भावुकता भरे माहौल के बीच हुई सीता समेत चारों बहनों की विदाई

 राजा दशरथ के पुत्रों के विवाह में गूंजे हरियाणवी गीत

-भावुकता भरे माहौल के बीच हुई सीता समेत चारों बहनों की विदाई

-कोरोना को देखते हुए नहीं निकाली राम बारात



गुरुग्राम। राम लीला के तीसरे दिन शिवजी का धनुष तोडऩे की लीला के बाद चौथे दिन राजा दशरथ के चारों पुत्रों राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न का राजा जनक की चारों पुत्रियों के साथ विवाह की लीला का मंचन किया गया। चारों की विदाई की लीला भी बहुत भी भावुक रही। कोरोना की दृष्टि से इस बार राम बारात नहीं निकाली गई।  

यहां जैकबपुरा स्थित श्री दुर्गा रामलीला में चौथे दिन विवाह की चिट्ठी राजा जनक (अशोक सौदा) की ओर से अयोध्या में राजा दशरथ (गगनदीप सैनी) के पास भेजी गई। जिसके बाद राजा दशरथ अपने दोनों राजकुमारों भरत (कुणाल शर्मा) व शत्रुघ्न (भवेश सलूजा) को लेकर जनकपुरी पहुंचे। राम-लक्ष्मण (करण बख्शी व समीर तंवर) पहले से ही गुरू वशिष्ठ (अशोक जांगड़ा) के साथ जनकपुरी में मौजूद थे। चारों राजकुमारों की विवाह राजा जनक की चारों पुत्रियों के साथ कराया गया। मंच पर ही फेरों की रस्म अदा की गई। इसके बाद विदाई की गई। विवाह में हरियाणवी गीतों के माध्यम से माहौल को रोमांचित किया गया। राम लीला में बैठी महिलाएं भी हरियाणवी गीत सुनकर खुद गीत गाने लगी। फेरे होने के बाद विदाई की तैयारी की गई। अपनी पुत्रियों को सदा सुखी रहने का आशीर्वाद देते हुए राजा जनक बहुत ही भावुक हो गए। भावुकता के गीत गाते हुए ही राजा जनक ने अपनी पुत्रियों को विदा किया। विशेषकर सीता (कुणाल गुप्ता) को विदा करते हुए राजा जनक अश्रुधारा नहीं रोक पाए।    



श्री दुर्गा राम लीला के प्रवक्ता राज सैनी बिसरवाल ने बताया कि जो महिलाओं द्वारा सीटने (बोलियां) सुनाई जा रही हैं, यह परम्परा अभी से नहीं आरम्भ से ही चली आ रही है। यह लड़कियों का अपने जीजा से बोलने का और हंसी-मजाक करने का तरीका है। वहीं मिथिला नगरी में सीता जी की सखी ने कहा कि ये जो धनुष है, ये श्री राम जी ने नहीं तोड़ा। ये तो महाबली रावण ही तोड़ गए थे। भला खीर खाकर पैदा होने वालों से कभी धनुष टूट सकता है क्या...? इस पर लक्ष्मण जी हंसते हुए कहते हैं, एक बात बताओ...जब जमीन से पैदा होने वाली का स्वयंवर हो सकता है तो खीर खाकर पैदा हुए धनुष कैसे नहीं तोड़ सकते। इससे माहौल में खूब ठहाके लगे।

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