अन्नदाता बने आत्मनिर्भर: फसल किसान की, भाव किसान का, कहां बेचूँ यह भी किसान की मर्जी: रमन मलिक

अन्नदाता बने आत्मनिर्भर: फसल किसान की, भाव किसान का, कहां बेचूँ यह भी किसान की मर्जी: रमन मलिक

 मोदी ने बनाया किसान को स्वतंत्र 74 स्वतंत्रता दिवस पर।: रमन मलिक


गुरुग्राम।

भारत कृषि प्रधान देश है किसान और किसानी भारत की आत्मा में बसते हैं। भूतपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने एक नारा दिया था, जय जवान जय किसान और किसान ने अपने खून से धरती को सींच जरूरत के समय देश का पेट भरा था। जब अटल ने नारा दिया जय जवान जय किसान जय विज्ञान।  तब देश के किसान ने अपनी खेती की पद्धति में विज्ञान का प्रयोग करना शुरू किया। आज इस देश में एक नई क्रांति का उदय हुआ। युगांतर से यही पूछा जा रहा है कि अन्नदाता गरीब क्यों है?  इस विषय पर कृषि विज्ञान पर अपने आप में एक संस्थान माने जाने वाले डॉक्टर स्वामीनाथन ने एक रिपोर्ट बनाई थी। इस रिपोर्ट को लागू करने के लिए विभिन्न किसान नेताओं ने और समाजसेवियों ने अपनी आवाज समय-समय पर प्रखर की है। यह बात सोमवार को भाजपा प्रदेश प्रवक्ता रमन मलिक ने कही। उन्होंने कहा कि यह आयोग नवंबर 2004 में बना और अक्टूबर 2006 में इसने अपनी संपूर्ण रिपोर्ट तत्कालीन सरकार को सौंप दी, जिसके बाद केंद्र सरकार द्वारा गठित एक कमेटी जिसके अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा होते थे, उसका कार्य डॉक्टर एमएस स्वामीनाथन के द्वारा दी गई सलाह को कार्यान्वित करना था, जो वह 2014 तक नहीं कर पाए।

मलिक ने कहा कि उन्हें यह बात कहने में कोई गुरेज नहीं कि डॉक्टर स्वामीनाथन की कही गई सभी व्यवहारिक सुझावों को मान लिया गया है या कार्यान्वित कर दिया गया है। आज तक भारत के किसानों के लिए अपने आप को नेता बताने वाले बहुत से लोग आए और चले गए और अपने अपने हिसाब से किसानों की बेहतरी के लिए कुछ ने वादे करें कुछ ने काम करा। लेकिन अगर भारत के इतिहास को खंगाला जाएगा तो यह साफ हो जाएगा कि वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा किसान हितेषी नेता दूसरा नहीं हुआ। जिस प्रकार से किसान के लिए किसानी एक फायदे का सौदा बनाना उनके लिए एक वचनबद्धता थी जिसे उन्हें ने पूर्ण करा। उसी तरह किसान की संपूर्ण आजादी भी एक वचन था जो प्रधानमंत्री ने खुद से करा था। केंद्र सरकार ने गत कुछ समय में खेती-बाड़ी और किसान से संबंधित कुछ अध्यादेश कैबिनेट की मीटिंग में पारित करे। मुझे आशा है की यह सदन में भी संपूर्ण बहुमत से पारित कर दिए जाएंगे।

इसमें पहला है एच एच ए एम बी अधिनियम में संशोधन(2020) इसके अंतर्गत,

निजी मंडियों की स्थापना,

किसानों के लिए थोक मंडियों की स्थापना, 

किसानों के लिए खुदरा मंडी की स्थापना, साइलो व गोदाम की मंडियों के रूप में घोषणा, 

निजी ई-ट्रेडिंग प्लेटफार्म की स्थापना, बोर्ड द्वारा या एस टीवी के माध्यम से विशेष बाजार यार्ड की स्थापना शामिल हैं।

