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बारिश की ये बूँदें तुम्हारी याद दिलाती हैं:डॉ सुलक्षणा

सुनो! बारिश की ये बूँदें तुम्हारी याद दिलाती हैं,
जब गिरती हैं तन पर ख्वाहिशों को मचलाती हैं।

जिंदगी गुजर जाएगी लेकिन ये मिटेंगी नहीं कभी,
यादें तुम्हारी मुझे दिन रात आज भी तड़पाती हैं।

अजनबी थे हम भी जब पहली बार मिले थे कभी,
लेकिन वो पहली मुलाकात की बातें याद आती हैं।

नजरों से नजरों का टकराना तुम्हारा पलकें झुकाना,
बस खुशबू उन लम्हों की आज भी दीवाना बनाती हैं।

जो लम्हें गुजारे थे तुम्हारे संग, वो ही जिंदगी थे मेरी,
अब तो क्या सुबह क्या शामें सब उदास बीत जाती हैं।

"सुलक्षणा" जी रही है बस उन्हीं के सहारे ये जिंदगी,
सुनो यादें तुम्हारी दिल को मेरे आज भी धड़काती हैं


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