सोमवती अमावस्या श्रावण सोमवार को,संयोग 47 साल बाद बन रहा है। करे उपाय ओर पाये अतिविशेष लाभ

सोमवती अमावस्या श्रावण सोमवार को
 संयोग 47 साल बाद बन रहा है। करे उपाय ओर पाये अतिविशेष लाभ

सोमवती अमावस्या तिथि मुहूर्त-

अमावस्या तिथि प्रारम्भ - 20 जुलाई 2020 को 12:10AM से
अमावस्या तिथि समाप्त - 20 जुलाई 2020 को 11:02PM तक

रविशराय गौड़
ज्योतिर्विद
अध्यात्मचिन्तक
*9926910965*


देवाधिदेव आशुतोष भगवान शिव को समर्पित सावन मास का हर सोमवार बहुत खास होता है लेकिन इस बार सावन का तीसरा सोमवार ज्यादा फलदायी है क्योंकि 20 साल बाद सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है। इसे हरियाली अमावस्या भी कहते हैं। इससे पहले 31 जुलाई 2000 में ऐसा संयोग बना था।

ज्योतिष शास्त्रानुसार सोमवार को चन्द्र, बुध, गुरु, शुक्र और शनि ग्रह भी अपनी राशि में रहेंगे। इस दिन भगवान शिव की पूजन फलदायी रहेगा। महिलाओं को तुलसी की 108 बार परिक्रमा करनी चाहिये।


अमावस्या तिथि के बारे में यह धारणा प्रचलित  है कि यह अशुभ दिन है। इस दिन शुभ कार्य नहीं करने चाहिए, अन्यथा अनिष्ट हो सकता है। वास्तव में अमावस्या अशुभ नहीं बल्कि पुण्य का दिन है। माह में यह एक दिन भक्ति, दान, पुण्य और परोपकार के लिए अतिशुभ है। इस दिन किए गए इन कार्यों का शीघ्र फल मिलता है।

यह दिन पितृ देवों को भी समर्पित है। इस दिन उन्हें स्मरण करते हुए किए गए पुण्य के कार्य पितृ देवों की कृपा प्राप्ति में सहायक होते हैं। भारतीय संस्कृति में सदियों से ऐसी परंपराएं चली आ रही हैं जिनका संबंध अमावस्या से है। साथ ही वे परोपकार से भी जुड़ी हैं। जानिए अमावस्या के दिन करने योग्य ऐसे ही कुछ आसान लेकिन शुभ फल देने वाले काम।


बन रहा विशेष संयोग

 इस बार सावन माह में कई विशेष संयोग बन रहे हैं। सावन की शुरुआत सोमवार से हुई थी और सोमवार के दिन ही ये महीना खत्म भी होगा। श्रावण पूर्णिमा और अमावस्या भी सोमवार के दिन ही पड़ रही है। ऐसा संयोग 47 साल बाद बन रहा है।

पूजन विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ हो जाएं। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। पितरों के निमित्त तर्पण करें। इस दिन कई जगह उपवास भी रखा जाता है। जरूरतमंद लोगों को दान-दक्षिणा दें। पीपल के वृक्ष की पूजा करें। हो सके तो इस दिन पीपल, बरगद, केला, नींबू या तुलसी के पेड़ का वृक्षारोपण जरूर करें। हरियाली अमावस्या के दिन नदी या तालाब में जाकर मछली को आटे की गोलियां खिलाने की भी परंपरा है। इस तिथि को तर्पण, स्नान, दान आदि के लिये बहुत ही पुण्य फलदायी माना जाता है।

सोमवती अमावस्या के दिन सूर्य देव नारायण की पूजा से जातक को गरीबी तथा दरिद्र्ता से छुटकारा मिलता है। साथ ही इस दिन 108 बार तुलसी माता का ध्यान करते हुए 108 बार परिक्रमा करनी चाहिए।
इस मंत्र के जाप से पुण्य प्राप्ति के साथ-साथ भगवान का आशीर्वाद प्राप्तो होता है-

