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प्रसूता की हुई मौत परिजनों ने चिड़ावा के निजी अस्पताल पर लगाये लापरवाही के आरोप ।

झुंझुनूं जिले में चिड़ावा के एक निजी हॉस्पिटल पर पीड़ित पक्ष ने लगाये लापरवाही जैसे घमबीर आरोप ।

 पीड़ित पक्ष का कहना ये भी है कि लापरवाही की वजह से हुई प्रसूता की मौत ।
आपको बता दे कि सूरजगढ थाना क्षेत्र की 26 वर्षीय तोखा का बास की मनेष कुमारी पत्नी बलवान सिंह जाति जाट की पहली डिलेवरी हुई। प्रसव पीड़ा होने पर मंगलवार 26 नवंबर को चिड़ावा के एक निजी अस्पताल में लेकर आया गया। जहां प्रसूता को ये बोल कर भर्ती कर लिया गया कि कभी भी हो सकती है डिलीवरी ।उसके बाद 27 नवंबर बुधवार को प्रसूता ने क़रीब शाम साढ़े तीन बजे एक बच्ची को जन्म दिया, जो कि नोर्मल डिलीवरी हुई थी बिना किसी ऑपरेशन किये बिना ही । परिजनो का आरोप है कि बच्ची के जन्म के बाद प्रसूता से मिलने के लिए कहां गया, लेकिन प्रसूता से नहीं मिलने दिया गया, परिजनो में एक महिला भी थी उसको भी प्रसूता से मिलने नही दिया गया । फिर अचानक क़रीब सवा पांच बजे प्रसूता को एम्बुलेंस बुलाकर रैफर कर दिया गया। प्रसूता को जब रैफर किया गया, उसी दौरान प्रसूता ने दम तोड़ दिया था । इसके बाद प्रसूता को चिड़ावा के सरकारी अस्पताल लेकर परिजन आए। जहां चिड़ावा पुलिस को भी मौके पर बुलाया गया। शव को चिड़ावा के सरकारी अस्पताल में रखवाया गया है। वहीं अस्पताल के खिलाफ काईवाई की मांग करते हुए चिड़ावा थानाधिकारी लक्ष्मी नारायण सैनी से परिजन मिले। चिड़ावा पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरु कर दी है। गुरुवार सुबह 9:30 बजे प्रसूता के शव का मेडिकल बोर्ड के द्वारा पोस्टमार्टम होगा।
  प्रसूता के परिजन बलवान सिंह जाट, उम्मेदसिंह तथा भगीना सरपंच के पिता महेंद्र सिंह, पवन मेघवाल, नरेश जांगिड़, छोटेलाल महरिया सहित अन्य सभी परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल की लापरवाही के कारण ही प्रसूता की मौत हुई है। हालांकि प्रसूता की पहली डिलेवरी से हुई बच्ची स्वस्थ है। परिजनों की मांग है कि इस मामले में दोषियों के खिलाफ की जाए कार्रवाई ।

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