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संकल्प, यात्रा पूरी प्रहलाद ने दिये स्वच्छता के साथ जन जागृति का संदेश

प्रधानमंत्री नमो के निर्देश पर पदयात्रा का लक्ष्य पूर्ण करने वाले दमोह सांसद
दमोह संसदीय क्षेत्र की आठ विधानसभाओं में 181 किलोमीटर की पदयात्रा

डा.लक्ष्मीनारायण वैष्णव
दमोह: न सुरक्षा न विशेष सुविधा और न ही चेहरे पर किसी बडे पद का दायित्व होने का बोध पांव-पांव चल रहा था दे रहा था एकता,अखंडता,स्वच्छता के साथ राष्ट्रप्रेम का संदेश हाथ में राष्ट्रध्वज थामें लगातार बढ रहे थे कदम लक्ष्य की ओर वह भी समय सीमा में संकल्प को पूरा करने के लिये जी हां यह कोई कहानी नहीं अपितु सच्चाई है दमोह संसदीय क्षेत्र की जहां दमोह सांसद एवं केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने अपनी पदयात्रा को पूरा किया। ज्ञात हो कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 जयंती पर पूरे देश भर सांसदों को 150 किलोमीटर पदयात्रा करने के निर्देश एवं आव्हान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिये गये थे। तय समय सीमा में लक्ष्य और संकल्प के साथ प्रधानमंत्री नमो के निर्देशों का पालन करने वाले प्रहलाद सिंह पटेल सांसद बने हैं । जिसके चलते दमोह संसदीय क्षेत्र का नाम भी देश में गौरांवित हुआ है। 16 अगस्त को दमोह संसदीय क्षेत्र के देवरी विधानसभा से प्रारंभ हुई पद यात्रा का 31 अक्टूबर को दमोह विधान में समापन हुआ। दमोह संसदीय क्षेत्र की आठों विधानसभाओं में पदयात्राओं का अलग-अलग दिनांकों में पदयात्रायें निकाली गयी और 181 किलोमीटर की दूरी पांव-पांव चलकर केन्द्रीय राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने राष्ट्रभक्तों के साथ तय की। यनि देखा जाये तो निर्धारित लक्ष्य से 30 किलोमीटर अधिक को पैदल चलकर तय तो किया ही साथ में पूरे संसदीय क्षेत्र को भी इसमें सम्मिलित कर महात्मा गांधी का संदेश जनजन तक पहुंचाते हुये प्रधान मंत्री नमो के निर्देश का पालन समय सीमा में करने वाले सांसद बने।

अखंडता,एकता के साथ गौरवगाथा से परिचय-
उक्त यात्रा के दौरान दमोह सांसद भारत सरकार के केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने जहां देश की अखंडता,एकता का संदेश दिया तो वहीं दूसरी ओर उन्होने क्षेत्र की गौरव गाथा यहां के वीर सपूतों इतिहास के बारे में जनसमूह को अपने उद्बोधन के दौरान परिचित कराया। ज्ञात हो कि दमोह क्षेत्र का भारत माता को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने में एक अति महत्वपूर्ण योगदान रहा है। 1842 का बुंदेला विद्रोह का केन्द्र बिन्दु यही क्षेत्र रहा है जिसने देश के दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिये पराजित किया यही वह आग है जो आगे जाकर 1857 की क्रांति में परिवर्तित हुई। इतिहासकारों की माने तो कोनी कटंगी की पहाडियों से लेकर मडियादौ के जंगलों तक क्रांति के स्थल का फैलाव था जिसमें भारत माता को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने का संकल्प लेकर फिरंगियों के विरूद्ध विद्रोह का बिगुल फूंकने वाले क्षेत्र के शूरवीर अपना योगदान देते रहे हैं।

दमोह का गौरवशाली इतिहास-
जिले का इतिहास जहां अनगिनित शूरवीरों ने अपने प्राणों की आहुतियां भारत माता की आजादी का क्रम यानि 1842 के बुंदेला विद्रोह के समय से ही प्रारंभ हो गया था। वहीं 09 वीं 10 वीं शताब्दी की पाषण मूर्तियों के मिलने से इस बात का स्पष्ट प्रमाण मिलता है कि क्षेत्र का इतिहास कितना गौरवशाली और प्राचीन है। बात करें शूरवीरों की तो संसदीय क्षेत्र में अनेक रण वाकंुरों ने जन्म लिया अपनी मातृ भूमि के लिये प्राणों की आहुतियां दी हैं। जिसके अनेक उदाहरण मिल जायेंगे यहां तक कि दुध मुंहे बच्चे तक को मौत के घाट देश के दुश्मनों ने उतार दिया फिर भी क्रांतिकारियों ने अपनी मातृ भूमि का शीष झुकने नहीं दिया।

