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भारत पुरातन काल में विश्व गुरू के तौर पर पहचाना जाता था :राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य

महेन्द्रगढ़ : प्रमोद बेवल

भारत एक युवा देश है और उनकी क्षमताओं का पूरा लाभ उठाने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व अनुसंधान आवश्यक है। केवल युवा पीढ़ी के लिए ही नहीं बल्कि राष्ट्र की समृद्धि व विकास के लिए भी इस दिशा में नीतिगत आधार पर आगे बढ़ने की जरूरत है। यही कारण है कि आज दुनिया भर की सरकारें उच्च शिक्षा नीतियों में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दे रही हैं। भारत पुरातन काल में विश्व गुरू के तौर पर पहचाना जाता था और काशी, तक्षशिला, नालंदा, प्रयाग, मिथिला आदि प्रमुख शिक्षा के केंद्र विश्वभर के विद्वानों के बीच आकर्षण का केंद्र हुआ करते थे। यह वह दौर था जब विद्यार्थी को उसकी रूचि के अनुसार शिक्षा प्रदान की जाती थी लेकिन लॉर्ड मैकाले की अंग्रेजी शिक्षा पद्धति ने इसे पूरी तरह से बदलकर भारतीयों को महज एक क्लर्क बनाने पर ही ध्यान दिया। इसलिए जरूरी है कि शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किए जाए। इन्ही बदलावों के माध्यम से हम फिर से विश्व गुरू के रूप में अपनी पहचान बना सकते हैं। इसके लिए सूचना तकनीक, ऑनलाइन सुविधाओं, कौशल विकास व अनुसंधान पर विशेष ध्यान देना होगा। 

यह विचार हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़ में आयोजित एक दिवसीय द्वितीय वार्षिक परिसम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए हरियाणा के राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य ने अपने संबोधन में व्यक्त किए । इस अवसर पर प्रदेश के शिक्षामंत्री प्रोफेसर रामबिलास शर्मा विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरसी कुहाड़ ने की। इस मौके पर राज्यपाल के सचिव  विजय सिंह दहिया, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह, चौधरी रणवीर सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरबी सोलंकी, चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विजय कायत, महर्षि वाल्मीकि विश्वविद्यालय के कुलपति डा.श्रेयांश द्विवेदी, एनआरसी एक्वाइन के निदेशक डा. बीएन त्रिपाठी सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के निदेशक, अधिष्ठाता व वरिष्ठ प्रशासक भी मौजूद रहे।  

मानव संसाधन विकास मंत्रालय की योजना पंडित मदन मोहन मालवीय राष्ट्रीय मिशन ऑन टीचर्स एंड टीचिंग के तहत विश्वविद्यालय में आयोजित इस एक दिवसीय परिसम्मेलन में शामिल प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों व शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुखों को उद्घाटन सत्र में संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सीधा अर्थ है ऐसे मानव संसाधन तैयार करना, जो शिक्षा, व्यापार, उद्योग, सरकार, सेवा आदि क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूर्ण करने में कुशल हों। उच्च शिक्षण संस्थानों को इस दिशा में अपनी समूची ऊर्जा झोंक देनी चाहिए। गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और उत्कृष्ट अनुसंधान के लिए प्रयासरत विश्वविद्यालयों के समक्ष अनेक चुनौतियां है, जिसके समाधान के लिए संस्थानों को प्रभावी शिक्षण, अधिगम, नवाचार और अनुसंधान के स्रोत के रूप में विकसित करने के लिए कुशल नेतृत्व व अपसी सहयोग की आवश्यकता है। महामहिम ने हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरसी कुहाड़ के नेतृत्व में हुई संसाधनों के सांझाकरण की इस शुरूआत को महत्त्वपूर्ण बताया और कहा कि विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों व शोधकर्ताओं को एकजुट होकर इस मुहिम में सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुझे भरोसा है कि यह परिसम्मेलन शिक्षा के क्षेत्र में 21वीं सदी में हरियाणा को अग्रणी स्थान दिलायेगा। 

इस मौके पर महामहिम राज्यपाल ने संविधान निर्माण में बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर की भूमिका का उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालय में प्रेरणा स्वरूप उनकी प्रतिमा स्थापित करने की बात कही। राज्यपाल ने अपने विवेकाधिकार के अंतर्गत हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय को 11 लाख रूपये का अनुदान प्रदान करने की भी घोषणा की। 

इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित प्रदेश के शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने कहा कि आपसी सहयोग से ही सफलता का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्तित्व निर्माण की प्रक्रिया है। अध्ययन व अध्यापन निरंतर जारी रहना चाहिए। विश्वविद्यालय शोध के लिए बनी है और इसके बिना इनका उद्देश्य पूर्ण नहीं हो सकता। उन्होंने महाराणा प्रताप व शहीद उधम सिंह का जिक्र करते हुए स्वर्णिम भारतीय इतिहास की ओर भी शिक्षाविदों का ध्यान आकर्षित किया और उन्हें उस इतिहास को याद करते हुए भारतीय ख्याति व गौरव को पुन:स्थापित करने के लिए मिलकर साझा प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।  इस मौके पर शिक्षा मंत्री ने शिक्षण संस्थानों के कुलपतियों व प्रशासकों से कहा कि वह भी कक्षाओं के लिए कुछ समय निकाले और अपनी विशेषज्ञता व अनुभव का लाभ विद्यार्थियों को प्रदान करें।  इस अवसर पर गणमान्य अतिथियों ने हकेंवि के सूचना बुलेटिन का भी अनावरण किया ।

परिसम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरसी कुहाड़ ने महामहिम राज्यपाल  व प्रदेश के शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा सहित गणमान्य अतिथियों व प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रयास का उद्देश्य सीमित संसाधनों के सर्वोत्तम प्रयोग को बढ़ावा देना है। जिसके लिए आपसी साझेदारी वह साधन बन सकती है जिसके सहारे उच्च शिक्षा की तस्वीर बदल पाना संभव है। 

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