सरकार को एलआईसी का आईपीओ लाने से पहले एलआईसी एक्ट में संशोधन करना होगा।

Image result for lic of india"
(Ramesh Ramawat) 
सरकार करेगी एलआईसी एक्ट में संशोधन । सरकार को एलआईसी का आईपीओ लाने से पहले एलआईसी एक्ट में संशोधन करना होगा। भले ही देश के बीमा उद्योग पर इंश्योरेंस रेगुलेटरी डेवलेपमेंट अथॉरिटी निगरानी करती हो। लेकिन एलआईसी के कामकाज के लिए संसद ने अलग से क़ानून बना रखा है। एलआईसी एक्ट की धारा 37 के अनुसार एलआईसी बीमा की राशि और बोनस को लेकर अपने बीमाधारकों से जो भी वादा करती है, उसके पीछे केंद्र सरकार की गारंटी रहती है। प्राइवेट सेक्टर की बीमा कंपनियों को ये सुविधा हासिल नहीं है।यही वजह है कि देश का आम आदमी बीमा कराने वक़्त एलआईसी के विकल्प पर एक बार ज़रूर विचार करता है।
कर्मचारी संघों ने  कहा कि यह पहल देश हित के खिलाफ है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020-21 के लिए बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार का एलआईसी में आईपीओ के जरिये अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव है। अभी एलआईसी की पूरी हिस्सेदारी सरकार के पास है। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को सरकार के निवेश पहल के हिस्से के तौर पर सूचीबद्ध किया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि शेयर बाजार में सूचीबद्धता से कंपनियों में वित्तीय अनुशासन बढ़ता है। एलआईसी कर्मचारी संघ के प्रवक्ता ने आईपीओ (इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग्स) के माध्यम से सरकारी बीमा निगम में केंद्र के एक हिस्से को बेचने की योजना का विरोध दर्ज कराते हुये संवाददाताओं से कहा कि एलआईसी में सरकार के एक हिस्से को बेचने की योजना का हम कड़ा विरोध करते हैं और यह पहल देश हित के खिलाफ है। एलआईसी की स्थापना 1956 में केंद्र सरकार ने की थी और देश में जीवन बीमा के क्षेत्र में इसकी सबसे ज्यादा बाजार भागीदारी है।

संघ प्रवक्ता ने कहा कि अगर सरकार अपने इस फैसले पर आगे बढ़ती है तो एलआईसी के विभिन्न कर्मचारी संगठन देशभर में प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम में करोड़ों बीमाधारक प्रभावित होंगे।
प्राप्त समाचार सूत्रों के अनुसार ऑल इंडिया इंश्योरेंस इम्प्लॉइज एसोसिएशन (एआईआईईए) ने तीन और चार फरवरी की एक-एक घंटे की हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। संगठन के महासचिव श्रीकांत मिश्रा ने कहा कि हम इस कदम का विरोध करते हैं। तीन और चार फरवरी को हम पहले एक-एक घंटे की हड़ताल पर बैठेंगे। इसके बाद हम आगे की रणनीति तय करेंगे। श्रीकांत ने कहा कि इससे पहले सरकार एयर इंडिया की हिस्सेदारी बेचने में सफल नहीं हो सकी थी। वर्तमान वित्त वर्ष 2019 20 में 1.05 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश की तुलना में सरकार ने वित्त वर्ष 2020 21 में 2.1 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य रखा है। बतादें कि एयर इंडिया के अलावा पिछले साल केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत पेट्रोलियम निगम लिमिटेड (बीपीसीएल) सरकार की पूरी 53.29 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री को मंजूरी दी है। सरकार का कहना था कि रणनीतिक विनिवेश से जो राशि प्राप्त होगी, उसका उपयोग सामाजिक योजनाओं के वित्त पोषण में किया जाएगा जिससे लोगों को लाभ होगा। बीपीसीएल के अलावा केंद्र सरकार की ओर से तीन सार्वजनिक उपक्रमों– कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकॉर), नीपको तथा टीएचडीसी इंडिया में नियंत्रक हिस्सेदारी की बिक्री के संबंध में सलाहकारों को अनुबंधित करने के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं। सरकार ने भारतीय शिपिंग कॉरपोरेशन के 63.75 प्रतिशत हिस्से को बेचने की भी मंजूरी दे दी है. अनुमान के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र के इन पांचों उपक्रमों- बीपीसीएल, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, नीपको, टीएचडीसी इंडिया और भारतीय शिपिंग कॉरपोरेशन के विनिवेश से सरकारी खजाने में अनुमानत: 60,000 करोड़ रुपये आएंगे ।

Post a Comment

0 Comments