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ये ’बाबुल’ ठाठ से विदा करेंगे इन जरूरतमंद बेटियों को

भामाशाह महेन्द्र कोठारी ने उठाया बीड़ा, पांच बेटियों का रचाएंगे ब्याह 

राजसमन्द:पवन वैष्णव: अक्सर माता-पिता का सपना होता है कि अपनी लाड़ली बिटिया का कन्यादान (विवाह) खूब धूमधाम से कर उसे भावी गृहस्थ जीवन के लिए विदा करे और कुछ इसी तरह के अरमान हर बेटी के मन भी बचपन से ही पलते है कि वह अपने बाबुल के यहां से पूरी शान से विदा हों लेकिन कहीं आर्थिक अभावों में तो कहीं प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते न मां-बाप के सपने साकार हो पाते है और न ही बिटिया के अरमान। ऐसे में यदि कोई भामाशाह या समाजसेवी हाथ बढ़ाते हुए लाखों का खर्च कर पूरी शानो-शौकत से ऐसी बेटियों के हाथ पीले कराए और कन्यादान कर पिया के घर विदा करे तो यह नेक कार्य पूरे समाज के लिए मिसाल एवं प्रेरणादायी हो जाता है। कुछ ऐसा ही नेक एवं पुण्य काम केलवा हाल राजसमन्द निवासी भामाशाह, समाजसेवी एवं मार्बल उद्यमी महेन्द्र कोठारी करने जा रहे है।       

दूसरी तरफ प्रायः यह कहा और सुना जाता है कि एक पिता के लिए अपनी बेटी का कन्यादान करना सौभाग्य का विषय होता है, ऐसे में यदि कोई पिता अपनी पुत्री के विवाह के साथ आर्थिक या पारिवारिक कारणों से असहाय, असमर्थ व बेसहारा बेटियों का भी धूमधाम से विवाह कराए और तमाम रस्मों-रिवाज अदायगी के साथ पिया के घर के लिए विदा करे तो शायद उसे इस काम से मिलने वाला सुख बयां नहीं किया जा सकता। समाजसेवी महेन्द्र कोठारी ने भी ऐसा ही अनूठा काम हाथ में लिया है और वे अपनी बेटी प्रेक्षा के विवाह के दौरान कमजोर वर्ग की ऐसी पांच बेटियों का ब्याह रचाने जा रहे है। वे इन पांचों बेटियों का विवाह धूमधाम कराने एवं कन्यादान कर उनका सुखी संसार बसाने के लिए इन दिनों तैयारियों में जुटे है। उनके इस कार्य को अंजाम तक पहुंचाने के लिए करीब 100 कार्यकर्ताओं की टीम भी पूरी तरह मुस्तैद है।

वैसे देखा जाए तो समाजेसवी कोठारी शुरू से ही अपने व्यवसाय के साथ विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं से सक्रिय रूप से जुड़े है तथा अनेकों सेवा कार्यो को बखूबी अंजाम दे चुके है लेकिन इस बार वे जो करने जा रहे है वह न सिर्फ एक मिसाल है बल्कि सम्पूर्ण समाज के लिए प्रेरणादायी भी है। बेटी बचाओ की भावना उनके मन में शुरू से ही बनी हुई है। अपने घर बेटी के जन्म होने पर गीत गायन में आई महिलाओं को चांदी के सिक्के बांटकर खुशियां मनाने वाले कोठारी ने तभी से निर्धन एवं बेसहारा बेटियों की यथासम्भव मदद करने एवं उनके धर्म पिता बनकर उनका कन्यादान करने का संकल्प लिया हुआ है। होली, दीपावली हो या परिवार में किसी का जन्म दिन, शादी की सालगिरह जैसे अवसरों पर वे समाज के कमजोर तबके के साथ ही खुशियां बांटते हुए मनाते है। बेटी प्रेक्षा, प्रियांशी व बेटे प्रिंस का जन्म दिन तो जरूरतमंद परिवार की मदद में ही बीतता है। उनकी पत्नी स्नेहलता कोठारी भी पूरे मनोयोग से सेवा कार्यो में उनका साथ देती रही है। उनके बड़े भ्राता बाबूलाल कोठारी भी सदैव उन्हें नेक कार्यो के लिए प्रोसाहित किया।     

उल्लेखनीय है कि महेन्द्र कोठारी की बेटी प्रेक्षा का विवाह देवगढ़ हाल मुम्बई निवासी चिराग मेहता से तय हुआ है। इस पर कोठारी ने अपनी बेटी के विवाह के साथ जरूरतमंद परिवारों की पांच बेटियों का भी विवाह कराने का मानस बनाया। इसके तहत छह दिसम्बर को इन पांचों कन्याओं का भी धूमधाम से विवाह कराया जाकर इन्हें दाम्पत्य जीवन के लिए विदा किया जाएगा।

