फारुख अब्दुल्ला जैसे देशद्रोहियों को सबक देना जरूरी: बोधराज सीकरी

 फारुख अब्दुल्ला जैसे देशद्रोहियों को सबक देना जरूरी: बोधराज सीकरी



-चीन के साथ मिलकर धारा 370 बहाल करने की बयान निंदनीय

-भारत का नमक खाकर दुश्मनों से मिलने की करते हैं बात


गुरुग्राम। फारुख अब्दुल्ला तीन बार जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बने। भारत सरकार में कैबिनेट मंत्री बने और अब सांसद हैं। वे भारत में रहते हैं। भारत का खाते हैं, लेकिन भाषा दुश्मन देश की बोलते हैं। ना केवल भाषा, बल्कि चीन जैसे दुश्मन देश के साथ मिलकर देश में धारा 370 बहाल करने की बात करते हैं। ऐसे देशद्रोही नेताओं को अब सबक सिखाने का समय आ गया है। फारुख अब्दुल्ला के बयान पर यह टिप्पणी की है बीजेपी के वरिष्ठ नेता एवं प्रसिद्ध उद्योगपति, राजनीतिक चिंतक बोधराज सीकरी ने।


बोधराज सीकरी ने कहा कि भारत में ही उन्हें सुरक्षा भी चाहिए। यहीं का नमक खाकर आंखें दिखा रहे हैं। जिस तरह से उन्हें चीन के साथ मिलकर धारा 370 बहाल करने की बात कही है, वह निंदनीय है। एक तरह से यह लोकतंत्र की आत्मा पर आघात है। यह सीधे तौर पर देश का अपमान है, ना कि किसी व्यक्ति विशेष का। हमें ऐसी देशद्रोही नेताओं को अब उनको उनकी ही भाषा में जवाब देना होगा, ताकि उनके समर्थन में जुटने वाले नेता और लोग भी यह देख सकें कि वे देश व अपने प्रदेश के विकास से ज्यादा किस बात को अहमियत देते हैं। एक तरफ तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती देने में दिन-रात एक कर रहे हैं। अमेरिका जैसे देशों ने भारत को तवज्जो देनी शुरू की है, वहीं हमारे अपने देश में फारुख अब्दुल्ला सरीखे नेता देश की जड़ों को कमजोर करने में लगे हैं।


चाहे कुछ भी कर लें, वे इसमें सफल नहीं हो सकते। क्योंंकि कोई भी व्यक्ति अगर अपने देश, समाज से गद्दारी करता है तो उसे कहीं पर भी स्वीकार नहीं किया जा सकता। चीन जैसे दुश्मन देश तो चाहते भी यहीं है कि भारत में बैठे नेता ही उनका काम करते रहें। जिस तरह से फारुख अब्दुल्ला ने बात कही है, वह चीन को बेशक पसंद आई हो, लेकिन भारत में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। यहां आम और खास में रोष है। अगर अब्दुल्ला को चीन इतना ही पसंद है तो वे वहां की नागरिकता ले लें। अपने सांसद पद से त्याग पत्र दे दें। संविधान की शपथ लेकर भी देशद्रोही बनकर वे कुछ हासिल नहीं कर सकते। जम्मू-कश्मीर की अवाम भी इस बात को समझ रही है कि उनका हितैषी कौन है। वहां की सत्ता पर वर्षों तक काबिज रहने के बाद भी फारुख अब्दुल्ला जैसे देशद्रोही नेताओं ने विकास से दूर रखा। उन्हें रोजगार से दूर रखा। शिक्षा से दूर रखा। अब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह ने धारा 370 हटाकर जम्मू-कश्मीर में विकास का मार्ग प्रशस्त किया है तो वहां के नेताओं को हजम नहीं हो रहा।   

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