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मानवीय-जान की कीमत कब जानेंगे प्रशासनिक अधिकारी और खाकी वाले

बसों की छतों पर नजर आता है हुजुम
परिवहन विभाग और पुलिस अधिकारी मस्त 


धनेश विद्यार्थी, रेवाड़ी। हरियाणा की मनोहर सरकार बेशक आम आदमी की सहुलियत के लिए अपनी ओर से भरसक प्रयास करे मगर जिला रेवाड़ी में परिवहन विभाग के महाप्रबंधक और एसपी नाजनीन भसीन को शायद मानवीय जान की कीमत शायद मालुम नहीं। परिवहन विभाग के नियमों और यातायात के कानून यह साफ कहते हैं कि बस की छत पर यात्रा करना कानूनन अपराध है। यातायात नियमों के तहत ऐसे वाहन चालक का नियमानुसार चालान भी किया जा सकता है लेकिन जिले में यह सब मजाक है। जिला मुख्यालय स्थित मुख्य बस अडडे से रोजाना सैंकड़ों बसें दिल्ली, जयपुर, चंड़ीगढ़ और अन्य शहरों को यात्री बसें रवाना होती हैं। यहां से ही रोजाना सैंकड़ों निजी बसें भी ठासठस भरकर अपनी मंजिल के लिए रवाना होती हैं, जिनकी छतों पर कापफी संख्या में युवाओं एवं अन्य लोगों को यात्रा करते हुए देखा जा सकता है। नाई वाली चैक और फलाई ओवर के अलावा दिल्ली रोड पर पुलिस लाइन के पास रोडवेज और निजी बसों की छतों पर सवारियों को बैठे हुए आम देखा जा सकता है। 

परिवहन विभाग के नियमानुसार निजी बसों और सरकारी बसों में यातायात नियमों की अनदेखी के लिए वाहन चालक और वाहन मालिक के खिलाफ यातायात नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाती है। इसी प्रकार पुलिस महकमा भी यातायात नियमों की पालना के लिए ऐसे वाहन चालकों के चालान काटने को बाध्य है। सचिव आरटीए भी ऐसे वाहनों के विरूद्ध कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार रखता है मगर अफसोस इतना कुछ होने के बावजूद मानवीय जान की कीमत किसी प्रशासनिक अधिकारी या खाकी वालों को समझ में नहीं रही। सीधे तौर पर यह डयूटी में कोताही का मामला भी बनता है मगर ना तो जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी इस बात की ओर ध्यान दे रहे हैं और ना ही परिवहन विभाग के अधिकारी ही इस समस्या के समाधान के लिए प्रयासरत है। सचिव आरटीए कम एडीसी भी इस मामले में गहरी नींद में हैं और लगभग प्रतिमाह उनकी ओर से बाकायदा सरकारी तौर पर एक प्रैसनोट जारी करके यह दिखाया जाता है कि वे ओवर लोड वाहनों के लगातार चालान कर रहे हैं। 

पुलिस महकमा भी इस काम में पीछे नहीं। रात में विशेष गश्त लगाने की बात कहते हुए यातायात नियमों की अनदेखी करने वालों के चालान काटने की जानकारी प्रैस नोट भेजकर मीडिया को दी जाती है मगर अफसोस सबकुछ होने के बावजूद भी मानवीय जान की कीमत किसी को पता नहीं। शायद जिला रेवाड़ी का प्रशासन, पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारी कोई बड़ा हादसा होने के बाद गहरी नींद से जाग जाए। उधर देर शाम खबर भेजे जाने तक देर शाम तक जीएम रोडवेज राजीव नागपाल, एडीसी प्रदीप दहिया और एसपी नाजनीन भसीन का पक्ष नहीं मिल पाया। 

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