स्वच्छता,नशा मुक्ति का भी संदेश-
दमोह सांसद एवं भारत सरकार के केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने पदयात्रा के दौरान स्वच्छता का संदेश ही नहीं दिया अपितु उन्होने मार्ग में प्रतिदिन यात्रा के मध्य साफ-सफाई भी की उपस्थितों को एैसा करने की प्रेरणा दी। वहीं प्लास्टिक के प्रयोग से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से बतलाया साथ ही उन्होने मार्ग तथा क्षेत्र में साफ-सफाई कर पालिथिन,प्लास्टिक को एकत्रित किया। इस अवसर पर श्री पटेल ने मध्यप्रदेश सरकार से पालिथिन एवं प्लास्टिक को एकत्रित कर नष्ट करने के लिये प्रक्रिया एवं सहयोग करने का आग्रह भी किया। इसी क्रम में श्री पटेल ने क्षेत्र में अपने उद्बोधनों के दौरान नशा मुक्ति के लिये भी संकल्प दिलाये उन्होने नशा के प्रयोग से होने वाले नुकसान को विस्तार से बतलाया। उन्होने कहा कि युवा पीढी को अपनी उर्जा को राष्ट्र ,व्यक्ति,चरित्र निर्माण में लगाना चाहिये।

पंाव चलते कदमों ने नापी 181 कि.मी.दूरी-
दमोह सांसद एवं भारत सरकार के केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने पदयात्रा के दौरा पांव-पांव चलकर लगभग 181 किलोमीटर की दूरी पदयात्रा के दौरान तय की । ज्ञात हो कि भारत के प्रधानमंत्री नमो के आव्हान पर पूरे देश में सांसदों को अपने क्षेत्र में महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती पर पदयात्रायें करने का आग्रह किया था जिसमें 150 किलोमीटर की दूरी 150 लोगों को लेकर तय करने कहा गया था । 16 अगस्त 2019 को दमोह संसदीय क्षेत्र के देवरी विधानसभा से श्री पटेल ने पदयात्रा का शुभारंभ किया। जो लगातार चार दिनों तक चली और 90 किलोमीटर की दूरी इस यात्रा में तय की गयी। प्रथम पद यात्रा देवरी,रहली और पथरिया विधानसभा क्षेत्र में निकाली गयी।

कब और कहां-कहां पदयात्रा-
महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती पर आयोजित पदयात्रा का शुभारंभ दमोह सांसद एवं भारत सरकार के केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने दमोह संसदीय क्षेत्र के देवरी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम अनंतपुरा से किया। ज्ञात हो कि महात्मा गांधी ने स्वयं 01 नबम्बर 1933 को यहीं एक आमसभा की थी एवं रात्रि में विश्राम किया था। इसके बाद महात्मा गांधी पदयात्रा करते हुये ग्राम चांदपुर,छिरारी,बगारसपुर,गोपालपुरा,गुणा पहुंचे थे इनके साथ 142 राष्ट्रभक्तो ने स्वतंत्रता संग्राम के महान यज्ञ में सहभागिता की थी एवं अंनतपुरा से गुणा के मध्य 22 किलोमीटर की यह पदयात्रा थी। मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने इसी मार्ग को चुना और रात्रि विश्राम भी यहीं किया। दिनांक 17 अगस्त 2019 को रहली विधानसभा के ग्राम बलेह से प्रारंभ हुई मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के नेतृत्व में पदयात्रा ग्राम घाट पिपरिया,गुंजौरा,उदयपुरा,पटेरिया,गढाकोटा,खैजरा,दतपुरा,घोघरा होते हुये पथरिया विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बांसा कलां पहुंची और यहीं रात्रि विश्राम किया।

