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मनेठी एम्स मामला: वन विभाग की मौखिक बात को ना माने सरकार: कामरेड राजेंद्र


धनेश विद्यार्थी, रेवाड़ी। 

मनेठी एम्स मामला दक्षिण हरियाणा की राजनीति को विधानसभा चुनाव से पहले गर्माहट देने का काम कर रहा है और इस संबंध में नेताओं और संघर्ष समिति के बयानों ने सरकार और भाजपा के नेताओं का चैन छीन लिया है मगर जिसने यह आग लगाई, वह खुद चैन की बंशी बजा रहा है। 

इस मामले पर बुधवार को एम्स संघर्ष समिति मनेठी के प्रवक्ता कामरेड राजेंद्र सिंह ने ण्क बयान जारी करके कहा कि मनेठी ग्राम पंचायत ने एम्स निर्माण के लिए 224 एकड़ 7 कनाल 7 मरला जमीन देने का जो प्रस्ताव सरकार को भेजा, वह जमीन अरावली क्षेत्र के अंतर्गत नहीं है। उनके अनुसार ग्राम मनेठी के पास कुल 1127 एकड़ 3 कनाल जमीन है। ग्राम पंचायत मनेठी ने 60 एकड़ जमीन प्रस्ताव नं 1 दिनांक 24 सितम्बर 1991 के तहत वन विभाग को दी। प्रस्ताव नं 1 दिनांक 1 जून 1994 के तहत 62 एकड़ जमीन केवल 3 साल के लिए पौधरोपण के लिए वन विभाग को दी गई। ग्राम पंचायत मनेठी ने 50 एकड़ जमीन का एक प्रस्ताव 18 जुलाई 1994 पारित करके वन विभाग को दी। प्रस्ताव नं 6, दिनांक 27 मई 2008 को 200 एकड़ जमीन केवल 3 वर्ष के लिए ग्राम पंचायत ने वन विभाग को दी। इस तरह से कुल 359 एकड़ जमीन थी। 

समिति प्रवक्ता के मुताबिक उधर वन विभाग के पास ग्राम पंचायत रिकार्ड के मुताबिक केवल 97 एकड़ जमीन पौधरोपण के लिए है, जो वन विभाग के रकबे में है। 1030 एकड़ जमीन ग्राम पंचायत के रकबे में है, जिस पर वन विभाग का कोई लेना देना नही मगर वन विभाग ने ग्राम पंचायत मनेठी की पूरी जमीन को अरावली क्षेत्र के अंतर्गत मान लिया, जिसका इस विभाग के पास कोई आधार नहीं। उन्होंने कहा कि कानून इसकी इजाजत नहीं देता कि ग्राम पंचायत की अनुमति एवं प्रस्ताव के बगैर वन विभाग कब्जा करके पौधरोपण करके जमीन को अरावली क्षेत्र घोषित कर दे। 

आज भी एम्स संघर्ष समिति वन विभाग से यह सवाल पूछ रही है कि ग्राम पंचायत मनेठी की सारी जमीन को अरावली क्षेत्र किस आधार पर घोषित किया? वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तत्कालीन वन विभाग की टीम अन्य अधिकारियों ने अरावली क्षेत्र दर्शाया है, परन्तु इसका रिकार्ड नहीं है। उन्होंने कहा कि संघर्ष समिति का मानना है कि वन विभाग ने कागजी कार्यवाही पूरी करने के लिए पौधरोपण के नाम पर धांधली की है। इस पर वन विभाग के पास कोई जवाब नहीं। समिति की मांग है कि सरकार वन विभाग की ओर से गलत तथ्यों एवं मौखिक तौर पर अरावली क्षेत्र मान लेने पर विश्वास ना करें और मनेठी में जल्द एम्स का निर्माण शुरू किया जाए। 

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