बावलिया बाबा की जन्म हवेली को म्यूजियम बनाने के लिए बुगाला में जोर सोर से लगे है कारीगर

चमत्कारी व सच्चे वरदानी थे पंडित गणेशनारायण बावलिया बाबा ।
संदीप चौधरी, गुढ़ा गोडजी
झुंझुनूं/ बाबा की बैकुंठी देखने सूरज ने भी रोक लिया था अपना रथ । बेहद गरीबी में नौकरी के जुगाड में जुगल किशोर बिड़ला ने कई दिनों तक की थी बाबा की सेवा,भक्ति से प्रश्न होकर सिद्घ संत गणेश नारायण ने दिया था वरदान । प्रसिद्ध उद्योगपति पिलानी का बिड़ला परिवार देश और दुनिया में बुलंदियों पर पहुंचने का श्रेय देता है बावलिया बाबा को
बाबा की जन्म हवेली को म्यूजियम बनाने के लिए बुगाला में चल रहा है जोर सोर से कार्य ।
बुगाला- वैसे तो राजस्थान का शेखावाटी क्षेत्र नामी उद्योगपतियों, वीर  सैनिकों एवं भित्ति चित्रकला के लिए मशहूर है। लेकिन जब बात आध्यात्मिकता की आती है तो भी यहां की धरती पर अनेक संत व विद्वानों ने जन्म लिया है जिनमें सर्वश्रेष्ठ संत व विद्वान पुरूषों की श्रेणी में बुगाला में जन्मे परमहंस गणेशनारायण बावलिया बाबा का नाम आता है।बाल्यकाल में ही तपस्या एवं भक्ति के बल पर बाबा ने अनेक सिद्धियां प्राप्त कर ली थी। उनकी इसी महिमा का गुणगान आज देशभर में हो रहा है। हाल ही में बुगाला स्थित बावलिया बाबा की पैतृक हवेली को म्यूजियम का रूप दिया जा रहा है। इसे देखने के लिए बाबा के भक्त दूर दराज से भी आते रहते है। सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश मीणा किशोरपुरा ने बाबा की हवेली व उनके द्वारा काम में ली गई सामग्री को देखकर बताया कि करीब दो सौ वर्ष पहले की ये वस्तुएं वाकई में अदभुत है। बाबा की तरह उनके द्वारा काम में ली जाने वाली वस्तुएं भी चमत्कारिक है।
जीवन परिचय :- शेखावाटी के नगरदेव कहे जाने वाले संत पं.गणेशनारायण बावलिया बाबा का जन्म झुंझुनूं जिले के बुगाला गांव में विक्रम संवत 1903 पौष बदी प्रतिपदा को गुरुवार के दिन हुआ। ब्राह्मण कुल के घनश्यामदास एवं गौरादेवी के यहां जन्मे गणेशनारायण ने बाल्यवस्था में ही वेदों,व्याकरण व ज्योतिष का  पर्याप्त ज्ञान प्राप्त कर लिया था। अध्ययन करते समय केवल 14 वर्ष की आयु में ही इनकी शादी  हो गयी थी। संवत 1917 में नवलगढ़ के चतुर्भुज शर्मा की लड़की स्योनन्दी के साथ इनका विवाह हो गया। गणेशनारायण पूजा अर्चना करके ही अपना जीविकोपार्जन किया करते थे।नवरात्रि में व्यवधान उत्पन्न होने के कारण उनकी पूजा भंग हो गई। जिसके बाद वे घूमते फिरते गुढ़ागौड़जी आ गए। करीब 13 माह तक गुढ़ागौड़जी की पहाड़ियों पर उन्होंने तपस्या की। जिसके बाद कुछ समय जसरापुर के श्मशानों में भी रहे।आखिर उन्हें चिड़ावा रास आया और  शिवनगरी नाम देकर वहीं रहने लगे।चिड़ावा आगमन के वक्त बाबा पूर्ण अघोरी रूप धारण कर चुके थे। वे भगवती दुर्गा के परम उपासक थे तथा दुर्गा मंत्र बीज ड ड ड का हर वक्त जाप करते रहते थे। इनके मुंह से उस वक्त जो भी बात निकल जाती वह सत्य होती। यह चमत्कार देख कई लोग इनके परम भक्त बन गये। कई लोग इनसे डरने भी लगे क्योंकि अनिष्ट घटने वाली घटनाओं का भी पूर्व संकेत कर देते थे। सच्चे साधक होने के बाद भी लोग इन्हें पागल मान कर बावलियो पंडित कहने लगे। अपने जीवन का अधिकतम समय बाबा ने शिवनगरी चिड़ावा में ही व्यतीत किया। संवत 1969 पौष सूदी नवमी गुरुवार को बाबा ने चिड़ावा के शिवमंदिर में अपने शरीर का त्याग कर दिया।

