शिक्षा के विनास की उत्तरदायी सरकार : माईकल सैनी


विद्यार्थियों तथा देश के उज्ज्वल भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है , शिक्षण व्यवस्था को मानों ग्रहण लग गया है तथा किसी भी सरकार की रुचि नहीं रही कि ईस शिक्षण प्रणाली में सुधार लाने की दिशा में -  बल्कि विषयों में सरकार के हस्तक्षेपों से वांछित शिक्षा से भी विद्यार्थियों को महरूम रखा जा रहा है जिसकारण लोगों को मजबूरन प्राइवेट स्कूलों का रुख कर अपनी जेबें ढीली करनी पड़ रही हैं तथा उनकी दमनकारी मनमानियां झेलनें को मजबूर होना पड़ रहा है महज इंग्लिश मीडियम होने की वजह से जब्कि वास्तविकता में प्राइवेट स्कूलों के अध्यापकों से बेहतर शिक्षक सरकारी स्कूलों में मौजूद हैं मगर सरकार की निरंतर दखलंदाजी के चलते अव्यवस्थाएं चरम पर हैं ।

सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के ऊपर ही सारी जिम्मेदारीयाँ तय कर दी गई हैं उनके विषयों को भी नहीं समझा गया है मगर शिक्षकों ने अपना योगदान हर क्षेत्र में फिर भी दिया है ।महामारी काल में शिक्षकों के संक्रमित होने का खतरा है जिससे बच्चों में भी वायरस के फैलने का अत्यधिक डर है मगर वह अपनी कर्त्तव्य परायणता से विमुख हुए बगैर बेहतर तरीके से सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से सावधानियां बरतते हुए शिक्षापद्धति में भी सुधारों के साथ अपने अनुभवों को बांटना चाहते हैं ।

शिक्षक पलायन नहीं कर रहे हैं अपने दायित्वों से चाहें संसाधन सीमित ही क्यों न हों - उनकी संख्या बेहद कम ही क्यों न हो ।

अब आप इसी विषय को देखें कि हरियाणा में स्कूली स्तर पर अध्यापकों के 24% पद खाली हैं। कुल स्वीकृत 1,27,794 पदों में से 31,232 पद ख़ाली हैं और 12,144 पदों पर गेस्ट टीचर्स से काम चलाया जा रहा है। हाई स्कूल में हेडमास्टर के 1143 पद स्वीकृत हैं पर उनमें से 831 पद खाली हैं। ऐसे ही सीनियर सैकंडरी स्कूल में प्रिंसिपल के कुल स्वीकृत 2,189 पदों में से 803 खाली पड़े हैं। मैथ टीचर्स के कुल स्वीकृत 4,977 पदों में से 2064 पद यानी लगभग आधे खाली हैं। ऐसे ही इंग्लिश टीजर्स के कुल स्वीकृत 5,705 पदों में से 1,288 पद खाली हैं। जेबीटी अध्यापकों के 5,647 पद खाली पड़े हैं।

बकौल तरविंदर सैनी ( माईकल ) एक तरफ सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की भयंकर कमी है दूसरी तरफ़ शिक्षकों की जरूरी भर्तियां भी नहीं हो रही हैं और रहे सहे स्टाफ को भी ज्यादातर समय गैर अध्यापन कार्यों में लगाना पड़ रहा है  जैसे क्लेरिकल, जनसंख्या गिनती, इलेक्शन ड्यूटी इत्यादि , और अभी कोरोना वॉरियर्स भी , तो आप ही तय कर बताएँ कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था की बर्बादी का ज़िम्मेदार कौन है ?
स्मर्ण रहे शिक्षक और मार्ग अपने यथा स्थान पर ही स्थिर रहते हैं मगर लोगों को उनके लक्ष्यों तक पहुंचा देते हैं ।
आवश्यक माँग है कि शिक्षकों की भर्तियों को पूरा किया जाए ताकि उनका भार कम हो , वह केवल अध्यापन के कार्यों को ही कर सकें  तथा विभिन्न कार्यो के लिए अन्य विभागों की सहायताओं को लिया जाए । और एक बात की स्कूलों में साफ सफ़ाई कराकर जरूरी एहतियातों के साथ शीघ्र  शुरू किए जाएं शोशल डिस्टनसिंग के अनुपात अनुसार , जिससे विद्यार्थियों के मनोभावों में कोई अंतर न आए - शिक्षा के प्रति उनकी रुचि बनी रहे  और देश के लिए उसके उज्ज्वल भविष्य का निर्माण हो ।।

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