कन्यादान के साथ करेंगे घर बसाने का इंतजाम  
विवाह में कन्यादान के रूप में इन बेटियों को भामाशाह कोठारी की ओर से आलमारी, पलंग, बिस्तर, रजाई, पायजेब, बिछिया, अंगूठियां, सूट, चूल्हा, पंखा आदि के साथ ही बर्तन सहित घर में दैनिक उपयोगी सभी तरह के साजो-सामान दिए जाएंगे। इस तरह पूरा घर बसाने के सारे इंतजाम किए जाएंगे।

कन्याओं के नाम कराएंगे एफडी 
विवाह में हथलेवा के समय कन्यादान में एकत्र होने वाली राशि के साथ ही सरकार से देय सामूहिक विवाह की अनुदान राशि की इन बेटियों के नाम बैंक में एफडी कराना तय किया गया है ताकि यह राशि भविष्य में इनके लिए उपयोगी बन सके।

इन बेटियों के हाथ पीले कराएंगे भामाशाह कोठारी
भामाशाह महेन्द्र कोठारी ने बेसहारा बेटियों का अपने हाथों कन्यादान कराने का अपना संकल्प पूर्ण करने के लिए ऐसी पांच जरूरतमंद बेटियों का चयन किया जिन्हें वाकई सहारे की दरकार है। इनमें किसी बेटी के माता-पिता इस दुनिया में है ही नही ंतो किसी के मता-पिता बीमारी, आर्थिक अभावों या अन्य कारणों से अपनी बेटी का विवाह करा पाने में असमर्थ है। इसके तहत केलवा निवासी निरमा खटीक की मां प्यारीबाई व पिता सुरेश का बचपन में निधन हो गया था। उनका पालन पोषण दादा-दादी कर रहे है जिसकी शादी बागोल निवासी भरत पुत्र भगवती लाल खटीक से होगी। इसी तरह लूणेता टाडगढ़ (अजमेर) निवासी टेमू के पिता टीकमसिंह रावत का निधन हो गया एवं मां जेठीबाई मजदूरी कर पाल रही है जिसकी शादी दर्रा (भीम) निवासी रोशनसिंह रावत से होगी। कांकरोली निवासी कविता सेन के पिता रमेश सेन अक्सर बीमार रहते है एवं मां घरेलू काम कर रही है। उसकी शादी उदयपुर निवासी हरीश पुत्र ख्यालीलाल से होगी। डांग का वास समीचा निवासी प्रेमा कुमारी भील की मां पीहर चली गई जबकि पिता मानसिक रूप से कमजोर होने से परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है तथा उसे दादी सम्भालती है। प्रेमा की शादी गूंदी (तलादरी) निवासी रमेश पुत्र बब्बर लाल भील से होगी। इसी तरह देवी का वास समीचा निवासी उसिया भील की शादी कांकरवा कुम्भलगढ़ निवासी गोपीलाल पुत्र भग्गाराम से होगी। उसिया की मां मानसिक रूप से कमजोर है तथा परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक है।
तुलसी विवाह होगा,

उपहार में बांटेंगे तुलसी पौधे 
इस पावन अवसर पर तुलसी विवाह का अनूठा कार्यक्रम भी होगा जहां भगवान सालिग्राम एवं तुलसीजी का विवाह पूरे ठाठ-बाठ से कराया जाएगा। इसके लिए केलवा स्थित नवलश्याम मंदिर से ठाकुरजी की बारात गाजे-बाजे के साथ राजसमन्द आएगी जहां वैदिक रीतिनुसार तुलसी विवाह होगा और इसके साथ ही कमजोर तबके की उक्त पांच बेटियांे का भी विवाह भी विधिपूर्वक कराया जाएगा। खास बात यह कि तुलसी विवाह में गीत गायन के लिए आने वाली करीब 650 महिलाओं को समाजसेवी कोठारी की ओर से उपहार स्वरूप एक-एक तुलसी पौधा प्रदान किया जाएगा ताकि ये धर्मप्राण महिलाएं अपने घर तुलसीजी की सेवा कर पुण्य लाभ ले सके। इन पांचों बेटियां के विवाह के लिए आने वाली बारातों के अल्पाहार, भोजन, आवास सहित तमाम व्यवस्थाएं रहेगी। बारात का स्वागत-सत्कार बिंदोली, फेरे जैसी तमाम रस्में निभाई जाएगी।

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