वामन से विराट की ओर यात्रा ही श्रीवामन चरित्र का मूल सन्देश है:आनन्दवल्लभ गोस्वामीजी

भगवान श्रीवामन का अवतार समाज हित एवं राष्ट्रसेवा के लिये हुआ।

ब्राह्मण सेवा संघ द्वारा वामन जयन्ती महोत्सव का आयोजन

वृन्दावन। ब्राह्मण सदैव समाज का मार्गदर्शक एवं हितचिन्तक रहा है। भगवान श्रीवामनदेव का अवतार भी समाजहित एवं राष्ट्रसेवा के लिए ही हुआ था। आज भी वामन चरित्र की प्रासंगिकता उतनी ही है, जितनी पूर्वकाल में थी।
उक्त विचार ब्राह्मण सेवा संघ के तत्वावधान में आयोजित वामन जयन्ती महोत्सव में डॉ मनोज मोहन शास्त्री जी ने अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किये।

ब्राह्मण सेवा संघ के अध्यक्ष आचार्य आनन्दवल्लभ गोस्वामीजी ने कहा कि समाज सेवा में तत्पर व्यक्ति को विशाल व्यक्तित्वशाली होने पर भी अपने को लघुरूप में ही प्रस्तुत करना चाहिये। वामन से विराट की ओर यात्रा ही श्रीवामन चरित्र का मूल सन्देश है।

मुख्य अतिथि के रूप में ब्रज विकास ट्रस्ट के अधिष्ठाता आचार्य श्रीरमाकांत गोस्वामी जी ने कहा कि आज पुनः एकबार ब्राह्मण समाज को एकता के सूत्र में बंधकर बौद्धिक शक्ति के द्वारा ब्राह्मणों के सर्वांगीण विकास एवं राष्ट्र सेवा में समर्पित होना चाहिये।

आचार्य प. श्रीमृदुलकान्त शास्त्री जी ने कहा कि ब्राह्मण सदैव से समाज का पथ प्रदर्शक रहा है, सम्पूर्ण समाज को जोड़े रखने का दायित्व ब्राह्मण समाज का है। भगवान श्री वामन की जयन्ती हमें लेने के साथ समाज को देना भी सिखाती है।

स्थानीय श्रीकालियमर्दन कृपा निकुञ्ज पर आयोजित श्रीवामन जन्मोत्सव समारोह में वैदिक विधि विधान के साथ भगवान श्रीवामन के चित्रपट का पूजन अर्चन किया गया। वक्ताओं ने भगवान वामन के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए विप्र समाज की एकता एवं राष्ट्रहित विषयक संगोष्ठी में अपने विचार रखे।

इस अवसर पर प. श्रीचंद्रलाल शर्मा जी, प. श्रीसत्यभान शर्माजी, प. श्रीसुरेशचंद्र शास्त्रीजी, श्रीमहेशभारद्वाज जी, श्रीहरि सुरेशाचार्यजी, श्रीअमित भारद्वाज जी, श्रीमृदुलकान्त शास्त्री जी, श्रीसंजीवकृष्ण ठाकुरजी, श्रीनागेंद्र दत्त गौड़ जी, ब्रह्मचारी श्रीविमल चैतन्यजी, महन्त श्रीप्रियाशरणजी, श्रीजगदीश नीलम जी, श्रीरविशंकर बबेले जी, श्रीउदयन शर्मा जी, श्रीराजेश किशोर गोस्वामी जी, श्रीविपिन बापू जी, श्रीअशोक व्यास जी, श्रीब्रजेन्द्र भाई कौशिक जी, श्रीअशोक अज्ञ जी, आचार्य श्रीशिवांश भाई जी, श्रीराजनारायण द्विवेदीजी, आचार्य श्रीऋषिकुमार जी, श्रीकरुणेशजी महाराज, श्रीजगदीश शास्त्रीजी, महन्त जानकीशरण जी, श्रीराजेन्द्रशुक्ला जी, श्रीब्रजेश शर्मा जी, श्रीसन्तोष चतुर्वेदीजी, श्रीगणेश दत्त शर्मा जी, श्रीअश्विनी मिश्र जी, श्रीपवन शर्मा जी, श्रीतपेश पाठक जी, श्रीनीरज गौड़ जी, श्रीविनीत द्विवेदीजी, श्रीगोपाल शरण सारस्वत जी, श्रीसतपाल शर्मा जी, श्रीसर्वेश तिवारी जी, श्रीसत्यम शास्त्री जी, श्रीविनय पाठकजी, श्रीभारत भूषण जी, श्रीअच्युत कृष्ण पाराशर जी, श्रीसत्यम शास्त्री जी आदि उपस्थित रहे।
संचालन एवं स्वागत श्रीसतीश चन्द्र पाराशर जी ने किया।


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