रेवाड़ी, बावल और कोसली विधानसभा क्षेत्रों की तस्वीर साफ , कुल 41 उम्मीदवार चुनाव मैदान में

धनेश विद्यार्थी, रेवाड़ी।
जिला रेवाड़ी में हरियाणा विधानसभा की तीन सीटों, रेवाड़ी, बावल और कोसली क्षेत्रों के लिए सोमवार को नामांकन वापिसी का काम पूर्ण होने के बाद कुल 41 उम्मीदवार मैदान में रह जाने के बाद सियासी तस्वीर साफ हो गई है। तीनों सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार भी राष्ट्रीय और अन्य दलों के उम्मीदवारों का गणित बिगाड़ने की पूरी तैयारी कर चुके हैं।
रेवाड़ी विधानसभा क्षेत्र में जहां कुल 15 उम्मीदवार नामांकन वापिसी के बाद मैदान में रह गए हैं, जिनमें 5 निर्दलीय भी शामिल हैं। उधर बावल विधानसभा क्षेत्र के लिए कुल 11 उम्मीदवार मैदान में रह गए हैं, जिनमें 2 निर्दलीय भी शामिल हैं। इसके अलावा कोसली विधानसभा क्षेत्र के लिए नामांकन वापिसी के बाद कुल 15 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 4 निर्दलीय भी शामिल हैं। सर्वाधिक निर्दलीय रेवाड़ी विधानसभा क्षेत्र में हैं। अहम बात यह है कि रेवाड़ी और बावल सीट पर भाजपा उम्मीदवारों को निर्दलीय उम्मीदवारों से कड़ी टक्कर मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
जहां रेवाड़ी सीट पर कांग्रेस का उम्मीदवार हालत पतली होने की वजह से अपने प्रचार कार्यक्रमों में भाजपा के टिकट आवंटन में मौजूदा विधायक की टिकट काटने को कार्यकर्ताओं का अपमान बता रहा है। उधर रेवाड़ी सीट से भाजपा उम्मीदवार अपने उपर लगे आरोपों की सफाई देते घूम रहा है। उधर अन्य निर्दलीय भी अपनी जीत के पुख्ता दावे कर रहे हैं मगर सच जनता को मालुम है और सारी दुनिया के सामने 21 अक्तूबर को होने वाला मतदान इन सीटों पर विधानसभा में बैठने वाले चेहरों का निर्धारण कर देगा। 24 अक्तूबर को चुनाव परिणाम आने के बाद जिला रेवाड़ी की जनता भी रेवाड़ी, कोसली और बावल सीट पर अपने नए विधायक से जुड़ी चुनावी ज्ञान हासिल कर पाएगी।
उधर बावल सीट पर भाजपा उम्मीदवार बनवारी लाल का कांग्रेस उम्मीदवार एमएल रंगा से कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है जबकि इसे तिकोणीय बनाने में जजपा के श्याम सुंदर सभ्रवाल ने कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है। इसके बाद चुनाव परिणाम के चार्ट में अगले नंबर के लिए प्रत्याशियों में दौड़-भाग होगी। कोसली सीट पर भाजपा उम्मीदवार लक्ष्मण यादव का मुकाबला बड़ा रोचक होने जा रहा है। यादव बाहुल्य सीट पर यादव वोट बैंक में गौत्र के आधार पर मत विभाजन होने की पूरी-पूरी संभावना अभी से नजर आ रही है।
देखने वाली बात यह है कि रेवाड़ी और कोसली सीटों पर रामपुरा हाउस के समर्थकों को भाजपा उम्मीदवारों को चुनावी संग्राम में उतार दिए जाने से यह चुनाव रामपुरा हाउस की प्रतिष्ठा का भी सवाल बन गया है। जहां कोसली सीट पर जजपा प्रत्याशी रामफल कोसलिया, इनेलो से किरणपाल यादव और जगफूल यादव के अलावा पूर्व मंत्री विक्रम यादव की नाराजगी इस विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार को कड़ी चुनौती देगी मगर उसके लिए पूर्व मंत्री जगदीश यादव की मदद लाइफ गार्ड का काम करेगी।
बावल सीट के लिए जहां कांग्रेस और भाजपा दोनों ने डाक्टरों को उतारकर इस इलाके और जनता की सेहत सुधारने का बीड़ा उठा ली है मगर भाजपा प्रत्याशी का भाजपा और आरएसएस वर्करों में विरोध, मनेठी एम्स मामला, मोहनपुर की दलित बेटी की गुमशुदगी मामला समेत काफी गांवों में विरोध बनवारी लाल की विधानसभा जाने की राह को रोक रहे हैं। यह विरोध 21 अक्तूबर तक क्या गुल खिलाएगा, यह तो आने वाला वक्त बताए मगर यह तय है कि जजपा प्रत्याशी श्याम सुंदर की मौजूदगी दोनों डाक्टरों को सियासत में नानी याद दिलाने वाली है।
रेवाड़ी सीट पर भाजपा उम्मीदवार को केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत और रामपुरा हाउस पर अधिक भरोसा है और भाजपा संगठन से उनकी अभी तक अच्छे से पहचान भी नहीं हो पाई है, इसका उन्हें नुकसान होने की काफी संभावनाएं हैं। उधर रेवाड़ी शहर का व्यापारी और भाजपा वर्कर संशय की स्थिति में हैं कि वे किसके साथ जाए, कापड़ीवास के साथ या भाजपा उम्मीदवार के साथ। कांग्रेस उम्मीदवार के सिर पर जूते का भूत अभी तक प्रहार कर रहा है और उनकी स्थिति भाजपा उम्मीदवार और निर्दलीयों के सामने नौसीखिया वाली बनकर उभरी है। आम लोगों को विश्वास जीतने में वह अभी तक कामयाब नहीं हो पाया। उनका पहला विधानसभा चुनाव जीतना ही उनके लिए टेढी खीर बनता जा रहा है।
उधर रेवाड़ी विस क्षेत्र में लम्बे समय से जनसम्पर्क में जुटे दो निर्दलीय भी अपनी जीत को मीडिया प्रबंधन के माध्यम से सिरे चढाने की जुगत में हैं। अधिकांश उम्मीदवारों ने एमसीएमसी को धता बताकर प्रशासन की आंखों में धूल झोंक दी है और सोशल मीडिया पर प्रशासन आंख मूंदकर बैठा है। ऐसी स्थिति में सोशल मीडिया में अपनी खबरों के पैकेज चलवाकर उम्मीदवार अपनी मनमर्जी कर रहे हैं। सबसे अधिक दुरूपयोग फेसबुक और यूटयूब चैनल का हो रहा है। कहीं अखबार के नाम पर यूटयूब चैनल बनाकर तो कहीं, फेसबुक पर पेज बनाकर खबरों को विज्ञापन के तौर पर परोसकर एमसीएमसी को धोखा दिया जा रहा है लेकिन सरकार की ओर से स्पष्ट नियम नहीं होने की वजह से निर्वाचन विभाग और चुनाव अधिकारियों को भी कुछ नजर नहीं आ रहा या जानबूझकर इस ओर से आंख फेरी जा रही हैं, यह कोई नहीं जानता मगर सच यही है।
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