कहानी 22 साल के IPS की, जिनकी माँ दूसरे के घरों में खाना बनाती थीं, पिता लगाते थे ठेला


नई दिल्ली: दोस्तों कुछ लोगों को हमेशा ऊंचे ख्वाब देखना पसंद होता है, देखिये वाकई में ऐसा करना बिलकुल भी गलत नहीं है. जब तक आप अपनी सोच के दायरे को बुलंद नहीं रखेंगे तो बड़े काम कैसे कर पाएंगे? ऐसे इंसान अपनी ज़िंदगी में कामयाबी को ज़रूर चूमते हैं जो, न सिर्फ ऊंचे ख्वाब देखते हैं वल्की उन्हें पूरा करने के लिए दिन के उजाले में कड़ी मेहनत करते रहते हैं. जब तक उन्हें अपनी मंजिल न मिल जाये वो चेन से नहीं बैठते. आज की इस कहानी से हर युवा को सीखना चाहिए. मुश्किलें कितनी भी क्यों न हो, अगर आपमें हिमात है वो आप हर काम कर सकते हैं.

गुजरात में रहने वाले एक गरीब लड़के 'सफिन हसन' की कहानी बिलकुल वैसी ही है. इन्होने अती गरीबी के चलते भी अपने सपनों को साकार करने के लिए रात दिन कड़ी मेहनत की और वो उसमें कामयाब भी हुए. साफिन का परिवार एक बेहद गरीब तबके से आता है. ये लोग जीवन यापन करने के लिए चाय और अंडे का ठेला लगाते थे और माँ दूसरों के घरों में खाना बनाने का काम करती थीं.

आपको शायद इस बात पर यकीन न हो, जब साफिन एनआईटी में पढने के लिए पहुंचे थे तब उनका ठीक से अंग्रेजी न बोलने की वजह से जमकर मजाक बनाया जाता था.
इसके बावजूद भी जब वो यूपीएससी में अपना इंटरव्यू देने गए तो उन्होंने अंग्रेजी भाषा को ही चुना. क्योंकि उन्हें हमेशा जिद रहती थी अपने कमज़ोर पहलुओं को मजबूत करने की.
जब वो यूपीएससी की तैयारी करने के लिए दिल्ली आए तो उनके ही गांव के एक मुस्लिम दंपति ने इनका खर्च उठाया, क्योंकी वो अच्छी तरह से इस बात को जानते थे की ये लड़का जो ठान लेता है वो करके ही दिखाता है.
यूपीएससी के रिजल्ट के जब नतीजे सामने आये तो आपको 175वीं पोजिशन मिली, जिससे उनका आईपीएस में जाना लगभग तय हो चूका था. साफिन ने जब इस खबर को सबसे पहले अपने माँ-बाप को सुनायी तो उनकी आँखों से खुशी के आंसू झलक उठे. उनके माता पिता के लिए ये वो पल था जिसका उन्होंने ज़िंदगी भर बेसब्री से इंतज़ार किया था.

देश के सबसे कम उम्र के युवा IPS, 'सफिन हसन' की कहानी
आपको यह जान कर हैरानी होगी की जब साफिन का पहला यूपीएससी का पेपर होना था उसके ठीक कुछ दिन पहले उनका एक्सीडेंट हो गया था, उन्हें कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा था. ऐसे हालातों में भी गुजरात के इस युवा ने अपनी IPS बनने की इच्छा को दफ़न नहीं होने दिया.

इससे पहले सफिन के माता पिता किसी डॉयमंड इंडस्ट्रीज में काम करते थे, फिर ऐसा वक़्त भी आया की मंदी के चलते उनके माता-पिता को अपनी नौकरियां छोड़नी पड़ीं. इनके पिता के पास इलैक्ट्रिशियन का हुनर था वे रोज़ दिन भर कुछ न कुछ काम करते और शाम के वक़्त चाय और अंडे का ठेला लगाते थे.

माँ ने भी लोगों के घरों में खाना बनाने का काम शुरू कर दिया था. जिससे इनकी आजीविका चलने लगी थी. साफिन ने एक लोकप्रिय प्रोग्राम जिंदगी विद साफिन के दौरान ये बताया कि बचपन में उन्होंने खुद अपनी माँ के साथ मिलकर अपना घऱ बनाया था. क्योंकी उनके पास इतना भी पैसा नहीं बच पाता था जिससे वह दुसरे मज़दूर को अपना घर बनाने के लिए पैसा दे पाते.

गरीबी के चलते संघर्ष करने का हौसला मिला
दोस्तों आईपीएस साफिन हसन बताते हैं कि वे जब अपने घर की माली हालत और परेशानियों को देखते थे तो उन्हें अपने सपने को साकार करने के लिए दुगनी मेहनत करने का होसला मिल पाता था.
इसके बाद वे और भी ज़्यादा दिलचस्पी से पढाई करना चालू कर देते थे. अपने स्कूल में वो सबसे पढाकू बच्चे के रूप में मशहूर थे. गांव के प्राइमरी और हाईस्कूल की पढाई के बाद उनके पास इतना भी पैसा नहीं था कि वो शहर में जाकर किसी कॉलेज में दाखिला ले सकें. इस दौरान एक अच्छा काम ये हुआ कि उनके एक प्राइवेट इंटर कॉलेज खुल गया जहाँ उन्होंने कम फीस पर एडमीशन मिल गया.

जो होता है वो अच्छे के लिए ही होता है

दोस्तों सफिन हसन हमेशा अपने इंटरव्यू में सभी लोगों से ये बात कहते हैं. कि जो होता है, उसके पीछे कोई न कोई बड़ी वजह जरूर होती है, लेकिन उस वक़्त हम समझ नहीं पाते. वो अक्सर अच्छे के लिए ही होता है.


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