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कर्नाटक में कुलवीर बेनीवाल का सम्मान


धनेश विद्यार्थी, रेवाड़ी-रोहतक।
कर्नाटक की राजधानी बंगलौर में ( बंगलौर अंतरराष्ट्रीय एक्जिबिशन सेंटर) में होने वाला अंतरराष्ट्रीय वर्कशॉप, एक्सहिबिशन एवं कॉन्फ्रेंस में हरियाणा प्रदेश के रोहतक जिले से सुमेर सिंह आर्य संस्थान के अध्यक्ष कुलवीर बैनीवाल ने भाग लिया।


इस कार्यक्रम में हरियाणा से केवल सुमेर सिंह आर्य संस्थान का चयन किया गया। यह कार्यक्रम कर्नाटक सरकार, नीति आयोग भारत सरकार, स्किल इंडिया, मानव संसाधन मंत्रालय भारत सरकार के माध्यम से डिडेक एसोसिएशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में किया गया गुरूवार को 24 सितंबर को शुरू हुए यह कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसमें देश के 250 शहरों से शिक्षाविद तथा विश्व के 36 देशों से शिक्षाविद

डॉक्टर्स, इंजीनियर्स, मोटिवेटर्स शामिल हुए। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है कि नई तकनीकों को काम में ज्यादा से ज्यादा इस तरह से लिया जाए जो दूसरे को नुकसान पहुंचाएं जैसे- जलवायु परिवर्तन,  पर्यावरण बचाओ विद्यार्थियों को किस तरीके से तैयार करें कि वो देश के लिए सोचें समझें इसमें प्रत्येक विभाग के बारे में जानकारी को साझा किया गया है जैसे- चिकित्सा क्षेत्र, शिक्षा क्षेत्र, समाज में फैली हुई बुराइयों को दूर करने हेतु , पानी बचाओ, माता-पिता का सम्मान तथा किसी भी वस्तु का गलत प्रयोग किया जाए।

इसमें कुलवीर बैनीवाल जी ने एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम में शामिल सोशियल स्टडी में बच्चों को किस तरह की शिक्षा दें ( 5वीं से 12वीं तक) बच्चों की किताबों के वजन को किस तरीके से कम किया जाए ताकि बच्चे पढ़ाई में होशियार बनने के साथ- साथ खेलों में भी आगे बढ़ सकें, इस विषय पर अपनी बात रखी। ऐसा होने से देश के बच्चों को हर प्रकार के गलत कार्यों की ओर जाने से रोका जा सकेगा। सड़क सुरक्षा, भोजन-पानी, पर्यावरण सरकार से मिलने वाली फ्री सुविधाओं को ठीक तरह से काम में लेना

इसके लिए कुलवीर बैनीवाल ने एनसीईआरटी के सदस्यों के साथ विचार विमर्श किया और इनके सुझावों एवं विचारों को हरियाणा सरकार और बोर्ड तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। बैनीवाल ने इस कार्यक्रम में पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन , घटते जंगल, घटता पानी, पॉलीथिन, भोजन की समस्या, बढ़ती जनसंख्या, बीमारियां, सड़क दुर्घटना आदि समस्या से निपटना अकेली सरकार के बस की बात नहीं हैं। इसके लिए प्रत्येक नागरिक का बहुत बड़ा योगदान है जब तक प्रत्येक नागरिक वैश्विक समस्याओं को उखाड़ फेंकने हेतु तैयार नही होगा तब तक इन समस्याओं का निपटान आसान नहीं होगा किसी भी देश को विकसित करने में विद्यार्थियों का बहुत बड़ा योगदान होता है इस तरह के कार्यक्रम में शिक्षाविदों ने अपने साथ-साथ बच्चों को भी लाना चाहिए

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