भारत चीन वर्तमान संघर्ष - विपक्ष की भूमिका

भारत चीन वर्तमान संघर्ष - विपक्ष की भूमिका

प्रधानमंत्री कल लेह में भारतीय सेना के जवानों का उत्साह बढ़ाने पहुंचे थे, पूरा राष्ट्र जवानों के शौर्य पर गर्व कर रहा है ऐसे में देश के प्रमुख विपक्षी दल  का बेसिर पैर का सवाल नैतिकता से परे जान पड़ता है। उनके प्रवक्ताओं और नेताओं की वक्तव्य शैली और शब्दावली से सेना के शौर्य पर प्रश्नचिन्ह लगता है। जब बात राष्ट्र के शत्रु  से लड़ने की  हो तो विपक्ष हो या पक्ष, जात, सम्प्रदाय, धर्म, विचारधारा इन सबसे ऊपर उठकर सबको एक हो जाना चाहिए. लेकिन राष्ट्र के विपक्षी दल के नेता सवालों में प्रासंगिकता भूल जाते हैं। क्या सवाल पूछना सिर्फ पूछने के लिए किए जाने चाहिए ? प्रश्न पूछने और उत्तर की मांग के पीछे एक नैतिक और राष्ट्रहित का उद्द्येश्य होना चाहिए।

विपक्षी दल के प्रवक्ताओं का टीवी पर खुली बहस में कहना कि हमें सेना पर विश्वास है, सेना के शौर्य पर विश्वास है लेकिन जब  पीएम कहते हैं कि चीन न तो सीमा में घुसा न ही वह वहां कब्जा करके बैठा है तो हमारे जवान शहीद कैसे हुए और राष्ट्र का प्रधानमंत्री चीन का नाम क्यों नही लेता ? अब पीएम लेह में पहुंच कर कह रहे हैं कि विस्तारवादी ताकतों को मुंहतोड़ जवाब दिया जायेगा, वे किसके बारे में कह रहे हैं.. 
टीवी चैनलों पर इस तरह के तथ्यहीन और दिकभ्रमित सवाल करना कहाँ तक उचित है और ऐसे संवेदनशील समय में जबकि शत्रु सेना सीमा पर हो दुस्साहस के लिए खडी हो और हमारे वीर योद्धा उस दुस्साहस का दंड देने सीमा पर डटे हों, तो इस प्रकार के प्रश्न ओछी राजनीति के अलावा और कुछ नहीं। ये विश्वास करना कठिन है कि विपक्षी नेताओं के विद्वान प्रवक्ताओं को इतिहास या भारत चीन सीमा के वास्तविक विवाद का समुचित ज्ञान नहीं। तो इस कठिन समय में इतनी तुच्छ राजनीति क्यों ?

हमें समझना होगा गलवान की भौगोलिक स्थिति और उससे संबंधित समझौते को, कि दोनों देशों के बीच उस विवादित क्षेत्र की भूमि जिसपर दोनों देशों का दावा है और समझौते के अनुसार अंतिम निर्णय तक कोई उसपर कब्जा नहीं करेगा जिसपर चीनी सेना जबरदस्ती कब्जा करना चाहती थी और उसी झड़प में हमारे 20 जवान विपरीत परिस्थितियों में शहीद हुए लेकिन 45 से अधिक की ग़र्दनें तोड़कर। कितने शर्म की बात है कि जब देश के प्रधानमंत्री कह रहे हैं और हमारी सेना कह रही है कि गलवान में विवादित हिस्से से हमने चीन को खदेड़ दिया है तो इस पर विपक्षी दलों को भरोसा को क्यों नहीं है। ये कहना सरासर गलत है कि चीन भारत मे घुस आया और सेना कुछ नहीं कर पा रही है... ये लोग सेना के पराक्रम को नकार रहे हैं. हमारे बीस जवानों की शहादत हुई और चीन के लगभग 49 फौजीयों को हमारे वीर जवानों ने मौत के घाट उतार दिया। रही बात प्रधानमंत्री द्वारा चीन के नाम लेने की तो 12000 फुट की ऊंचाई से लेह में पीएम ने कहा है कि विस्तारवादी ताकतो का युग चला गया, यह संबोधन निश्चित ही यूरोपीय देशों के लिए नहीं था। भारतीय सेना का जोश और उत्साह चरम पर है और दुनिया समझ चुकी है कि नए भारत की चीन और उसकी विस्तारवाद नीति को खुली चेतावनी है।

- अधिवक्ता मनीष शांडिल्य , संस्थापक - भारत फर्स्ट ! सलाहकार संपादक - अजेयभारत.कॉम

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