कारगिल युद्ध के शहीदों को शत-शत नमन: राव

धनेश विद्यार्थी, रेवाड़ी। 

करगिल विजय दिवस के अवसर पर ग्रामीण उत्थान-भारत निर्माण संस्था के संयोजक एवं क्षेत्र के प्रमुख समाजसेवी डॉ0 टी सी राव कोसली में तहसील के पास स्थित युद्ध स्मारक पर पहुंचे जहां पूर्व सैनिकों, समाज के गणमान्य व्यक्तियों, समाजसेवीओं एवं देशभक्तों के साथ दो मिनट का मौन रखकर कारगिल युद्ध के शहीदों को याद किया गया तथा पुष्प अर्पित कर शहीदों को सच्ची श्रद्धांजली दी । डॉ0 राव ने बताया कि  1999 में कारगिल क्षेत्र की बर्फिली चट्टानों पर पाकिस्तान के अर्द्ध सैनिक बल, जनरल अशरफ रशीद की कमांड में लाईट इन्फैन्ट्री के घुसपैठियों ने एल ओ सी पार करके पहाड़ियों पर बंकर बनाकर कब्जा कर लिया था । पता लगने पर हमारे जवानों ने एयर फोर्स की मदद से सभी पोस्ट खाली करवाने में कामयाब रहे। 

अंतराष्ट्रीय दबाव पड़ने पर पाकिस्तान बेनकाब होने के बाद कब्जा किये हुए पोस्ट को खाली करके 26 जुलाई 1999 को एल ओ सी से पीछे हट गए । यह युद्ध दो न्यूक्लीयर पावर के बीच था । इन सभी अमर शहीदों को देश नमन करती है, जिन्होंने अपना आज हमारे कल के लिए अपने प्राणों की आहूती देकर न्योछावर कर दिया । उन्हें हम शत शत नमन करते हैं । भारतीय सेना एक बहुत ही मजबूत और संगठित सेना है जो किसी भी बाहरी ताकत का मुॅहतोड़ जवाब दे सकती है।  जवानों के सर्वोच्च बलिदान के कारण ही राष्ट्र की एकता एवं अखंडता कायम है ।


डॉ0 राव ने उस समय की भारतीय जनता पार्टी की सरकार के प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल विहारी वाजपेयी, रक्षामंत्री जार्ज फर्नाडिश और सेना प्रमुख जनरल मलिक की तारिफ की जिनके दिशा निर्देश में भारतीय सेना ने कठीन परिस्थितियों में पाकिस्तान की कायरतापूर्ण हरकतों का मूंहतोड़ जवाब दिया । कारगिल के शहीदों के परिवारों को उस समय की सरकार ने 50 लाख की मुआवजा राशी देकर शहीदों को सच्ची श्रद्धांजली दी । डॉ0 राव ने श्री मनोहर लाल माननीय मुख्यमंत्री हरियाणा सरकार से एक बार फिर अनुरोध किया है कि कारगिल से पहले के युद्धों में शहीद हुए जवानों के परिवारों को भी 50 लाख मुआवजा राशि का भुगतान किया जाए जिनका देश सेवा में योगदान किसी भी तरह कम नहीं था । इस अवसर पर मेजर एस एन यादव, डॉ0 सुचेत, सुबेदार सतवीर, सुबेदार सुरत सिंह, इन्पेक्टर रमेश, सुबेदार सुलतान सिंह, कप्तान रामफल, कप्तान राजेन्द्र सिंह, मोहन लाल, दयानंद आर्य, कप्तान जय लाल, ओ पी डावला, डॉ0 यतेन्द्र आदि के अलावा काफी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद थे। 

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