नरसिंह जयंती 6 मई 2020 को ,लक्ष्मीनरसिंह की करे साधना ,पाए अमोघ फल जाने मंत्र स्तोत्र मुहूर्त

नरसिंह जयंती 6 मई 2020 को ,लक्ष्मीनरसिंह की करे साधना ,पाए अमोघ फल जाने मंत्र स्तोत्र मुहूर्त

नरसिंह पुराण के अनुसार हेमाद्रि व्रतखण्ड के भाग- 2 के पृष्ठ 41 से 49 तक, पुरुषार्थ चिन्तामणि के पृष्ठ 237 से 238 में इसे नृसिंह जयंती के नाम से भी जाना जाता है। पुराणों के अनुसार वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर दैत्यों के राजा हिरण्यकश्यपु का वध किया था और आज वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी है। अतः आज के दिन भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार की पूजा का विधान है।

नरसिंह जयंती तिथि व मुहूर्त

नरसिंह जयंती – 06 मई 2020
नरसिंह जयन्ती मध्याह्न संकल्प का समय - 10:58 प्रातः से 01:38 मध्याह्न
पारण समय - 05:35 प्रातः 07 मई 2020
नरसिंह जयन्ती सायंकाल पूजा का समय - 04:19 मध्याह्न से 07:00 सायं
चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ - मई 05, 2020 को 11:21 रात्रि बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त - मई 06, 2020 को 07:44 रात्रि बजे


नृसिंह अवतार भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में से एक है. नरसिंह अवतार में भगवान विष्णु ने आधा मनुष्य व आधा शेर का शरीर धारण करके दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु का वध किया था. धर्म ग्रंथों में भगवान के इस अवतरण के बारे विस्तार पूर्वक विवरण प्राप्त होता है जो इस प्रकार है- प्राचीन काल में कश्यप नामक ऋषि हुए थे उनकी पत्नी का नाम दिति था. उनके दो पुत्र हुए, जिनमें से एक का नाम हरिण्याक्ष तथा दूसरे का हिरण्यकशिपु था.
हिरण्याक्ष को भगवान श्री विष्णु ने पृथ्वी की रक्षा हेतु वाराह रूप धरकर मार दिया था. अपने भाई कि मृत्यु से दुखी और क्रोधित हिरण्यकशिपु ने भाई की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए अजेय होने का संकल्प किया. सहस्त्रों वर्षों तक उसने कठोर तप किया, उसकी तपस्या से प्रसन्न हो ब्रह्माजी ने उसे 'अजेय' होने का वरदान दिया. वरदान प्राप्त करके उसने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया, लोकपालों को मार भगा दिया और स्वत: सम्पूर्ण लोकों का अधिपति हो गया.
देवता निरूपाय हो गए थे वह असुर को किसी प्रकार वे पराजित नहीं कर सकते थे अहंकार से युक्त वह प्रजा पर अत्याचार करने लगा. इसी दौरान हिरण्यकशिपु कि पत्नी कयाधु ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम प्रह्लाद रखा गया एक राक्षस कुल में जन्म लेने पर भी प्रह्लाद में राक्षसों जैसे कोई भी दुर्गुण मौजूद नहीं थे तथा वह भगवान नारायण का भक्त था तथा अपने पिता के अत्याचारों का विरोध करता था.
भगवान-भक्ति से प्रह्लाद का मन हटाने और उसमें अपने जैसे दुर्गुण भरने के लिए हिरण्यकशिपु ने बहुत प्रयास किए, नीति-अनीति सभी का प्रयोग किया किंतु प्रह्लाद अपने मार्ग से विचलित न हुआ तब उसने प्रह्लाद को मारने के षड्यंत्र रचे मगर वह सभी में असफल रहा. भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद हर संकट से उबर आता और बच जाता था.
इस बातों से क्षुब्ध हिरण्यकशिपु ने उसे अपनी बहन होलिका की गोद में बैठाकर जिन्दा ही जलाने का प्रयास किया. होलिका को वरदान था कि अग्नि उसे नहीं जला सकती परंतु जब प्रल्हाद को होलिका की गोद में बिठा कर अग्नि में डाला गया तो उसमें होलिका तो जलकर राख हो गई किंतु प्रह्लाद का बाल भी बांका नहीं हुआ.
इस घटना को देखकर हिरण्यकशिपु क्रोध से भर गया उसकी प्रजा भी अब भगवान विष्णु को पूजने लगी, तब एक दिन हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद से पूछा कि बता, तेरा भगवान कहाँ है? इस पर प्रह्लाद ने विनम्र भाव से कहा कि प्रभु तो सर्वत्र हैं, हर जगह व्याप्त हैं. क्रोधित हिरण्यकशिपु ने कहा कि 'क्या तेरा भगवान इस स्तम्भ (खंभे) में भी है? प्रह्लाद ने हाँ, में उत्तर दिया.
यह सुनकर क्रोधांध हिरण्यकशिपु ने खंभे पर प्रहार कर दिया तभी खंभे को चीरकर श्री नृसिंह भगवान प्रकट हो गए और हिरण्यकशिपु को पकड़कर अपनी जाँघों पर रखकर उसकी छाती को नखों से फाड़ डाला और उसका वध कर दिया. श्री नृसिंह ने प्रह्लाद की भक्ति से प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया कि आज के दिन जो भी मेरा व्रत करेगा वह समस्त सुखों का भागी होगा एवं पापों से मुक्त होकर परमधाम को प्राप्त होगा अत: इस कारण से दिन को नृसिंह जयंती-उत्सव के रूप में मनाया जाता है

