अनन्य रसिक सखी सम्प्रदाय के प्रवर्तक हैं श्रीस्वामी हरिदास:श्रीआनन्दवल्लभजी महाराज

अनन्य रसिक सखी सम्प्रदाय के प्रवर्तक हैं श्रीस्वामी हरिदास

-स्वामीहरिदास जी का मनाया पाटोत्सव
-शास्त्रीय गायन के लिए दयानारायण दीक्षित हुए सम्मानित।

 वृन्दावन। श्रीराधा स्वरूपा सखी ललिता के अवतार श्रीस्वामीहरिदास जी महाराज अनन्य रसिक सखी सम्प्रदाय के प्रवर्तक हैं। आपके द्वारा प्रदत्त रसोपासना के मार्ग पर चलकर जीव सहज रूप से निकुञ्ज रस का अधिकारी बन सकता है। उक्त उद्गार विश्व वैष्णव सेवा संघ के तत्वावधान में आयोजित स्वामीहरिदास पाटोत्सव में श्रीमदविष्णुस्वामिहरिदासीय सम्प्रदायाचार्य गोस्वामी श्रीआनन्दवल्लभजी महाराज ने व्यक्त किये।

डॉ श्रीरामकृपाल त्रिपाठी ने कहा कि श्रीवृन्दावन रस की खान है, यहाँ आकर बड़े बड़े ज्ञानी ध्यानी भी भगवान श्रीबिहारीजी महाराज के श्रीचरणों के प्रेमी बन जाते हैं। श्रीस्वामी हरिदास जी ने कलिकाल संतप्त जीवों के हृदय में रस संचार के लिये ही निधिवन निकुंज की प्रेम धरा से श्रीबाँकेबिहारीजी का प्राकट्य किया।
डॉ श्रीमनोजमोहन शास्त्री जी ने कहा कि स्वामी हरिदास जी महाराज ध्रुपद संगीत के आद्याचार्य हैं। आपका संगीत संसार के लिए नहीं अपितु संसार सृजेता को रिझाने के लिये था। यही कारण है कि प्रिय प्रियतम निधिवन निकुञ्ज में प्रकट होकर स्वामी जी के सम्मुख नृत्य करने लगते  थे।

श्रीहरिदास धाम में आयोजित इस दिव्य समारोह में विधि विधान के साथ स्वामीहरिदासजी के चित्रपट का पूजन अर्चन एवं केलिमाल के पदों का गायन किया गया। इस अवसर पर शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवा के लिये संगीताचार्य प. दयानारायण दीक्षित को उत्तरीय एवं स्मृति चिह्न प्रदान करके सम्मानित गया।

समारोह में ब्राह्मण सेवा संघ के संस्थापक प. श्रीचंद्रलाल शर्मा, प. श्रीसत्यभानशर्मा, शुकाचार्य पीठाधीश श्रीरमेशचंद्राचार्य, श्रीविमल चैतन्य ब्रह्मचारी, श्रीसतीशचंद्र पाराशर, श्रीजगदीश नीलम, श्रीसंजय शर्मा, श्रीतपेश पाठक, श्रीनीरज गौड़, श्रीजानकी शरण, श्रीजगदीश शास्त्री, श्रीसन्तोष चतुर्वेदी, श्री राजेन्द्र शुक्ला, श्रीनीलेश कुमार, श्रीअविनाश शर्मा, आदि उपस्थित थे।

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