पाकिस्तानी कहने का हक सिर्फ भाजपा को ही है किसी PTI को नहीं : माईकल सैनी

पाकिस्तानी कहने का हक सिर्फ भाजपा को ही है किसी PTI को नहीं : माईकल सैनी

गुरुग्राम: टीम अजेयभारत: माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार बर्खास्त किए गए PTI  टीचरों द्वारा किए गए विरोधप्रदर्शन के दौरान मुख्मंत्री मनोहर लाल ख्ट्टर को पाकिस्तान भेज देने की कही गई बात से बिफरे भाजपाई नेता जवाहर यादव व अन्य नेताओं ने आरोप लगाते हुए कहा  कि PTI टीचर दीपेंद्र हुड्डा की भाषा बोल रहे हैं ।

माना दीपेंद्र हुड्डा ने पूर्व में दिए बयानों में कहा था कि मुख्यमंत्री जी जहां से आए हैं वहीं भेज देंगे और भी बयान दिए हम उनकी विवेचना नहीं करने की कह कर हैं हम तो महज भाजपा के नेतृत्व से पूछना चाहते हैं कि गद्दार , कम्यूनिस्ट , चमचा , चापलूस , दलाल ,और पाकिस्तानी कहने का हक क्या उसी को है ।

यह तो शुरुआत खुद करके बुरा मानने वाली बात हुई जब्कि वास्तविकता यह है कि जब किसी  भी दल के नेता अथवा व्यक्ति ने विरोध किया सरकार का तो उसे इन्हीं उपाधियों से नवाजा गया भाजपाईयों द्वारा - तब लोकतांत्रिक परम्पराओं को ठेस नहीं पहुंचती थी क्या ?

PTI टीचर अपनी नौकरी छिन जाने से आहत हैं सरकार यदि चाहती तो अध्यादेश लाकर उनकी नौकरियां बहाल करने की बात कह उन्हें आश्वस्त कर सकती थी फिर देखते कि कोन ऐसी भाषा बोलता ।

बेरोजगारी दर लोकडाउन से पूर्व ही बढ़कर 8 फ़ीसदी हो गई थी जो अब महामारी से भी भयानक रूप लेते हुए 20 प्रतिशत हो गई है देश में ।

काम धंधे रोजगार सब समाप्त कर दिए सरकार ने , कारखाने बंद पड़े हैं , मिलों पर ताले लटके हुए हैं , कम्पनिों में श्रमिक नहीं , बाजार में ग्राहक नहीं , मजदूरों का उत्पीड़न सभी ने देखा है ।

बिजली बिलों में कोई छुट नहीं , टैक्स थोड़े अंतराल बाद आखिरकार भरना ही है , सरकारी हस्पतालों में सुविधाएं नहीं प्राइवेट हॉस्पिटल्स में रहम नहीं , महंगे इलाज़ के बावजूद जमाखोर कालाकारोबारियों का आतंक  और भ्रष्ट अधिकारियों की लूट के बावजूद प्राइवेट स्कूलों के आगे नतमस्तक सरकार अभिभावक लाचार और उसके बाद नौकरी छिन जाना किसे उत्तेजित नहीं कर देगा ऐसे हालात में ।

तरविंदर सैनी ( माईकल ) भाजपा की सरकार उसके मुखिया व नेताओं को भरोसा दिलाता है कि जिस पीड़ित ने आवेश में आकर यह बात कही है वह दीपेंद्र हुड्डा की भाषा नहीं माईकल सैनी की भाषा में जो आपको लोकतांत्रिक भी लगेगी उसमें क्षमा मांगेंगे , मगर सरकार कुछ करने के विषय में निर्णय लेने की स्तिथि में तो आए , अपनी मंशा तो जाहिर करे ।

गर यदि सरकार का यही उदासीन रवैया रहा तो ना जाने कितनी बड़ी संख्या में लोग मुखर होंगे और फिर शायद पूरा प्रदेश ही मुखर होकर वहीं कहे जो आपको अच्छा नहीं लगता है  फिर वह किसी की भी भाषा बोलने को मजबूर होंगे और स्वतंत्र भी ।

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