यह ऐसे विषय हैं जिसके ना होने से किसानों का अहित चलता आ रहा था, प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों की मूलभूत परेशानियों और कठिनाइयों को जानते हुए यह बदलाव प्रस्तावित किए हैं।


किसान अपनी उपज, अपने भाव पर, अपने मन से, अपने आप बेच पाएगा।  यानी जब एक उद्योगपति अपने द्वारा निर्मित किसी वस्तु का भाव खुद तय कर सकता है तो किसान को भी यह आजादी मिलनी चाहिए कि वह अपनी उपज का भाव अपने हिसाब से खुले बाजार में बेच सकें या तो मंडी में एमएसपी पर।

 पहले किसान अगर अपनी निर्धारित मंडी से बाहर अपनी उपज को बेचना चाहता तो उसको जगह जगह पर प्रताड़ित करा  जाता था, दंडित करा जाता था। नए प्रावधानों से ऐसा करना संभव नहीं होगा। जिससे किसान को संपूर्ण आजादी होगी कि वह अपनी उपज अपने मनपसंद की जगह पर बेचे। किसान की सुरक्षा देखते हुए इसमें यह भी प्रावधान कर आ गया है कि वह बारी 3 कार्य दिवस  के भीतर किसान का भुगतान कर दे।

इसमें यह भी प्रावधान कर आ गया है कि विवाद की स्थिति में एसडीएम के फैसले के खिलाफ अपील जिला कलेक्टर के पास व इलेक्ट्रॉनिक मंच की अपील संयुक्त सचिव भारत सरकार के पास किसान ले जा सके।  इससे किसान को अपने कष्ट निवारण के लिए मदद मिलेगी।

मंडियों के बाहर किसानों से सीधा खरीद के लिए व्यापारियों को कोई लाइसेंस लेने या किसी भी बाजार फुल एच आर डी एस या कमीशन का भुगतान करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी जिसके स्वरूप कामकाज में आसानी मिलेगी। अगर किसान अंत उपभोक्ताओं से सीधा जोड़कर बेहतर मूल्य की प्राप्ति औसतन आय 45% तक बढ़ सकती है।  अनुबंधित किसानी करने वाला किसान स्वतंत्र किसान की तुलना में औसतन 25% अधिक आय अर्जित कर सकता है।

 मौसम और बाजार की जानकारी से आए में 15 से 25% की वृद्धि हो सकती है। वही अनुबंधित खेती में दो प्रमुख प्रकार रहेंगे  एक तो जहां किसान अपने आप  अपनी लागत से व्यापारी के लिए किसानी करेगा इसमें उसे इस उपज के वितरण के समय इसका मूल्य मिलेगा। वहीं जहां इस उपज का प्रायोजक उत्पादन का जोखिम उठाएगा किसानों को उनकी सेवाओं के लिए भुगतान करेगाा इसमें किसान को अपनी जमीन और मेहनत का पैसा मिलता है। इसमें अगर शक वस्तु अधिनियम 1955 में  स्टॉक सीमा  को संशोधित करा है ताकि यह अधिनियम किसान और उपभोक्ता या प्रायोजक के करार के मध्य में ना आए।

 माल इकट्ठा करने वाला या कृषि सुविधा प्रदान करने वाला भी कृषि अनुबंध में पक्षधर बन सकेगा। कृषि समझौता या पंजीकरण इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्री के माध्यम से हो सकेगा।  कोई भी किसान को किसी भी अधिकार से कृषि समझौता होने की वजह से वंचित नहीं कर पाएगा।

 जिस तरह एक राष्ट्र के अंदर एक राशन कार्ड कर दिया उसी तरीके से पूरे देश में अनुबंध खेती का एक समान कानूनी ढांचा बन जाएगा कंपनियों को खेती के समझौतों में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना जिससे किसानों की आय बढ़े यह सरकार का प्रयास है। सरकार ने इस का भी ध्यान रखा है कि पहले कीमतें गिरने पर अनुबंध से कंपनियां पीछे हट जाती थी जो अब वह नहीं कर पाएंगे।

