जब मानव जाति एक, तब खून-जाति-धर्म कहां से आए : डा. एमएल रंगा

धनेश विद्यार्थी, रेवाड़ी। 
जिले के गांव बनीपुर की हरिजन चैपाल में रविवार को संत कवि शिरोमणि गुरू रविदास की 643 वीं जयंती पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए पूर्व मंत्री डा. मुन्नी लाल रंगा ने संत जी के चित्र पर मालाएं अर्पित करने के बाद कहा कि गुरू साहब को यह उपाधि समाज में उनकी योग्यता की वजह से मिली। जब मानव जाति एक, तब खून-जाति और धर्म कहां से आए। 
उन्होंने कहा कि सभी इस धरा पर एक परमात्मा के घर से आते हैं, इसलिए धर्म, जाति और उच्च-निम्न का भेदभाव 600 साल पहले गुरू रविदास के समय ही स्पष्ट हो गया था। उन्होंने कहा कि जब रक्त बैंक में किसी घायल का जीवन बचाने के लिए यह नहीं देखा जाता कि रक्त किस जाति के व्यक्ति का है तो आधुनिक समाज में ऐसी सोच कोई मायने नहीं रखती। इस मौके पर उन्होंने समाज के अन्य लोगों को आपसी भाईचारा कायम रखने की अपील की। इस मौके पर उन्होंने विजेता बच्चों लोकेश, अन्नू भारद्वाज, अमित, विकास और बिन्दु को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। समारोह में प्रवक्ता नरेश कुमार, कुलदीप ढिल्लो, प्रवीन, रामेश्वर दयाल राजेश कुमार, रवीन्द्र, मोनू, लेखराम, बलबीर सिंह समेत अन्य महिलाएं शामिल हुए। 
उधर दलित नेता ओमप्रकाश डाबला ने भी संत शिरोमणि संत रविदास को रेवाड़ी में आयोजित एक अन्य समारेाह में पुष्पाजंलि अर्पित की तथा दलित समाज के लोगों को एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि छुआछूत जैसी सामाजिक बुराई से हमें लोगों को बचाना है और ऐसा करने से ही हम समाज में अपना समुचित स्थान हासिल कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि संत रविदास के जीवन की एक खासियत यह भी रही कि उनकी दयालुता की वजह से सब वर्गाें ने उनका मान-सम्मान किया मगर सामाजिक तौर पर उन्हें भी भेदभाव का सामना करना पड़ा। 

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