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सडके खराब,मुआवजा,किसान कर्ज माफी,खजाना खाली और नगरीय निकाय चुनाव सामने


प्रदेश सरकार का चिंतन आगे कूंआ पीछे खाई करें तो क्या करें ?

डा.एल.एन.वैष्णव
भोपाल/इसे विडम्बना नही तो क्या कहेंगे कि चाह कर भी वह नहीं कर पाया रहे हैं जो करना है क्योंकि जो कार्य किया जाना है उसके लिये धन की आवश्यकता है और खजाना खाली है? चुनाव सिर पर हैं सडके खराब,अतिवृष्टि से फसलों की स्थिति खराब होने से किसानों की स्थिति दयनीय बनी हुई है तो फिर कर्मचारियों को वेतन के लिये वेतन देने के लिये भी जद्दोजहद करनी पड रही है? जी हां कुछ एैसी स्थिति इस समय मध्यप्रदेश सरकार की बनी हुई है। विधानसभा चुनाव के समय कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का सरकार बनते ही 10 दिनों में दो लाख रूपये तक किसानों का कर्जा माफ और बिजली बिल हाफ,कांग्रेस का कहना साफ का नारा गले की हड्डी बन चुका है। कर्ज माफी के मामले में कितना हुआ इस पर प्रश्न चिंन्ह आये दिन अंकित हो रहे हैं हालांकि प्रदेश सरकार किसानों की कर्ज माफी का प्रतिशत अपने दस्तावेजों में प्रस्तुत कर रही है। लेकिन जमीनी हकीकत को कौन नहीं जानता जिसकी चर्चा इस समय नगर की गलियों से लेकर गांव चैपालों में होती सुनी जा सकती है। इसी क्रम में अगर बिजली की बात करें तो कुछ इसी प्रकार का हाल होने से जमकर प्रश्न चिंह अंकित होने के साथ चर्चाओं का बाजार गर्म होने की बात सामने आती रहती है।

खराब सडकें,मुआवजा,कर्ज माफी और चुनाव-
मध्यप्रदेश सरकार की स्थिति इस समय आगे कुंआ पीछे खाई की बतलायी जा रही है वह चाह कर भी वह नहीं कर पा रही है जिससे स्थिति में सुधार हो। वहीं सामने नगरीय निकाय चुनाव हैं प्रदेश भर की सडकों के साथ ही नगरीय क्षेत्रों तक की स्थिति सडकों के मामलों दयनीय बनी हुई है? प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के गृह नगर छिंदवाडा की स्थिति स्वयं उनसे एवं किसी से छिपी नहीं है? प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश में बर्षा के बाद लगभग चार हजार किलोमीटर से अधिक सडकों की स्थिति दयनीय है। जबकि नगरीय क्षेत्रों की सडकों को अगर इसमें जोड दिया जाये तो आप स्वयं अंदाजा लगा सकते हैं कि क्या स्थिति होगी? अब अगर इनको ठीक कराने का कार्य किया जाये तो जानकार बतलाते हैं कि लगभग 44 करोड रूपये अकेले प्रदेश की राजधानी की सडकों को दुरूस्त कराने में लग जायेंगे तो फिर मध्यप्रदेश में कितना पैसा लगेगा आप स्वयं अंदाजा लगा सकते हैं। सूत्रों की माने तो 60 प्रतिशत सडके राजधानी में दयनीय स्थिति में हैं। वहीं दूसरी ओर अनेक जगहों पर पुल पुलिया भी खराब स्थिति में हैं या फिर टूट चुके हैं। देखा जाये सडकों की स्थिति मंे मध्यप्रदेश सरकार की जमकर किरकिरी हो रही है और जनता तरह तरह की बातें कर रही है।

प्रदेश में आगामी कुछ ही महिनों में नगरीय निकाय चुनाव होना है सरकार की सडकों दयनीय स्थिति ने सरकार की नींदे उडा के रखी है। इस संबध मं दीपक विजयवर्गीय, जो मुख्य प्रवक्ता, मप्र भाजपा के हैं का कहना है कि कमलनाथ सरकार सिर्फ बहानेबाजी कर रही है। पीडब्ल्यूडी विभाग के पास सडकों के पैच वर्क के लिए भी पैसा नहीं है। कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़ रहे हैं। किसानों को मुआवजा और नई सडकें बनाने का दावा किया जा रहा है। प्रदेश की जनता को कांग्रेस सरकार बेवकूफ बना रही है। वहीं पीसी शर्मा, जनसंपर्क मंत्री का कहना है कि प्रदेश के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा कहते हैं कि राजधानी सहित प्रदेश की खराब सडकों जल्द दुरुस्त किया जाएगा। लेकिन सरकार पिछले 15 साल में जो खराब सडकें बनाई गई हैं, उनकी जांच कराएगी। देखा जाये तो सत्तारूढ दल और विपक्ष इस मामले में आमने सामने हैं जबकि मध्यप्रदेश सरकार के सामने चुनौतियों का अंबार लगा हुआ है? सडकों की खराब स्थिति से निपटने के साथ ही अति वृष्टि के कारण लगभग 40 एैसे जिले हैं जहां बाढ या बारिश ज्यादा होने से भारी नुकसान हुआ है।

जून से सितंबर माह के मध्य हुई वर्षा से लगभग 60 लाख 47 हजार हेक्टेयर क्षेत्र की 16 हजार 270 करोड़ रुपए की फसल प्रभावित होने से धरती पुत्र किसान परेशान हो गया है। वहीं शासकीय कर्मचारियों के वेतन को लेकर भी स्थिति चिंतनीय बतलायी जाती है इसी अक्टूबर माह के अंत में दीपावली का त्यौहार है और सरकार का खजाना कितना खाली है कितना भरा यह चर्चा का विषय बना हुआ है। देखा जाये तो मध्यप्रदेश सरकार के सामने चुनौतियों का एक बडा अंबार खडा हुआ दिखलायी दे रहा है वह किस प्रकार इस स्थिति से निपटती है यह तो वह ही जाने परन्तु आम जनमानस में खराब सडकें,मुआवजा,कर्ज माफी एवं बिजली को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म बना हुआ है?

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