250 करोड़ रुपये की लागात से बने ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग में श्रद्धालु प्रशासन की उपेक्षा का शिकार

 250 करोड़ रुपये की लागात से बने ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग में श्रद्धालु प्रशासन की उपेक्षा का शिकार,

जगह जगह परिक्रमा मार्ग में अतिक्रमण होने से श्रद्धालु परेशान,

परिक्रमा मार्ग में धरती के यमराज बने झोलाछाप चिकित्सक श्रद्धालुओं से कूट रहे चांदी।



अजय विद्यार्थी 

 डीग अक्टूबर--- तत्कालीन भाजपा की वसुन्धरा सरकार की राजस्थान क्षेत्र के भरतपुर जिले में पड़ने वाली 82 किलोमीटर लम्बी महत्वाकांक्षी ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा निर्माण के लिए लगभग 250 करोड़ रुपये मंजूर कर ब्रज क्षेत्र के विकास की एक उम्मीद जगाई थी।

जिस पर प्रति वर्ष व अधिक मास में लाखों करोड़ों श्रद्धालु परिक्रमा कर अपने जीवन को धन्य मानते हुए देश विदेश से आकर इस पावन धरा ब्रज भूमि से निकलते है।

इस ब्रजरज को माथे से लगाकर विभिन्न तरह की मनोकामनाओं को उम्मीद के साथ अपने जीवन को सफल मानते हैं।

लेकिन आज वैश्विक महामारी कोविड 19 पर जीत मानते हुए  आस्था के वशीभूत श्रद्धालु ईश्वर से साक्षात्कार मानते हुए राधे राधे भजते हुए ब्रज भूमि की परिक्रमा कर रहे है।



वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व राज्य सरकार कोरोना से जंग लड़ने के लिए युद्ध स्तर पर विभिन्न बैठकों का आयोजन व कार्य योजना बनाकर उसे लागू करने के लिए प्रयासरत है और अधिकारी को निर्देशित भी  किया जा रहा है और 2 अक्टूबर से करोना से निबटने के लिए राज्य में चलाए जा रहे विशेष जागरूकता अभियान के तहत विभिन्न स्वयं सेवी संगठनों की तरफ से एक करोड़ मास्को के वितरण की योजना बना रहे हैं।

वही डीग में प्रशासन के अधिकारीयों ने राज्य सरकार की कोरोना से जंग लड़ने के आदेशों की अवहेलना व नजर अंदाज कर पुरुषोत्तम अधिक मास में ब्रज चौरासी कोस की यात्रा पर निकले देश भर के लाखों  परिक्रमार्थियों की सुरक्षा, सहायता व सुविधा उपलब्ध कराने से पूर्णतया हाथ खींच लिए है तथा आंखें बंद कर अपने कार्यालयों में लगे ए.सी. में बैठकर चैन की बंसी बजा रहे हैं I



यहां तक कि जब कोई नागरिक , इन अधिकारियों को सरकारी फोन पर बात करता है तो यह लोग सरकारी फोन भी नहीं उठाते हैं और गलती से उठा भी लेते हैं तो अपने आप को व्यस्त बता कर निचले स्तर के अधिकारियों को निर्देश का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं ।

वर्तमान में डीग से प्रतिदिन हजारों की संख्या मे परिक्रमार्थी डीग होकर निकल रहे हैं और रात्रि में विश्राम कर रहे हैं। 

लेकिन प्रशासन इनकी सुरक्षा सहायता व सुविधा के लिए प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग का कोई भी कर्मचारी अधिकारी नजर नहीं आ रहा परिणाम स्वरूप परिक्रमार्थियों को धरती के यमराजरूपी झोला छाप डॉक्टरों से इलाज के लिए सहयोग लेना पड़ रहा है।जिसके चलते यमराजरूपी चिकित्सक श्रद्धालुओं को लूटकर चांदी कूट रहे हैं।वहीं लगातार कोरोना के बढ़ रहे मामलो को रोकने के लिये अभी तक कोई दवाई या वैक्सीन नही बनी है तो कोरोना से जंग में अपनी और अपनों की सुरक्षा के लिए मास्क ही सबसे बडा हथियार है और कोरोना को मास्क  और सोशल डिस्टेसिंग का प्रयोग कर रोका जा सकता है।

लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोरोना जैसी महामारी के लिए कोई कारगर कदम कुम्भकर्णीय नींद सोए अधिकारियों ने नही उठाये हैं।



 हमारा मकसद लोगों की पारम्परिक आस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि उन जिम्मेदारों को सचेत करना है, जिन्हें सरकारी गाइडलाइन का उल्लंघन टूटता नहीं दिखाई दे रहा है।

अधिक मास में ब्रज चैरासी कोस परिक्रमा दे रहे परिक्रमार्थियों की अचानक बढी संख्या में कोरोना की सरकारी गाइडलाइन बिखरती नजर आ रही है।

परिक्रमार्थियों की सेवा के नाम पर ना सोशल डिस्टेंसिंग है, ना मुंह पर मास्क जगह-जगह पडाव के साथ परिक्रमार्थियों की सेवा-राहत के लिए भंडारे लगाए गए हैं।

किसी भी भंडारे के पास ना डस्टबिन है, ना सरकारी गाइडलाइन की पालना।जिला कलेक्टर के आदेशों के बाबजूद

प्रशासन जान कर भी अंजान बना हुआ है ।हजारों लाखों की सख्या मे परिक्रमार्थी उत्तरप्रदेश की सीमा से राजस्थान सीमा के भरतपुर जिले से निकल कर हरियाणा सीमा में जा रहे हैं ।

