कोरोना आपदाकाल में अध्यात्म चिंतन ही नकारात्मक विचारों से बचा सकता है:आनन्दवल्लभ महाराज

भगवत रसिक रसिक की बातें रसिक बिना कोई समझ सकै न।

वृन्दावन:टीम अजेयभारत:
श्रीस्वामी हरिदास जी महाराज की रसोपासना से जीव परम् माधुर्य स्वरूप ठाकुर श्रीबाँकेबिहारीजी महाराज को सहज प्राप्त कर सकता है। स्वामीजी की रसमय उपासना पद्धति को समझने के लिये रसिकचार्यों की वाणी का आश्रय लेना परम् आवश्यक है क्यों कि भगवत रसिक रसिक की बातें रसिक बिना कोउ समझु सकै न।

उक्त उद्गार श्रीबाँकेबिहारीजी के सेवायत एवं सुविख्यात कथा प्रवक्ता गोस्वामी आनन्दवल्लभ महाराज ने  बाँकेबिहारी लीलामृतम कथा सुनाते हुए व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि कोरोना आपदाकाल में अध्यात्म चिंतन ही नकारात्मक विचारों  से बचा सकता है।  इस समय में हमें अधिक से अधिक भगवत चिंतन के द्वारा सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करनी चाहिये।

लॉकडाउन की इस अवधि में आनन्दवल्लभजी ने सोशल मीडिया पर ऑनलाइन होकर लोगों से स्वास्थ सम्बन्धी नियमों का कड़ाई से पालन करने की प्रेरणा भी दी।

श्रीगोस्वामी द्वारा बिहारीजी के निर्मल चरित्रों की कथा यूट्यूब और फेसबुक पर प्रतिदिन ऑनलाइन होकर लाइव सुनाई जा रही है। इस कथा का विश्व के अनेक देशों में बिहारीजी के प्रेमी भक्त लाभ उठा रहे हैं।

 श्रीबांकेबिहारी लीलामृतम कथा प्रतिदिन सायं तीन से पाँच बजे तक सोशल मीडिया पर लाइव चल रही है।
उल्लेखनीय है कि कथा का प्रसारण बगैर किसी भीड़भाड़ के बन्द स्टूडियो से किया जारहा है।

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