तीसरे दिन 18 अगस्त को बांसाकलां से पदयात्रा फिर प्रारंभ हुई और पथरिया नगर,ग्राम बेलखेडी,नोरू तिराहा,मारा तिराहा,छापरी,सदगुंवा तिराहा,सेमरा तिराहा,जोरतला ग्राम खोजाखेडी पहुंची जिसकी दूरी लगभग 23 किलोमीटर थी। पदयात्रा का चैथा दिन 19 अगस्त पथरिया विधानसभा क्षेत्र के ग्राम खोजाखेडी से प्रारंभ हुई जो ग्राम परसोरिया,पिपरिया तिराहा,तिदौनी तिराहा,ईमलाई तिराहा होते हुये दमोह दमोह नगर प्रवेश की और पलंदी चैराहा,बडा पुल,यशवंत चैक होते हुये बजरिया वार्ड क्रमांक 03 गु़रूद्वारा पहुंची। ज्ञात हो कि 02 दिसम्बर 1933 को महात्मा गांधी ने गुरूद्वारा की नींव स्वंय रखी थी। पदयात्रा इसके बाद आगे की प्रस्थान कर चमनचैक,घंटाघर,अंबेडकर चैक,कीर्ति स्तम्भ होते हुये वीरांगना रानी आवंती बाई की प्रतिमा स्थल पर पहुंची माल्यापर्ण के बाद इस चार दिवसीय पदयात्रा का समापन हुआ। ज्ञात हो कि मंत्री प्रहलाद पटेल के नेतृत्व में पदयात्रा के प्रथम चरण में 90 किलोमीटर की दूरी चार दिनों में तय की थी।

 पदयात्रा का दूसरा चरण 05 अक्टूबर को जबेरा विधानसभा के ग्राम कुसमी मानगढ से प्रारंभ हुआ जिसमें ग्राम धनेटा तिराहा,गुबरा तिराहा,सिंग्रामपुर में वीरांगना रानी दुर्गावती की प्रतिमा स्थल पर पदयात्रा पहुंची जहां माल्यापर्ण कर इसका समापन हुआ जिसमें 10 किलोमीटर की दूरी पैदल चलकर तय की गयी। 22 अक्टूबर को हटा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम सगौनी से पुनःपदयात्रा का शुभारंभ हुआ जो कि ग्राम पटेरिया,मझगुंवा,धनगुंवा,कालाकोट,देवरी रतन,मोहास होते हुये ग्राम कुम्हारी पहुंची जहां समापन हुआ। इस पदयात्रा में 13.5 किलोमीटर की दूरी तय की गयी। दिनांक 23 अक्टूबर को बंडा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बरेठी से प्रारंभ हुई जो ग्राम ककरट तिराहा,गेर तिराहा,गूगरा,चंडी माता,जालमपुर,सेमरा रामचंद्र,जगथर,बिजरी होते हुये बंडा नगर पहुंची जहां इसका समापन हुआ जिसकी दूरी 19 किलोमीटर रही। 23 अक्टूबर को देवरी विधानसभा के ग्राम झिरिया खेडा पदयात्रा प्रारंभ हुई ग्राम सुना,डोभी सिमरिया,महाराजपुर,पनारी 13 किलोमीटर की दूरी तय करते हुये चैसठ योगिनी माता मंदिर पहंुची।

दिनांक 29 अक्टूबर को पथरिया विधानसभा के बटियागढ जनपद के ग्राम पंचायत बेलखेडी से पदयात्रा प्रारंभ हुई। ग्राम घूघस,कनौरा रामनगर से होकर 11 किलोमीटर की दूरी तय करते हुये पदयात्रा कलेही माता मंदिर पहुंची। इसी क्रम में 30 अक्टूबर को दमोह विधानसभा के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत राजा पटना से पदयात्रा प्रारंभ हुई। ग्राम अर्थखेडा,टौरी,सलैया,बजरंगगढ,कांकर,ईमलिया होकर 12 किलोमीटर की दूरी तय करते हुये पदयात्रा ग्राम खर्राघाट पहुंची। वहीं 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभ भाई जयंती पर दमोह विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बांसा तारखेडा से पदयात्रा का शुभारंभ हुआ। पदयात्रा ग्राम सिहोरा पडरिया,कौरांसा,बरबांसा होते हुये दमोह नगर में प्रवेश की जो कि सागर नाका,हिरदेपुर,घंटाघर होकर 11.5 किलोमीटर की दूरी तय करते हुये वीरांगना रानी आवंती बाई की प्रतिमा स्थल पर पहुंची जहां समापन किया गया।

समापन पर साफ-सफाई
दमोह सांसद एवं भारत सरकार के केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने पदयात्रा के दौरान लगातार साफ-सफाई स्वच्छता का संदेश ही नहीं दिया अपितु स्वयं घंटो इस कार्य को किया। पदयात्रा के समापन के अवसर पर स्थानीय तहसील ग्राउंड के विशाल परिसर में कई टंन कचरे को साफ करने के लिये जैसे ही वह अचानक मुडे कि देखते ही देखते साथ चल रहे लोगों ने हाथ बटना प्रारंभ कर दिया और घंटों में विशाल परिसर साफ हो गया ।



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