॥ अयोध्या, मथुरा, माया, काशी कांचीअवन्तिकापुरी, द्वारवती ज्ञेयाः सप्तैता मोक्ष दायिका॥
॥ गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती, नर्मदा सिंधु कावेरी जलेस्मिनेसंनिधि कुरू॥


कालसर्प दोष जिनकी कुंडली मे है यह विशेष उपाय अवश्य करे

कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए थोड़े सफेद फूल, बताशे, चावल, कच्चा दूध लेकर बहते हुए पानी में इसे प्रवाहित कर दें और ‘ऊँ नमः शिवाय’ मंत्र का 11 बार जाप करें। दूसरा उपाय, पवित्र नदी में स्नान करने के बाद चांदी के नाग-नागिन लेकर उनकी पूजा करें। फिर उनपर सफेद फूल चढ़ाएं और बहते हुए पानी में इसे प्रवाहित कर दें। मान्यता है कि ऐसा करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिल जाती है। तीसरा उपाय, इस दिन स्नान के बाद लघु रूद्र का पाठ करें। कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए नवनाग स्त्रोत का पाठ करना भी शुभ फलदायी माना गया है। अमावस्या के दिन कालसर्प यंत्र की स्थापना कर रोजाना इस यंत्र के सामने घी या सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

पित्र दोष उपाय

सोमवती अमावस्या को स्नान दान अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व होता है। पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए अमावस्या के दिन श्राद्ध की रस्मों को करना उपयुक्त माना जाता है। पितृ दोष से मुक्ति के लिए अमावस्या पर चावल की खीर बनाकर गाय के गोबर से बने कंडे या उपले की कोर पर उस खीर का भोग लगाएं। भोग लगाने के बाद दाएं तरफ थोड़ा-सा पानी लेकर छोड़ दें। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं। अगर खीर का भोग नहीं लगा सकते, तो सुबह घर में जो भी शुद्ध ताजा खाना बनाएं उसी से भोग लगा दें। इसके साथ ही थोड़ी सी चीनी भी रख दें। ध्यान रखें कि सबसे पहला भोजन गाय को दूसरा कुत्ते को और तीसरा भोजन कौए को अवश्य देना चाहिए। ऐसा करने से भी पितरों की कृपा बनी रहेगी।
पितरों को प्रसन्न करने के लिए एक लोटे में जल, लाल पुष्प, गुड़ और काले तिल डालकर सूर्य को जल अर्पित करें और पितरों से प्रार्थना करें कि आपको पितृ दोष से मुक्ति मिल जाए। अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे घी का दीपक जलाएं। ऐसा करने से भी पितृ दोष से मुक्ति मिलने की मान्यता है।



सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व है। इस दिन गंगा स्नान और दान आदि करने का विधान है। सोमवार का दिन भगवान शिव का माना जाता है, इस दिन की अमावस्या का विशेष महत्व होता है। इस दिन विवाहित स्त्री अपने पति की लम्बी आयु के लिए व्रत रखती हैं साथ ही इस दिन पितृ दोष व काल सर्प दोष के निवारण के लिए पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन किए उपाय किए जाएं तो आपके सारे बिगड़े काम बन सकते हैं

शिव पूजा के साथ ,सावन सोमवती अमावस्या पर करे विशेष उपाय जो बदल देंगे आपकी किस्मत

हर अमावस्या को घर के कोने कोने को अच्छी तरह से साफ करें, सभी प्रकार का कबाड़ निकाल कर बेच दें। इस दिन सुबह शाम घर के मंदिर और तुलसी पर दिया अवश्य ही जलाएं इससे घर से कलह और दरिद्रता दूर रहती है।
2 अमावस्या पर तुलसी के पत्ते या बिल्व पत्र बिलकुल भी नहीं तोडऩा चाहिए। अमावस्या पर देवी-देवताओं को तुलसी के पत्ते और शिवलिंग पर बिल्व पत्र चढ़ाने के लिए उन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।

