मैं रटता कोण्या ईश्वर नै पर पूजूँ सूं हर इंसान नै:विकास


मैं रटता कोण्या ईश्वर नै पर पूजूँ सूं हर इंसान नै,
बस आपणै भीतर खोजे जा सूं उस भगवान नै।

चाहना कोण्या रह रही मन्नै इब नकली दाम की,
मन के भीतर लौ लगा राखी मन्नै उसके नाम की,
पाँचों इंद्री मेरे वश म्ह मारै बैठा सूं मन शैतान नै।

आये की खुशी कोण्या मन्नै और ना गए का गम,
बुराई मिलो चाहे बड़ाई जन सेवा करूँगा हरदम,
फर्ज आपणा भूलूँ ना, सही ठिकाने राखूं ध्यान नै।

आठों पहर सोचै जाऊं म्हारा सबका भला होज्या,
खाली पेट उठन आला रोज रात नै भरे पेट सोज्या,
बस कोय बी भूखा ना जावन दे घर आये मेहमान नै।

श्री रणबीर सिंह गुरु मेरे वो गाम बड़वासनी आले,
शीश प धरा हाथ मेरे उणनैं खोल दिये घट के ताले,
अजायब आला विकास गुरु के बोल प वारै जान नै।

विकास

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