 इस मंत्र का- नैवेद्यं शर्करां चापि भक्ष्यभोज्यसमन्वितम्। ददामि ते रमाकांत सर्वपापक्षयं कुरु।।

साथ ही
नरसिंह गायत्री मंत्र का जाप करें
मंत्र-
ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्ण दंष्ट्राय धीमहि |
तन्नो नरसिंह प्रचोदयात ||

नृसिंह जयंती के अनुष्ठान क्या हैं?

भक्त सूर्योदय से पहले पवित्र स्नान करते हैं और साफ पोशाक पहनते हैं।

नरसिम्हा जयंती के दिन, भक्त देवी लक्ष्मी और भगवान नरसिम्हा की मूर्तियों को रखकर विशेष पूजा का आयोजन करते हैं।

या तो भगवान विष्णु के मंदिरों में या पूजा स्थल पर जहां मूर्तियां रखी जाती हैं, भक्त पूजा अर्चना करते हैं और देवताओं को नारियल, मिठाई, फल, केसर, फूल और कुमकुम चढ़ाते हैं।

भक्त नृसिंह जयंती का व्रत रखते हैं जो सूर्योदय के समय शुरू होता है और अगले दिन के सूर्योदय पर समाप्त होता है।

भक्त अपने व्रत के दौरान किसी भी प्रकार के अनाज का सेवन करने से परहेज करते हैं।

देवता को प्रसन्न करने के लिए भक्त पवित्र मंत्रों का पाठ करते हैं

दान करना और जरूरतमंदों को तिल, कपड़े, भोजन और कीमती धातुओं का दानपुण्य करना शुभ माना जाता है।

भगवान नृसिंह को प्रसन्न करने हेतु निम्न मन्त्र का जाप करे’

ऊॅ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्।।

 अर्थात- हे क्रुद्ध एवं शूर-वीर महाविष्णु, तुम्हारी ज्वाला एवं ताप चतुर्दिक फैली हुई है। हे नरसिंहदेव, तुम्हारा चेहरा सर्वव्यापी है, तुम मृत्यु के भी यम हो और मैं तुम्हारे समक्ष आत्मसमर्पण करता हूं।

दिव्य रक्षा कवच

ॐ नमो महा नरसिंहाय-सिंहाय सिंह-मुखाय विकटाय वज्रदन्त-नखाय माम् रक्ष-रक्ष मम शरीरं नख-शिखा पर्यन्तं रक्ष रक्षां कुरु-कुरु मदीय शरीरं वज्रांगम कुरु-कुरु पर-यंत्र, पर-मंत्र, पर-तंत्राणां क्षिणु-क्षिणु खड्गादि-धनु-बाण-अग्नि-भुशंडी आदि शस्त्राणां इंद्र-वज्रादि ब्रह्मस्त्राणां स्तम्भय-स्तम्भय,जलाग्नि-मध्ये रक्ष गृह-मध्ये ग्राम-मध्ये नगर-मध्ये नगर-मध्ये वन-मध्ये रण-मध्ये श्मशान-मध्ये रक्ष-रक्ष,राज-द्वारे राज-सभा मध्ये रक्ष रक्षां कुरु-कुरु, भूत-प्रेत-पिशाच -देव-दानव-यक्ष-किन्नर-राक्षस, ब्रह्म-राक्षस, डाकिनी-शाकिनी-मौन्जियादि अविधं प्रेतानां भस्मं कुरु-कुरु भो:अत्र्यम- गिरोसिंही-सिंहमुखी ज्वलज्ज्वाला जिव्हे कराल-वदने मां रक्ष-रक्ष, मम शरीरं वज्रमय कुरु-कुरु दश-दिशां बंध-बंध वज्र-कोटं कुरु-कुरु आत्म-चक्रं भ्रमावर्त सर्वत्रं रक्ष रक्ष सर्वभयं नाशय-नाशय व्याघ्र -सर्प-वराह-चौरदिन बन्धय-बन्धय, पिशाच-श्वान दूतान्कीलय-कीलय हुम् हुम् फट।।