किसानों को सुरक्षित रखने के लिए किसानों की जमीन के बिक्री पट्टे या गिरवी रखने पर प्रतिबंध लगाते हुए भूमि के खिलाफ किसी भी ऋण वसूली से बचाव करने के लिए इसमें धारा 8 ए का प्रावधान कर आ गया है। वहीं अगर कोई प्रायोजक या व्यापारी किसान की जमीन में कोई स्थाई या अस्थाई व्यवस्था बनाता है जैसे कि छोटा को स्टोरेज या कोई और उपकरण और वह निर्धारित समय में उसको नहीं निकालता तो उसका स्वामित्व किसान का हो जाएगा। विवाद समाधान निवारण के लिए स्पष्ट समयसीमा को रखा गया है एसडीएम 30 दिन में व एसडीएम के निर्णय की अपील भी 30 दिन में निपटाए जाएगी।

 

आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम 2020

 

 इन संशोधनों में कृषि खाद्य पदार्थों का डी रेगुलेशन किया गया है जिससे अब अनाज खाद्य तेल तिलहन डालें प्याज और आलू के ऊपर स्टॉक रखने की पाबंदी खत्म हो जाएगी।  लेकिन सरकार ने यह भी ध्यान रखा है कि जिस समय राष्ट्रीय आपदा अकाल युद्ध असाधारण मूल्यवृद्धि जैसी बहुत सारी चीजें हो उस समय स्टॉक पर सीमाएं लागू कर दी जाएंगी।  अगर जब बागवानी उत्पादों में खुदरा मूल्य में 100% की वृद्धि हो जाए या ना खराब होने वाले उत्पादों के खुदरा मूल्य में 50% की वृद्धि हो जाए तब तक इनके भंडारण पर कोई सीमा नहीं होगी।

 हमारा प्रदेश कृषि प्रधान प्रदेश है और गत 6 सालों में मुझे यह कहने में हर्ष है कि हरियाणा में अगर हम मुआवजे की तुलना करें तो जितना मुहावरा विभिन्न परिस्थितियों में वर्तमान मनोहर लाल जी की सरकार ने गत 6 वर्षों में दिया है उतना मुआवजा हरियाणा के इतिहास में नहीं बांटा गया होगा।  मुख्यमंत्री खट्टर ने यह सुनिश्चित करें की हरियाणा का दक्षिणी छोर जो 30 साल से ऊपर नेहरो की टेल में सूखे को देखता रहता था आज वहां कृषि के लिए पानी की समस्या नहीं है। जहां तीन-चार दिन में कभी तीन-चार घंटे बिजली किसान को मिलती  थी और वह अपने खेतों को पानी देने के लिए डीजल के पंप पर निर्भर थे वही आज प्रदेश के अंदर खेती के लिए बिजली पर्याप्त मात्रा मेंं उपलब्ध है।  किसी भी प्राकृतिक या प्राकृतिक घटना के कारण  अगर  किसानों का नुकसान हुआ तो भी सरकार ने उस पर उपयुक्त कदम उठाए और किसान की मदद के लिए छाती तान के खड़ी रही।

 जिस प्रकार कोरोना महामारी काल में इस सरकार ने किसान से उसकी उपज खरीदी है वह काबिले तारीफ है और सुरक्षा के पूरे मानक पालन कर बिना किसी तकलीफ के किसान का एक-एक दाना विभिन्न फसलों का खरीदा गया। 

 मलिक ने बोला अब किसान की मर्जी चलेगी अगर उनके भाव मिले तो खुले बाजार में बेचे और अगर उसका मन करे तो एमएसपी पर मंडी में परंपरागत तरीके से अपने ऊपर को बेच सकता है।   यानी कि चित भी उसकी पट भी उसकी।

मेरा यह स्पष्ट मानना है की इस 15 अगस्त जब देख अपना स्वतंत्रता दिवस मनाएगा तो किसान भी पूर्ण स्वतंत्र होकर अपने स्वामित्व के साथ अपने खेत पर अपना मन चलाएगा।

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