नवजात कन्या के जन्म को पर्व के रूप में मनाया जाएगा:मंजु कौशिक

महेन्द्रगढ़ :प्रमोद बेवल:

गर्भ में कन्या भ्रूण की हत्या रोकने के लिये सामाजिक ताने-बाने को तोड़कर महिलाओं को आगे आना होगा ।लिंगानुपात के अन्तर को खत्म करने में सरकार की पहल को सार्थक बनाने के लिये महिलाएं संकल्प के साथ इस बुराई को दूर करने का हौंसला दिखाएं ।

गांव बेरी में कन्या जन्म को पर्व के रूप में मनाने वाले दादा संतलाल वाल्मीकि के परिवार को सम्मानित करते हुए ये बातें राज्य में कन्या जन्म पर कुआं पूजन की प्रथा प्रारम्भ करने वाली जिला बाल कल्याण समिति की पूर्व चेयरपर्सन, मंजु कौशिक ने रविवार देर शाम कहीं । 
 
गांव बेरी में अंजु पत्नी नरेन्द्र ने 18 जुलाई को एक कन्या को जन्म दिया । वाल्मीकि परिवार ने लड़का-लड़की में भेदभाव खत्म करने के उद्देश्य से निर्णय लिया कि नवजात कन्या के जन्म को पर्व के रूप में मनाया जाएगा । तभी से उसके दादा-संतलाल, दादी-रूकमणी, ताऊ-महेन्द्र, ताई-सुमन, संदीप व अंजु, चाचा-प्रदीप, चाची-लता ने लड़के के जन्म की भांति सभी परम्पराओं को निभाते हुए नवजात कन्या के जन्म को पर्व के रूप में मनाया । इतना ही नहीं ननिहाल पक्ष नाना-जगपाल, नानी-सन्तोष, मामी-सोमबीर व मामी-रोजी ने लड़के के जन्म की तरह नवजात कन्या का छूछक देकर समाज को लड़का-लड़की में भेदभाव खत्म करने का सन्देश दिया ।

इस अवसर पर राजबीर यादव, अशोक यादव, सरपंच पवन प्रधान, पप्पु प्रधान, कालुराय व मनोहर लाल सैनी ने भी नवजात कन्या को आशीर्वाद देकर समाज को लिंगानुपात के अन्तर को खत्म करने का संदेश दिया । मंजु कौशिक ने उपस्थितजनों को गर्भ में कन्या भ्रूण की हत्या रोकने की शपथ भी दिलवाई ।

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