जर्मनी और स्वीडन के प्रोफेसरों द्वारा 22 फरवरी को, एसजीटी यूनिवर्सिटी में कार्यशाला का आयोजन

जर्मनी और स्वीडन के प्रोफेसरों द्वारा 22 फरवरी को

एसजीटी यूनिवर्सिटी में कार्यशाला का आयोजन

योगेश जांगडा:गुरुग्राम: खेल हमारी जिंदगी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खेल हमें शारीरिक तौर पर चुस्त रखने के साथ ही टीम भावना और चुनौतियों से निबटना भी सिखाते हैं। खेल के दौरान चोट लगना एक धावक या खिलाड़ी की ज़िंदगी का अभिन्न हिस्सा है। ऐसी स्थिति में थेरेपी की जरूरत पड़ती है। इससे शरीर को ठीक होने की ताकत मिलती है। फिजियोथेरेपी पूरी तरह विज्ञान पर आधारित है, जो रोगी को स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 एसजीटी यूनिवर्सिटी के फिज़ियोथेरेपी संकाय ने ‘एसोसिएशन ऑफ स्पोर्ट्स, हेल्थ एंड फिटनेस’ और ‘एसोसिएशन ऑफ न्यूरो रिहैब’ के सहयोग से 22 फरवरी 2020 को एक अंतराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया है जिसका विषय है- “थेरेप्यूटिक्स एंड रिहैबिलटेशन”। इंस्टीट्यूट ऑफ बेवुंग एंड स्पोर्ट्स एंथ्रोपोलॉजी, जर्मनी के रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. पीटर हर्म और स्वीडन से बाल चिकित्सा पुनर्वसन विशेषज्ञ डॉ. बेटिना हर्म इस कार्यशाला का संचालन करेंगे।

एसजीटी यूनिवर्सिटी के पीवीसी प्रो. जीएल खन्ना ने बताया कि कार्यशाला  में एनसीआर और हरियाणा के 200 से अधिक लोग हिस्सा लेंगे।

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