श्रीलक्ष्मी नृसिंह सर्वसिद्धिकर ऋणमोचन स्तोत्र

देवत कार्य सिध्यर्थ सभास्तम्भ-समद्र भवम्।
श्री नृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ।।1।।
लक्ष्म्यार्लिंंलत वार्मांं, भक्तानां वरदायकं।
श्री नृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ।।2।।
अन्त्रमालाधरं शंš, चक्राब्जाऽऽयुध धारिणम्।
श्री नृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ।।3।।
स्मरणात् सर्व पापध्नं कद्रूज विष नाशनम्।
श्री नृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ।।4।।
सिंहनादेन महता, दिग्दन्तिभय नाशनम्।
श्री नृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ।।5।।
प्रल्हाद वरदं श्रीषं, दैत्येश्वर-विदारणम्।
श्री नृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ।।6।।
क्रूर ग्रहैः पीड़िताना भक्तानाम भय प्रदम्।
श्री नृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ।।6।।
वेदवेदांत यज्ञेषं, बह्म-रूद्रादि-वंदितम्।
श्री नृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ।।7।।
व्याधी दुखं परिहारं, समूल शत्रु निखंदनम्।
श्री नृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ।।8।।
विद्या विजय दायकं, पुत्र पोत्रादि वर्धनम्।
श्री नृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ।।9।।
भुक्ति मुक्ति प्रदायकं, सर्व सिद्धिकर नृणां।
श्री नृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ।।11।।
उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तम् सर्वतोमुखं।
नृसिंह भीषण भद्रं मृत्यु-मृत्युं नमाम्यहम्।।
यः इदं पठते नित्यं ऋण माचन संज्ञितम्।
अरुणि जायते सद्यो, धनं शीघ्रम् वाप्नुयात्।।

यह स्त्रोत्र अत्यंत चमत्कारी है ब्रह्म मुहूर्त में जो साधक लक्ष्मीनरसिंह के सम्मुख बैठकर इसका पाठ करता है कितने भी जन्मों का कर्ज हो बहुत अचल लक्ष्मी को प्राप्त करता है

भगवान नरसिंह की कृपा पाने के लिए ये करे उपाय ओर देखे अद्भुत बदलाव

धन के लिए या बचत के लिए भगवान नृसिंह को नागकेसर चढ़ाया जाता है। नागकेसर चढ़ाकर थोड़ा सा अपने साथ घर लेकर आएं और उसे घर की तिजोरी या उस अलमारी में रख दें, जहां आप पैसे और गहने आदि रखते हैं।

अगर कालसर्प दोष है कुंडली में और आप इसका पूजन या कोई ज्योतिषीय उपाय नहीं कर पा रहे हैं तो नृसिंह जयंती को किसी नृसिंह मंदिर में जाकर एक मोरपंख चढ़ा दें। इससे आपको राहत मिलेगी।

किसी कानूनी उलझन में फंसे है और कोर्ट-कचहरी में चक्कर लगाते हुए थक गए हैं तो नृसिंह चतुर्दशी पर भगवान को दही का प्रसाद चढ़ाएं।

प्रतिस्पर्धा से परेशान हैं या अनजान दुश्मनों का डर हमेशा बना रहता है तो भगवान नृसिंह को बर्फ मिला पानी चढ़ाएं। आपको हर तरफ से सफलता मिलने लगेगी।

अगर कोई आपसे नाराज है या दूर हो गया है तो उससे रिश्ते को फिर वैसे ही बनाने के लिए मक्की का आटा मंदिर में दान कर दें।

अगर आप कर्ज में डूब रहे हों या आपका पैसा मार्केट में फंस गया है, उधारी वसूल नहीं हो रही है तो नृसिंह भगवान को चांदी या मोती चढ़ाएं।

अगर शरीर में लंबे समय से कोई बीमारी है, राहत नहीं मिल पा रही है, तो भगवान नृसिंह को चंदन का लेप चढ़ाएं।

रविशराय गौड़
ज्योतिर्विद
अध्यात्मचिन्तक
9926910965

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