3 धन लाभ के लिए अमावस्या के दिन पीली त्रिकोण आकृति की पताका विष्णु मन्दिर में ऊँचाई वाले स्थान पर इस प्रकार लगाएँ कि वह लगातार लहराती रहे, तो आपका भाग्य शीघ्र ही चमक उठेगा। लगातार स्थाई लाभ हेतु यह ध्यान रहे की झंडा वहाँ लगा रहना चाहिए। उसे आप समय समय पर स्वयं बदल भी सकते है।
4 हर अमावस्या को गहरे गड्ढे या कुएं में एक चम्मच दूध डालें इससे कार्यों में बाधाओं का निवारण होता है । इसके अतिरिक्त अमावस्या को आजीवन जौ दूध में धोकर बहाएं, आपका भाग्य सदैव आपका साथ देगा ।
5 अमावस्या के दिन शनि देव पर कड़वा तेल, काले उड़द, काले तिल, लोहा, काला कपड़ा और नीला पुष्प चढ़ाकर शनि का पौराणिक मंत्र "ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छायामार्तण्डसंभुतं नमामि शनैश्चरम।" की एक माला का जाप करने से शनि का प्रकोप शांत होता है , एवं अन्य ग्रहों के अशुभ प्रभावों से भी छुटकारा मिलता है । हर अमावस्या को पीपल के पेड़ के नीचे कड़वे तेल का दिया जलाने से भी पितृ और देवता प्रसन्न होते हैं।

