ड्यूटी के बाद भी फर्ज निभा रही है भीमा गाँव की बेटी संतोष बांट रही है पेंशन व खाद्य सामग्री

पेंशनधारियों की मददगार बनी संतोष बुगालिया, ड्यूटी के बाद भी फर्ज निभा रही है, बांट रही है पेंशन व खाद्य सामग्री 

प्रदीप सैनी, दांतारामगढ़
सीकर/ दांतारामगढ़ - वैश्विक महामारी कोराना के कारण पूरे देशभर में लाॅकडाउन हैं। पेंशनधारी लोगों का सब कुछ पेंशन के रुपयों-पैसों से ही चलता हैं। ऐसे में इन पेंशनधारियों की मददगार बनी है भीमा ग्राम के झाबरमल की बेटी संतोष बुगालिया, जो पिछले ढा़ई साल से भारतीय स्टेट बैंक शाखा लोसल में कार्यरत हैं। संतोष बैंक बंद होने के बाद हर एक दिन छोड़कर बुजुर्ग महिलाओं को देर रात तक घर–घर जाकर पेंशन वितरण कर रही हैं। लाॅकडाउन के चलते बुजुर्ग महिलाओं को घर बैठे पेंशन मिलने पर पेंशनधारी महिलाएं संतोष को आशीर्वाद देते हुए कहती है कि भगवान ऐसी बेटी सभी को दे। संतोष राजस्थान में सबसे ज्यादा मासिक समयावधि एसबीआई व भारत सरकार के सभी सामाजिक प्रोग्राम व योजनाओ में विशेष सहयोग करती हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना 12 रुपये वार्षिक प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना 330 वार्षिक अटल पेंशन योजनाओं में अधिक से अधिक लोगों को जोड़कर भारत सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाती हैं। कोरोना महामारी के दौरान संतोष बैंक से लेन-देन के लिए लोगों की बहुत मदद कर रही है, साथ ही अपने यूट्यूब चैनल टच इंडिया के माध्यम से सरकारी योजना व बैंक संबंधित जानकारी गावों तक पहुंचाती हैं। संतोष बुगालिया सबसे ज्यादा बैंक ग्राहकों को उत्कृष्ट सेवा प्रदान करने के लिये जानी जाती हैं। सामाजिक कार्यों, बैंक की सुविधाओं को आमजनों तक पहुंचाने व ग्राहकों के प्रति संतुष्टपूर्ण व्यवहार के लिये एसबीआई कई बार संतोष को सम्मानित कर चुका हैं। टीम मानवता मिशन में मुख्य भूमिका निभाते हुए संतोष व इनके पति अजीत बुगालिया निवासी जाना टीम के सहयोग से लाॅकडाउन में अब तक जरूरतमंद लोगों को 1600 से ज्यादा खाद्य सामग्री के किट वितरण कर चुके है एवं टीम वर्तमान में भी दांतारामगढ़ क्षेत्र में जरूरतमंदों की मदद कर रही हैं। लाॅकडाउन से पहले भी संतोष ने कई मिशन को भी अंजाम तक पहुंचाया हैं। संतोष का कहना है कि काबिल लोग सरकार के सभी नियमों का पालन करते हुए अपने-अपने गांव के सभी गरीब व असहाय लोगों का विशेष ध्यान रखते हुए उनके मददगार बने। मानव सेवा के लिए समय मिलता नही हैं समय निकालना पड़ता है।

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