कही भी कोई प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य कैंप नहीं है।

व्रज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग जो कि सरकार द्वारा लगभग 250 सौ करोड़ की लागात ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा देने वाले परिक्रमार्थियों की सुविधा के लिए जो मार्ग बनाया गया था उस पर 

 ग्राम दिदावली मोड़ से लेकर खोह से आद्रिबद्री तक मार्ग कड़ब की पूरीया लगा कर रास्ता अवरुद्ध कर रखा है। जिसके कारण परिक्रमार्थियों को गर्मी के मौसम में बीच सड़क पर चलना पड़ रहा है स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी की चलते झोलाछाप डॉक्टरों ने डॉक्टरों ने सड़क पर ही दवाखाना खोल रखा है जहाँ श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है । 

जब इस सम्बंध में उपजिला कलेक्टर हेमंत कुमार से बात की गई उन्होंने बात अनसुनी कर कर फोन काट दिया वहीं तहसीलदार सीमा बघेल को जानकारी दी गई थी उन्होंने कहा की मै पत्रकारों से कोई बात करना नही चाहती  मैने  पत्रकारो की लिस्ट मंगाई है।


क्या है परिक्रमा का महत्व--

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हिंदु धर्म में परिक्रमा का विशेष महत्व है।ऐसी मान्यता है कि परिक्रमा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। हिंदुओं के प्रत्येक तीर्थ स्थल के आस-पास चौरासी और पंच कोस की परिक्रमा का आयोजन किया जाता है। एेसा प्रचलन है की  हर  तीर्थ क्षेत्र में इस आयोजन का अलग-अलग महत्व और परंपरा है।


कब होती है परिक्रमा--- 

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परिक्रमा का विशेष महत्व है। हिंदू धर्म में अधिकतर यात्राएं चैत्र, बैसाख के महीने में ही होती हैं। चतुर्मास या पुरुषोत्तम मास में परिक्रमा नहीं होती। कुछ विद्वानों का मानना है कि परिक्रमा यात्रा साल में एक बार चैत्र पूर्णिमा से बैसाख पूर्णिमा तक ही निकाली जाती हैं। वहीं कुछ लोग आश्विन माह में विजया दशमी के बाद शरद् काल में परिक्रमा शुरू करते हैं। शैव और वैष्णवों में परिक्रमा के अलग-अलग समय है।


क्यों करते हैं यात्रा---

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हिंदू धर्म में चौरासी लाख योनियों का महत्व है। ऐसी मान्यता है या माना जाता है कि 84 कोस की यात्रा 84 लाख योनियों से मुक्ति पाने के लिए है। मनुष्य का शरीर भी चौरासी अंगुल की माप का है। 84 कोस की यात्रा के धार्मिक महत्व के अलावा इसका सामाजिक महत्व भी है। इस यात्रा को लेकर लोगों में काफी उत्साह रहता है।


कहां-कहां होती परिक्रमा---

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लोग चौरासी कोसी परिक्रमा किसी विशेष समय और स्थान पर करते हैं, जैसे, ब्रज क्षेत्र में कामवन(कामां),डीग, गोवर्धन,अयोध्या में सरयू, चित्रकूट में कामदगिरि व दक्षिण भारत में तिरुवन्मलई की परिक्रमा यात्रा है। यह परिक्रमा पूरी तरह से संतों और भक्तों द्वारा संचालित धार्मिक व परम्परागत है। वहीं मध्य प्रदेश के उज्जैन में चौरासी महादेव की यात्रा का आयोजन किया जाता है। इनमें परिक्रमा करने वाले अधिकतर लोग पूरी परिक्रमा पैदल चलकर पूरा करते हैं। 

36 नियमों का कड़ाई से पालन करना होता है

इस यात्रा के अपने नियम भी हैं, इसमें शामिल होने वाले लोगों को प्रतिदिन 36 नियमों का कड़ाई से पालन करना होता है, इनमें धरती पर सोना, नित्य स्नान करना, ब्रह्मचर्य पालन, जूते-चप्पल का त्याग, नित्य देव पूजा, कथा-संकीर्तन, फलाहार, क्रोध, मिथ्या, लोभ, मोह व अन्य दुर्गुणों का त्याग प्रमुख है। इसके अतिरिक्त सत्य बोलना, दूसरों के अपराधों काे क्षमा करना, तीर्थों में स्नान करना, आचमन करना, नए तुलसीमाला पर हरिनामर कीर्तन या वैष्णवों के साथ हरिनाम संकीर्तन करना भी प्रमुख है। परिक्रमा करते समय मार्ग में स्थित ब्राह्मण, श्रीमूर्ति, तीर्थ और भगवद्लीला स्थलियों का विधिपूर्वक सम्मान एवं पूजा करते हुए परिक्रमा करें। परिक्रमा पथ में साधु.संतों आदि का अनादर नहीं करना, साबुन, तेल का उपयोग नहीं करना, चींटी इत्यादि जीव-हिंसा से बचना, परनिन्दा, पर चर्चा और कलेस से सदा बचना चाहिए।

चौरासी कोसी परिक्रमा का हिंदू धर्म में पौराणिक मान्यता है। इसे लेकर भक्तों का उत्साह देखते बनता है। लोग इस परिक्रमा के लिए विशेष तैयारी करते हैं, वे अपने मित्रों, परिवार के सदस्यों के साथ इस परिक्रम को करते हैं।

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