बिड़ला को करणी बरणी चालू रहने व पिलानी को दिया शिक्षानगरी बनने का आशीर्वाद*
यूं तो बाबा ने चिड़ावा में रहते हुए लोगों को अनेक चमत्कार दिखाए। लेकिन पिलानी के सेठ जुगल किशोर बिड़ला पर उनकी अटूट कृपा रही। पिलानी से रोज चिड़ावा आकर बाबा के दर्शन किये बिना भोजन नही करने एवं उनकी सेवाभाव से खुश होकर बाबा ने बिड़ला को करणी बरणी हमेशा चालू रहने का आशीर्वाद दिया। बिड़ला ने कई बार उनसे पिलानी चलने का आग्रह भी किया लेकिन वे चिड़ावा के भगीणिये जोहड़ से कभी आगे नही गए। इसी कारण बिड़ला ने  उनकी यादगार में संवत 1959 में उन्होंने जोहड़ खुदवाकर एक घाट बनवाया। तथा उस पर एक बहुत ऊंची गणेश लाट नाम की स्तूप भी बनवाई।उस स्तूप से पिलानी साफ दिखाई देता है। उसी स्तूप से देखकर बाबा ने बताया कि पिलानी एक दिन शिक्षा नगरी बनेगा।
परोपकारी व भविष्यवक्ता थे बाबा
पण्डितजी अपने दर्शनार्थ आए भक्त जनों को प्रश्न करने से पूर्व ही उनके मन की बात बताकर उन्हें आश्चर्यचकित कर देते थे। इनकी भविष्यवाणियां कभी गलत नहीं होती थी। बाबा ने अपने जीवन काल में अनेक परोपकार के कार्य किये थे। वहीं  इन्होंने जिसे भी आशीर्वाद दिया वह धन्य हो गया।पिलानी के सेठ जुगलकिशोर बिड़ला से परमहंस का विशेष स्नेह था तथा इनके आशीर्वाद से ही बिड़ला परिवार उद्योग व व्यापार के क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित कर सका है। बिड़ला को करनी बरनी का तो रामजी को रोगोपचार का,नेमानी को जन्मपत्री तो भालोटिया को अनार का, डॉ गुलझारीलाल,कालीचरण पुजारी,गुरुदयाल सहल,मोतीलाल दर्जी,जमनादास पुजारी,देवीदत्त दायमा,औंकारमल पंसारी,गजानंद मिश्र,खेतड़ी महाराजा अजीत सिंह,चैनसुख दास,शिवबक्सराय सहित अनेक लोगों को दिखाए चमत्कार पूर्ण बातों से परमहंस के प्रति श्रद्धालुओं की भक्ति बढ़ती गयी। जिसके कारण आज देशभर में इनकी महिमा का गुणगान हो रहा है। चिड़ावा व बुगाला में लोग इन्हें ग्राम देवता के रूप में पूजते हैं।हर गुरुवार को रात्रि जागरण होता है। बाबा का प्रिय भोजन  दाल के बड़े प्रसाद स्वरूप चढ़ाये जाते है। राजस्थानी फिल्मों के जाने माने अभिनेता क्षितिज कुमार ने इनके चमत्कारों को फिल्म बावलियो पंडित में बखूबी चित्रित किया है।

इन जगहों पर बने है बाबा के मंदिर
बाबा के चमत्कारों को लेकर उनके मंदिरों व  श्रद्धालुओं की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। जन्मस्थली बुगाला,विद्यास्थली नवलगढ़, तपोस्थली गुढ़ागौड़जी व समाधिस्थली चिड़ावा प्रमुख धाम है। इनके अलावा खेतड़ी, पिलानी, मुकुंदगढ़, बांसा,घोड़ीवारा, बास नानग,कुचामन,कोलकाता, हैदराबाद, अहमदाबाद,ग्वालियर, सूरत, मुम्बई में मन्दिर बने हुए। साथ ही कई जगहों पर मन्दिर निर्माणाधीन है।
हाल ही में बुगाला स्थित बावलिया बाबा की पैतृक हवेली को म्यूजियम का रूप दिया जा रहा है। जिसमें मुंबई के कारीगर कार्य कर रहे है। और अनेक दूर-दराज के लोग बावलिया बाबा की हवेली को देखने व बावलिया बाबा के दर्शन करने यहां हर साल आते  रहते हैं

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