडडे पर शौचालय की हालत दयनीय, रोडवेज अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान



धनेश विद्यार्थी, रेवाड़ी। लोकसभा आम चुनाव के बाद रेवाड़ी को दूसरा लंदन
और हरियाणा का चंडीगढ़ बनाने का दम भरा जाने लगा है। भाजपा नेता और
प्रशासनिक अधिकारी शहर में मूलभूत सुविधाओं को लेकर अपनी उपलब्ध्यिां
बखान करते नहीं थकते। हरियाणा विधानसभा का अक्तूबर-नवंबर में प्रस्तावित
चुनाव को पास आता देखकर भाजपा की टिकट पाने के लिए नेताओं में घमासान अभी
से शुरू हो गया है। इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी की जीत में इन्होंने
कितना योगदान डाला, यह बात भाजपा को बूथवार मिले वोटों के आंकलन से साफ
हो जाती है। शहर के विकास की तस्वीर में दाग ढूंढने के लिए कहीं दूर जाने
की जरूरत नहीं। शहर का मुख्य बस अडडा खुद इसकी मिसाल है। यहां के शौचालय
बस अडडे की व्यवस्थाओं की पोल खोल रहे हैं। चूंकि इस वक्त गर्मी का मौसम
है और हर अमीर-गरीब व्यक्ति अपनी प्यास बुझाने के लिए कम से नहीं पानी तो
जरूर पीता है। यात्रा पर निकले समझदार लोग अपने साथ घर से पानी की बोतल
लेकर चलते हैं। तेज धूप से बचाव के लिए कुछ छाता तो कुछ हल्के सूती कपड़े
पहनना अपनी पहली पसंद रखते हैं। हर कोई गर्मी और लू से बचाव की तरकीब
अपनाना रहा है। छोटे बच्चों की मां और महिला यात्री इस वक्त परेशानी में
हैं। उनके बच्चे और वे खुद लघु शंका से निवृत होने के लिए बस अडडा परिसर
में जगह तलाश रही हैं। बस अडडे पर महिलाओं के शौचालय की व्यवस्थाएं सही
नहीं। महिला यात्रियों के अलावा पुरूषों के लिए मौजूदा व्यवस्था, दूर से
उठती दुर्गन्ध की वजह से उस जगह की पहचान सुनिश्चित कर रही है। बस अडडे
के पूर्व दिशा में एक बदहाल दुर्गन्ध मारता शौचालय यात्रियों को गर्मी से
अधिक परेशान कर रहा है। उधर सरकुलर रोड के साथ बना एक अन्य शौचालय केवल
पुरूषों को लघु शंका निदान का अवसर प्रदान करता है। यात्रियों का कहना है
कि महिला एवं पुरूष यहां परेशानी झेल रहे हैं मगर रोडवेज के अधिकारी उनकी
बात नहीं सुन रहे। यह स्थिति केवल बस अडडा परिसर की नहीं, बल्कि रेवाड़ी
शहर में भी लगभग यही स्थिति चल रही है। ग्रामीण क्षेत्र से शहर के बाजार
में खरीददारी के लिए आई महिलाएं और किशोरियां भी इस समस्या से दो-चार हो
रही हैं और उनको कई घंटे तक ऐसी स्थिति झेलनी पड़ रही है। रेवाड़ी को लंदन
बनाने या चंडीगढ़ बनाने का ख्वाब देखने वाले नेता एवं प्रशासनिक अधिकारी
अभी तक शहर में महिलाओं को सुलभ शौचालय की सुविधा तक उपलब्ध नहीं। ऐसे
लोग पीएम नरेंद्र मोदी की स्वच्छता मुहिम जैसी जनहितैषी सोच को भी दिल से
स्वीकार नहीं कर रहे। विकासात्मक कार्याें के लिए बुलाई जाने वाली मासिक
बैठकों में प्रशासन कब इस मुददे पर बात करेगा, यह वक्त बताएगा मगर फिलहाल
नगर परिषद के अधिकारी को जल्द इस समस्या के समाधान के लिए जरूरी कदम
उठाने होंगे।

मुख्य बस अडडा परिसर में महिलाओं एवं पुरूषों के लिए अलग-2 शौचालय हैं।
उनकी साफ-सफाई को लेकर जब उनसे सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम
समय-समय पर इनका निरीक्षण कराते हैं। इन दिनों महिला एवं पुरूष शौचालयों
की समुचित सफाई नहीं होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं इस बात की जांच
कराता हूं।
-राजीव नागपाल, जीएस रोडवेज, रेवाड़ी।

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