सेक्टर 56 थाने में ASI ने की बदसलूकी और दी अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता को अंदर करने की धमकी

सेक्टर 56 थाने में सहायक उप निरीक्षक ने अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता से की बदसलूकी।
वकील के लिए प्रयोग किये अपशब्द और अंदर करने की दी धमकी।
सहायक उप निरीक्षक पर रेवाड़ी थाने में पहले से ही संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज है।

गुरुग्राम :सेक्टर 56 थाने में एक पुलिसकर्मी द्वारा एक अधिवक्ता व प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता के साथ अभद्रता करने का मामला प्रकाश में आया है और उक्त अधिवक्ता ने सहायक उप निरीक्षक नरेश कुमार के खिलाफ पुलिस आयुक्त को शिकायत दी है। ज्ञात हो कि 14 जून को बी ब्लॉक सेक्टर 57 में कोई बाहरी व्यक्ति स्थानीय निवासियों व सुरक्षा के लिए गेट पर तैनात गार्ड को 2 दिनों से परेशान कर रहा था  और रविवार सुबह करीब 11 बजे भी आकर गेट को लेकर झगड़ा कर रहा था।  कहासुनी के बाद सामाजिक कार्यकर्ता को बीच बचाव के लिए बुलाया गया था जिन्होंने मुद्दे को आपस में सुलझाने की कोशिश की लेकिन विवाद को बढ़ता देख और हिंसा से बचने के लिए पुलिस को कॉल किया गया। लेकिन आरोप है कि पुलिस ड्यूटी पर आए ए एस आई नरेश कुमार ने पीड़ित पक्ष की कुछ ना सुनी और व्यवधान डालने वाले के साथ मिलकर गेट को हटाने का फैसला सुना दिया जोकि रेसीडेंट्स ने अपने जेब से चंदा देकर बनवा रखे हैं। पीड़ित पक्ष जब इस बाबत शाम में शिकायत देने थाने गए तो नरेश कुमार ने बजाय दूसरे पक्ष को बुलाने या समझाने के पीड़ित पक्ष के 5 लोगों को थाने में बिठा लिया और अभद्रता करते हुए उन्हीं के खिलाफ पर्चा दर्ज करने की धमकी देने लग गए।

इसी बीच जब सामाजिक संगठन के संयोजक मनीष शांडिल्य आये और कहा कि आप पीड़ित पक्ष के खिलाफ ही कार्यवाही कर रहे हैं और इन्हें बिठा रखा है ये तो गलत है जिसपर ड्यूटी पर तैनात सहायक उप निरीक्षक उनके साथ अभद्रता करते हुए कह ने लगे कि "अभी आने दे दूसरी पार्टी को तेरे खिलाफ भी उससे शिकायत लेकर तुझे भी अंदर करूँगा, मुझे पता है कि तू वकील है और तेरे जैसे वकील घने डोलते रहते हैं जिन्हें मैं टांगों के नीचे से निकालता हूँ"

जिसपर उन्होंने उच्च अधिकारियों को अवगत कराने की कोशिश की लेकिन पुलिस उपायुक्त की वयस्तता की वजह से उनके रीडर श्यामसुंदर को मामले से अवगत करायाI लेकिन नरेश ने पुनः धमकी दी कि "आज तू डी सी पी क्या डी जी पी या गृहमंत्री से भी शिकायत कर ले ,तुझे आज सबक सिखाऊंगा"। पीड़ित पक्ष नरेश कुमार से काफी डर गए थे और वे अपनी शिकायत वापस लेकर जाना चाहते थे लेकिन आरोप है कि नरेश ने सबको वहीं रोक लिया और आरोपी को बार बार फोन कर बुलाने लगे और कहते रहे कि जल्दी आकर इनके खिलाफ शिकायत दे ताकि इन्हें अंदर करूँ।

बहुत देर बाद दूसरे पक्ष ने आकर कहा कि  मुझे कोई शिकायत नहीं देनी और नाही मैं कभी उनके ब्लॉक में आकर परेशान करूँगा पर नरेश उसपर पीड़ित पक्ष के खिलाफ शिकायत देने पर दबाब बनाता रहा। अंत में मामला बढ़ता देख बार के वरिष्ठ सदस्यों के आने के बाद नरेश कुमार ने पीड़ित पक्ष को छोड़ा। ज्ञात रहे कि नरेश कुमार मुकदमा संख्या 10 दिनांक  08.01.20 में बतौर जांच अधिकारी हैं जब मनीष शांडिल्य और पीड़ित निवासी जनवरी, फरवरी माह में थानाध्यक्ष से इसकी जांच प्रगति बारे मिले थे और सीसीटीवी फुटेज खंगालने बाबत कहा था तब उन्होंने नरेश कुमार को बुलाकर सवाल जबाब किया था जिसपर जाते वक्त थाने के गेट पर नरेश कुमार ने मनीष शांडिल्य से नाखुशी जाहिर की थी और पीड़ित से कहा था कि एस एच ओ से मिलने से कुछ नहीं होता, मेरे से मिला करो, जो करना होता है वो I.O. करता है। इस केस में कुछ नही होगा मैं इसको अनट्रेस में फ़ाइल बंद करूँगा अगर कुछ करवाना है तो मेरे से अकेले में मिलना लेकिन एस एच ओ से मिलोगे तो कुछ नहीं होगा। इसके बाद मनीष को कहा कि मेरे जांच के मुकदमे में मेरे पास भेजा करो मुद्दई को नहीं तो आगे से कभी मेरी बारी आएगी तो आपके लिए ठीक नही होगा।

ज्ञात हो कि सहायक उप निरीक्षक नरेश कुमार पर रेवाड़ी थाने में भी पहले ही एक संगीन जुर्म का गम्भीर धाराओं का मुकदमा दर्ज है जिसमें वो आरोपी हैं।

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