6 प्रत्येक अमावस्या को गाय को पांच फल भी नियमपूर्वक खिलाने चाहिए, इससे भी घर में शुभता एवं हर्ष का वातावरण बना रहता है ।
7 अमावस्या के दिन किसी सरोवर पर गेहूं के आटे की गोलियां ले जाकर मछलियों को डालें। इस उपाय से पितरों के साथ ही देवी-देवताओं की कृपा भी प्राप्त होती है, धन सम्बन्धी सभी समस्याओं का निराकरण होता है।
8 अमावस्या के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्यकर्मों से निवृत्त होकर पवित्र होकर जो व्यक्ति रोगी है उसके कपड़े से धागा निकालकर रूई के साथ मिलाकर उसकी बत्ती बनाएं। फिर एक मिट्टी का दीपक लेंकर उसमें घी भरकर, रूई और धागे की बत्ती लगाकर यह दीपक हनुमानजी के मंदिर में जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें। इस उपाय से रोगी की तबियत जल्दी ही सुधरने लगती । यह उपाय उसके बाद कम से कम 7 मंगलवार और शनिवार को भी नियमित रूप से करना चाहिए।
9 अमावस्या के दिन एक कागजी नींबू लेंकर शाम के समय उसके चार टुकड़े करके किसी भी चौराहे पर चुपचाप चारों दिशाओं में फेंक दें। इस उपाय से जल्दी ही बेरोजगारी की समस्या दूर हो जाती है।
10 अमावस्या की रात्रि में 8 बादाम और 8 काजल की डिबिया काले कपडे में बांध कर सिंदूर में रखे, इससे शीघ्र ही आर्थिक समस्याओं का समाधान होता है ।
11 अमावस्या के दिन क्रोध, हिंसा, अनैतिक कार्य, माँस, मदिरा का सेवन एवं स्त्री से शारीरिक सम्बन्ध, मैथुन कार्य आदि का निषेध बताया गया है, जीवन में स्थाई सफलता हेतु इस दिन इन सभी कार्यों से दूर रहना चाहिए ।
12 अमावस्या पर पितरों की तृप्ति के लिए विशेष पूजन करना चाहिए। यदि आपके पितृ देवता प्रसन्न होंगे तभी आपको अन्य देवी-देवताओं की कृपा भी प्राप्त हो सकती है। पितरों की कृपा के बिना कठिन परिश्रम के बाद भी जीवन में अस्थिरता रहती है, मेहनत के उचित फल प्राप्त नहीं होती है ।
13 हर अमावस के दिन एक ब्राह्मण को भोजन अवश्य ही कराएं। इससे आपके पितर सदैव प्रसन्न रहेंगे, आपके कार्यों में अड़चने नहीं आएँगी, घर में धन की कोई भी कमी नहीं रहेंगी और आपका घर - परिवार को टोने-टोटको के अशुभ प्रभाव से भी बचा रहेगा।
14 पितृ दोष निवारण के लिये यदि कोई व्यक्ति अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ पर जल में दूध , गंगाजल, काले तिल, चीनी, चावल मिलाकर सींचते हुए पुष्प, जनेऊ अर्पित करते हुये “ऊँ नमो भगवते वासुदेवाएं नमः" मंत्र का जाप करते हुये 7 बार परिक्रमा करे तत्पश्चात् ॐ पितृभ्यः नमः मंत्र का जप करते हुए अपने अपराधों एवं त्रुटियों के लिये क्षमा मांगे तो पितृ दोष से उत्पन्न समस्त समस्याओं का निवारण हो जाता है। और अगर सोमवती अमावस्या हो तो पीपल की 108 बार परिक्रमा करने से विशेष लाभ मिलता है ।
15 हर अमावस्या पर पितरों का तर्पण अवश्य ही करना चाहिए । तर्पण करते समय एक पीतल के बर्तन में जल में गंगाजल , कच्चा दूध, तिल, जौ, तुलसी के पत्ते, दूब, शहद और सफेद फूल आदि डाल कर पितरों का तर्पण करना चाहिए। तर्पण, में तिल और कुशा सहित जल हाथ में लेकर दक्षिण दिशा की तरफ मुँह करके तीन बार तपरान्तयामि, तपरान्तयामि, तपरान्तयामि कहकर पितृ तीर्थ यानी अंगूठे की ओर जलांजलि देते हुए जल को धरती में किसी बर्तन में छोड़ने से पितरों को तृप्ति मिलती है। ध्यान रहे तर्पण का जल तर्पण के बाद किसी वृक्ष की जड़ में चड़ा देना चाहिए वह जल इधर उधर बहाना नहीं चाहिए।
16 शास्त्रो के अनुसार प्रत्येक अमावस्या को पित्तर अपने घर पर आते है अतः इस दिन हर व्यक्ति को यथाशक्ति उनके नाम से दान करना चाहिए। इस दिन बबूल के पेड़ पर संध्या के समय पितरों के निमित्त भोजन रखने से भी पित्तर प्रसन्न होते है।
17 पितरों को खीर बहुत पसंद होती है इसलिए प्रत्येक माह की अमावस्या को खीर बनाकर ब्राह्मण को भोजन के साथ खिलाने पर महान पुण्य की प्राप्ति होती है, जीवन से अस्थिरताएँ दूर होती है। इस दिन संध्या के समय पितरों के निमित थोड़ी खीर पीपल के नीचे भी रखनी चाहिए ।
18 अमावस्या के दिन काले कुत्ते को कड़वा तेल लगाकर रोटी खिलाएं। इससे ना केवल दुश्मन शांत होते है वरन आकस्मिक विपदाओं से भी रक्षा होती है ।
19 अमावस्या के दिन अपने घर के दरवाजे के ऊपर काले घोड़े की नाल को स्थापित करें। ध्यान रहे कि उसका मुंह ऊपर की ओर खुला रखें। लेकिन दुकान या अपने आफिस के द्वार पर लगाना हो तो उसका खुला मुंह नीचे की ओर रखें। इससे नज़र नहीं लगती है और घर में स्थाई सुख समृद्धि का निवास होता है ।
20 अमावस्या की तिथि को कोई भी नया कार्य, यात्रा, क्रय-विक्रय तथा समस्त शुभ कर्मों को निषेध कहा गया है, इसलिए इस दिन इन कार्यों को नहीं करना चाहिए ।


