किस समय किये गये स्नान को कौन-सा स्नान कहते हैं? जानिए रविशराय गौड़ से

स्नान का पौराणिक महत्व 

जहां तक संभव हो, नदी, तालाब, कुएं इत्यादि जलस्रोत के निकट स्नान करें । प्राकृतिक वातावरण में स्नान द्वारा जीव पंचतत्त्व की सहायता से देह की शुद्धि करता है । इसलिए जीव की देह में रज-तम कणों का विघटन अधिक होने लगता है । जीव की प्राणदेह, मनोदेह, कारणदेह एवं महाकारणदेह इत्यादि की शुद्धि होकर सर्व देह सात्त्विकता ग्रहण करने हेतु तत्पर होती हैं तथा जीव कुछ मात्रा में निर्गुण स्तर की ऊर्जा एवं उच्च देवता का तत्त्व ग्रहण कर सकता है । जीव के बाह्य-वायुमंडल का संपर्क ब्रह्मांड वायुमंडल से भी होता है । परिणामस्वरूप जीव, ब्रह्मांड में स्थित तत्त्व अल्प मात्रा में पिंड के माध्यम से ग्रहण कर उसे प्रक्षेपित कर सकता है ।’

 सवेरे स्नान क्यों करें?

ब्राह्ममुहूर्त पर अथवा प्रातःकाल स्नान करने का महत्त्व पहले ही समझाया गया है । वह स्नान करने का आदर्श समय है । वर्तमानकाल में उस समय स्नान करना अधिकांश लोगों के लिए संभव नहीं होता । ऐसे में जहां तक संभव हो, सूर्योदय होने पर शीघ्रातिशीघ स्नान करें ।


नहाने से स्वास्थ्य लाभ और पवित्रता मिलती है। सभी प्रकार के पूजन कर्म आदि नहाने के बाद ही किए जाते हैं, इस कारण स्नान का काफी अधिक महत्व है। पुराने समय में सभी ऋषि-मुनि नदी में नहाते समय सूर्य को जल अर्पित करते थे और मंत्रों का जप करते थे। इस प्रकार के उपायों से अक्षय पुण्य मिलता है और पाप नष्ट होते हैं।

ज्योतिष में धन संबंधी परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए कई उपाय बताए गए हैं, जो अलग-अलग समय पर किए जाते हैं। नहाते समय करने के लिए एक उपाय बताया गया है। इस उपाय को सही विधि से हर रोज किया जाए तो निकट भविष्य में सकारात्मक फल प्राप्त हो सकते हैं।

जानिए उपाय की विधि:

प्रतिदिन नहाने से पहले बाल्टी में पानी भरें और इसके बाद अपनी तर्जनी उंगली (इंडेक्स फिंगर) से पानी पर त्रिभुज का चिह्न बनाएं।

त्रिभुज बनाने के बाद एक अक्षर का बीज मंत्र ‘ह्रीं’ उसी चिह्न के बीच वाले स्थान पर लिखें। साथ ही, अपने इष्ट देवी-देवता से परेशानियों दूर करने की प्रार्थना करें।

नहाते समय करें मंत्रों का जप:

शास्त्रों में दिन के सभी आवश्यक कार्यों के लिए अलग-अलग मंत्र बताए गए हैं। नहाते समय भी हमें मंत्र जप करना चाहिए। स्नान करते समय किसी मंत्र का पाठ किया जा सकता है या कीर्तन या भजन या भगवान का नाम लिया जा सकता है। ऐसा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

नहाते समय इस मंत्र का जप करना श्रेष्ठ रहता है…

मंत्र: गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरी जलऽस्मिन्सन्निधिं कुरु।।

नदी में नहाते समय पानी पर ऊँ लिखें:

यदि कोई व्यक्ति किसी नदी में स्नान करता है तो उसे पानी पर ऊँ लिखकर पानी में तुरंत डुबकी मार लेना चाहिए। ऐसा करने से नदी स्नान का पूर्ण पुण्य प्राप्त होता है। इसके अलावा आपके आसपास की नकारात्मक ऊर्जा भी समाप्त हो जाती है। इस उपाय से ग्रह दोष भी शांत होते हैं। यदि आपके ऊपर किसी की बुरी नजर है तो वह भी उतर जाती है।

किस समय किये गये स्नान को कौन-सा स्नान कहते हैं- 
जो स्नान ब्रह्ममुहूर्त में भगवान का चिंतन करते हुए किया जाता है, उसे ब्रह्म स्नान कहते हैं। - सूर्योदय से पूर्व देवनदियों में अथवा उनका स्मरण करते हुए जो स्नान किया जाता है, उसे देव स्नान कहते हैं। - सुबह-सुबह जब आकाश में तारे दिखाई दे रहे हों तब जो स्नान किया जाता है, उसे ऋषि स्नान कहते हैं। - जो सामान्य स्नान सूर्योदय के पूर्व किया जाता है वह मानव स्नान कहलाता है। - जो स्नान सूर्योदय के बाद चाय-नाश्ता करने के बाद 8-9 बजे तक या और बाद में किया जाता है, वह दानव स्नान कहलाता है। शास्त्रों के अनुसार हमें ब्रह्म स्नान, देव स्नान या ऋषि स्नान ही करना चाहिए। यही सर्वश्रेष्ठ स्नान हैं। रात के समय या शाम के समय नहाना नहीं चाहिए। यदि सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण का दिन हो तो उस दिन रात के समय स्नान किया जा सकता है।

रविशराय गौड़
ज्योतिर्विद
अध्यात्मचिन्तक
9926910965

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