आत्मिक शांति के लिए तरसती सैंकड़ों दिवंगत आत्माएं , लोगों की धार्मिक परम्पराओं पर भारी कुठाराघात

अस्थि विसर्जन की अनुमति दें जल्द शासन-प्रशासन : लोगों की मांग 
धनेष विद्यार्थी, रेवाड़ी।
जिला रेवाड़ी में लाॅक डाउन के दिनों में जिन सैंकड़ों लोगों का देहावसान हुआ, उनकी आत्मा अभी अपनी सांसरिक यात्रा से हिन्दू धर्म की परम्परा अनुसार मुक्त नहीं हो पाई है। लोगों का मत है कि हिन्दू धर्म की परम्पराओं के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति की अस्थि विसर्जन की एक रस्म हरिद्वार या गढ़गंगा में अथवा देश के विभिन्न राज्यों में गंगा या किसी अन्य नदी में पूर्ण श्रद्धा भाव से दिवंगत के परिजनों की ओर से निभाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अस्थि विसर्जन के बाद ही किसी मानव देह को आत्मिक शांति मिल पाती है। उधर कमोवेश सारे हरियाणा में लगभग यह स्थिति बताई गई है। 
रेवाड़ी शहर में आधा दर्जन से अधिक शमशान घाटों में इन दिनों उन दिवंगत लोगों की अस्थियां टंगी हुई हैं, जिनको कई माह बीत जाने के बाद किसी नदी के पवित्र जल में प्रवाहित होने का इंतजार है। रेवाड़ी शहर में भी सैंकड़ों लोगों का देहावसान लोक डाउन के दौरान हुआ। उन सबकी अंतिम क्रिया भी दिवंगत के परिजनों ने पूरे रीति रिवाज के अनुसार की मगर कोरोना वायरस की वजह से लागू सरकारी नियमों की अनुपालना में अपने दिवंगत परिजन की अस्थि विसर्जन के लिए लोगों के प्रशासनिक अनुमति लेना जरूरी है। शासन और प्रशासन के पास ऐसे परिजनों ने अपने पूर्वज की आत्मिक शांति के लिए अस्थि विसर्जन की रस्म हरिद्वार या गढ गंगा में करने की गुहार भी लगाई मगर उनको सरकारी तौर पर ऐसी अनुमति नहीं मिल पाई। ऐसी स्थिति में दिवंगत के परिजनों की हिन्दू धर्म के मुताबिक धार्मिक परम्पराओं का निर्वाह नहीं हो रहा, वहीं अपने पूर्वजों की आत्मिक शांति के लिए अस्थि विसर्जन नहीं कर पाने का मानसिक बोझ भी दिवंगत के परिजन झेल रहे हैं। बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार और उतराखंड सरकार की ओर से अस्थि विसर्जन की सशर्त अनुमति दी हुई है मगर हरियाणा सरकार की ओर से ऐसे लोगों को अपने पूर्वजों की अस्थि विसर्जन की अनुमति नहीं दिए जाने से लोगों में नाराजगी महसूस की जा रही है। 
इस विषय पर प्रबुद्धजन डीके भारद्वाज, अनुराग जोशी, दिलबाग राय गांधी, गौरीशंकर गुप्ता, मदनलाल गेरा, अजय जैन, आरके जैन, अजय शर्मा एडवोकेट, शौकीन शर्मा एडवोकेट, मधुसूदन शर्मा एडवोकेट, अजीत शर्मा आदि ने कहा कि हरियाणा सरकार को ऐसे दिवंगत लोगों की आत्मिक शांति के लिए उनके परिजनों को अस्थि विसर्जन की अनुमति देनी चाहिए क्योंकि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सरकार अपनी ओर से सशर्त अनुमति दे चुकी हैं। इन सब लोगों की मांग है कि जिला प्रशासन इस विषय में उसके पास भेजे गए आग्रह पत्रों के आधार पर संबंधित लोगों को अपने पूर्वजों की आत्मिक शांति के लिए अस्थि विसर्जन की रस्म अदा करने की अनुमति दिए जाने संबंधी अनुमति पत्र जारी करे ताकि लोगों की धार्मिक परम्पराओं का निर्वाह हो सके तथा भारतीय संविधान के अनुसार उनकी धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा हो सके। 
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