रात्रि में किये जाने वाले विशेष उपाय

अमावस्या की रात कर लें ये तांत्रिक उपाय- धर्म शास्त्रों में गाय माता को देवी कामधेनु की संज्ञा दी गई है और हिन्दू धर्म में तैतीस कोटि देवी देवताओं का निवास स्थान मानकर पूजा की जाती है। अगर आप चाहते हैं कि आपके घर में धन और अन्न की कभी भी कमी न हो तो  अमावस्या तिथि के दिन अपने घर में बनी पहली रोटी घर की सबसे छोटी कन्या के हाथों से गाय को खिलावें। ऐसा करने से उपायकर्ता के घर में माँ लक्ष्मी हमेशा निवास करने लगती है और घर परिवार की दरिद्रता हमेशा के लिए दूर हो जाती है।
कष्टों से मिलेगी मुक्ति, अमावस्या के दिन पीपल के नीचे कर लें ये उपाय
- शुक्रवार अमावस्या के दिन इनकों करें दान- शुक्रवार अमावस्या के दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार गरीबों और असहाय लोगों की सेवा सहायता करें, उनको भोजन करावें। ऐसा करने से भौतिक सुख साधनों की प्राप्ती होती है।


अमावस्या को देवता भी आते हैं धरती पर, जानें क्यों है ये सोमवती अमावस्या सबसे खास

भगवान विष्‍णु की पूजा करें- माता लक्ष्‍मी भगवान श्री विष्‍णु की आर्धांगिनी हैं। इस दिन माँ लक्ष्‍मी के साथ भगवान विष्‍णु की पूजा अर्चना करने से उनकी कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।  अमावस्या के दिन मध्य रात्रि में दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर भगवान विष्णु का अभिषेक करने से स्वयं लक्ष्मीनारायण घर में निवास करने लगते हैं।

विशेष आग्रह
कोरोना संकट देखते हुए अजय भारत पाठकों को सलाह है कि रविशराय गौड़ जी ने जो उपाय बताए हैं आपके इलाके में मंदिर खुले हों तो वहां फेसमास्क लगाकर जाएं और सामाजिक दूरी का पालन पालन करें। अपने पास हैंड सैनिटाइजर रखें और किसी भी सतह को छूने से परहेज करें। मंदिर में भीड़भाड़ का माहौल हो तो घर में पूजा करें। या चाहें तो दिन के अलग समय जल्दी सुबह या दोपहर बाद मंदिर जाएं जिस वक्त भीड़ न हो। साथ ही जिन इलाकों में कंटेनमेंट जोन है या मंदिरों को बंद रखा गया है वहां बाहर निकलन से बचें।

शिव पूजा पाठ मंत्र जप स्तोत्र पाठ के साथ यह स्तोत्र अवश्य पाठ करे अनंत जन्म की दरिद्रता दूर होगी

दारिद्र्य दुख दहन स्तोत्र


विश्वेश्वराय नरकार्णवतारणाय कर्णामृताय
शशिशेखराय धारणाय कर्पूरकांति धवलाय जटाधराय
दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय...।1।

गौरी प्रियाय रजनीश कलाधराय कालान्तकाय
भुजंगाधिप कंकणाय गंगाधराय गजराज विमर्दनाय
दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय...।2।

भक्ति प्रियाय भवरोग भयापहाय
उग्राय दुर्गमभवसागर तारणाय
ज्योतिर्मयाय गुणनाम सुनृत्यकाय
दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय...।3।

चर्माम्बराय शवभस्म विलेपनाय
भालेक्षणाय मणिकुंडल मण्डिताय
मंजीर पादयुगलाय जटाधराय
दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय....।4।

पंचाननाय फणिराज विभूषणाय
हेमांशुकाय भुवनत्रय मण्डिताय
अनन्त भूमि वरदाय तमोमयाय
दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय...।5।

भानुप्रियाय भवसागर तारणाय
कालान्तकाय कमलासन पूजिताय
नेत्रत्रयाय शुभलक्षण लक्षिताय
दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय...।6।

रामप्रियाय रघुनाथ वर प्रदाय
नागप्रियाय नरकार्णवतारणाय
पुण्येषु पुण्यभरिताय सुरार्चिताय
दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय...।7।

मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय
गति प्रियाय वृषभेश्वर वाहनाय
मातंग चर्मवसनाय महेश्वराय
दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय...।8।

शिवार्पण मस्तु

सर्वे भवंतु सुखिनः

रविशराय गौड़
ज्योतिर्विद
अध्यात्मचिन्तक
9926910965

Post a Comment

0 Comments