किस आधार पर गब्बर मानें आपको मंत्री जी : माईकल सैनी



किस आधार पर गब्बर मानें आपको मंत्री जी  : माईकल सैनी

बयानवीर मंत्री जी स्वम् को गब्बर कह देने भर से गब्बर नहीं बना जा सकता है और ना ही अखबारों की सुर्खियों पर गब्बर लिखे जाने से गब्बर बना जा सकता है उसके लिए जमीनी स्तर पर बहुत कुछ करने की जरूरत पड़ती है  केवल राहुल गांधी को पप्पू कह देने के लिए ही तो गब्बर नहीं माना जा सकता है !

आपकी सरकार में ही शामिल मंत्री व नेताओं ने जमीन घोटालों को कई बार सरकार के सामने रखा है मगर कोई कार्यवाही नहीं , खनन माफिया , बालू माफिया धड़ल्ले से बेख़ौफ़ अपने कामों को अंजाम दे रहे हैं  उनपर अंकुश लगाने का भी कोई काम नहीं किया गया  !

रजिस्ट्री घोटाले की पोल खुली चुनौती के रूप में उभरकर आयी आपकी सरकार के समक्ष  वह भी महामारी कोविड-19 संक्रमण के कारण लगे लोकडाउन के समय , उसमें भी सिस्टम की खामियां बता व सिस्टम अपडेट करने तथा उसमें खामियों को वजह बता टरकाने का कार्य किया गया जब्कि एक अधिकारी ने तहसीलदार व नायब तहसीलदार के विरुद्ध एफआईआर तक दर्ज करा दी हों !

चर्चित शराब घोटाला भी कोरोनाकाल में हरियाणा प्रदेश की साख को बट्टा लगा रहा था और सरकार व स्वम् आपकी प्रतिष्ठा के लिए भी चुनोती बना हुआ है , बड़े मंत्रियों नेताओं का उसमें हाथ होना बताया जा रहा है अनेक वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता पाए जाने की संभावनाएं बन गई थी - जिसके लिए आपने स्वम् एसआईटी का गठन किया  मगर जैसा कि अंदेशा जताया जा रहा था कि यह जांच कमेटी किसी निर्णय पर नहीं पहुंचेगी ठीक वैसा ही हुआ भी और अतिरिक्त समय मांगा गया जिसे देने के विचार में नहीं थे आप मगर फिर भी समय दिया आपकी सरकार ने  तथा जांच अभी तक लंबित है क्योंकि आपके द्वारा गठित कमेटी किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई है !

सीआइडी आपके पास नहीं रहने दी गई आपके पुलिस विभाग में पुलिस अधिकारियों व कर्मियों के तबादले स्वम् मुख्यमंत्री कर रहे हैं जब्कि आप स्वेच्छा से तबादले करने में भी असमर्थ दिखाई दे रहे हैं  !

पुलिस कर्मियों पर आए-दिन हमले हो रहे हैं कोरोनाकाल में क़ई सारी हत्त्याएँ हो चुकी हैं , व्यापारियों से किसी भी समय बेख़ौफ़ बदमाश लूट की वारदातों को अंजाम देकर चले जाते हैं , अपराध के बढ़ते स्तर को रोक पाने में और लॉ एंड ऑर्डर की स्तिथियाँ संभाले नहीं संभल रही हैं - यौनशोषण और बाल अपराध भी बढ़े हैं तो किस वजह से समझें गब्बर !

हॉस्पिटल्स की हालात किसी से छिपी नहीं है , दवाएँ अल्पमात्रा, नाकाफी स्टाफ , उपकरणों का अभाव ,  गंदगी के माहौल में इलाज़ के नाम पर हेकड़ियाँ और  मरीजों को रेफर करने का सिलसिला , सरकारी एम्बुलेंस सारी फेल , निजी एम्बुलेंस वालों ने मरीजों को रखा है पेल , जारी है रुका नहीं है अभी भी चल रहा है यह खेल !

नगर निगम में लूट की खुली छूट पर अधिकारीयों की जांच हेतु भी आपने एसआईटी जांच बैठाने का आश्वासन दिया था  उसके विषय में भी कुछ नहीं हुआ - भृस्टाचार बदस्तूर चल रहा है , अनुशंसा जिनकी है उनपर  उन्हीं का हुक्म बजा रहे हैं , उनके आप तबादले तक नहीं करा पा रहे हैं , आपके सभी अधिकारों पर नियंत्रण रखा जा रहा हो , कोई भी बात आपकी दरकिनार कर दी जा रही हो , 

आप कहते हैं किसानों पर लाठीचार्ज नहीं हुआ मुख्यमंत्री जी कह रहे हैं कि आत्मरक्षा में हुआ लाठीचार्ज , सरकारी आदेश जारी नहीं थे तो पुलिस की लाठियां क्यों चली ,खट्टर साहब खुद जांचकर्ता बन स्पस्टीकरण दे रहे हैं जब्कि आपसे प्रश्न तक नहीं पूछे जा रहे हैं  और पूछें भी तो आपसे जवाब नहीं बन पा रहे हैं - तो ऐसे में कैसे मानें प्रदेशवासी आपको गब्बर ।

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