उतना ही लो थाली में, व्यर्थ ना जाए नाली में: बोधराज सीकरी

 उतना ही लो थाली में, व्यर्थ ना जाए नाली में: बोधराज सीकरी

-अन्न तैयार करने में महीनों लगते हैं, हमें फेंकने में एक मिनट भी नहीं



-खाना थाली में झूठा छोडऩे फेंकने की आदत को बदलें

गुरुग्राम। समाज के चिंतक, उद्योगपति, समाजसेवी, बीजेपी के वरिष्ठ नेता और रोड सेफ्टी कमेटी के सदस्य बोधराज सीकरी खाने की बर्बादी से आहत हैं। वे मानते हैं कि अगर यह बर्बादी भी रुक जाए तो लाखों लोगों का पेट भर सकता है। खाना हर किसी की जरूरत है। 

बोधराज सीकरी कहते हैं कि कोरोना संक्रमण काल में जो स्थिति बनी है, खाने को लोग तरसे भी हैं, इसके लिए हमारी खाना बर्बाद करने की आदतें जिम्मेदार हैं। क्योंकि इस खाने के लिए बहुत मेहनत होती है। पहले तो किसान अपने खेतों में हल चलाकर खेत की जुताई करता है। उसके 21 से 30 दिन के भीतर अन्न का रोपण किया जाता है। फिर 100 दिनों में अन्न के पौधे तैयार होकर बीज अंकुरित होते हैं और 120 दिन में फसल पककर तैयार हो जाती है। 122 से 130 दिनों में काटकर एकत्रित कर दिया जाता है। 132 दिनों में फसल को निकाला जाता है। जिस खाने, फसल को उगाकर तैयार करने में 132 दिन करीब 5 महीने लगते हैं, उसे फेंकने में हम चंद सेकेंड लगाते हैं। बोधराज सीकरी का कहना है कि चाहे हम कोई भी फंक्शन करें, हमें उन स्थलों पर खाने की बर्बादी ना करने के बोर्ड लगाने होंगे। उन्हें उम्मीद है कि ऐसा हो जाने से जनता में जागरुकता भी आएगी और खाना भी बचेगा।   


मेरा पानी मेरी विरासत योजना रामबाण

मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा एक नया आह्वान जादुई असर दिखा रहा है। मेरा पानी मेरी विरासत योजना की शुरुआत मनोहर सरकार ने की। यह योजना रामबाण साबित हो रही है। इस योजना के तहत पानी की अधिक खपत वाले धान के स्थान पर ऐसी फसलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके लिए कम पानी की आवश्यकता हो। इस योजना के तहत भूजल का बचाव होगा और किसान को 7000 रुपए प्रति एकड़ मुआवजा भी मिलेगा। 72000 से अधिक किसानों ने इस योजना को सहर्ष स्वीकार किया है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया है कि जब हम धान निर्यात करते हैं तो हम चावल नहीं जल निर्यात करते हैंं। इस योजना के तहत हम आने वाली पीढ़ी के साथ न्याय करने जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त धान उत्पादन में पानी की आध्यात्मिक उपयोग, चावल बनाने को पानी का अधिक उपयोग एवं चावल खाने वाला भी प्राय: पानी को अधिक सेवन करता है। अत: हम तीन तरीके से पानी की बचत करेंगे। हरियाणा राज्य में पानी की कमी के कारण ही सरकार ने यह विशेष प्रकार की योजना आरंभ की है। इस योजना में किसानों को उन चीजों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है जिनमें सिंचाई और बुवाई में पानी का इस्तेमाल कम से कम हो सके। इसके जरिए हरियाणा में गिरते पानी के स्तर को ठीक किया जाने का लक्ष्य लिया गया है। हरियाणा के बहुत से इलाके हैं, जंहा जल स्तर 40 मीटर से भी नीचे चला गया हे और हम सबको आने वाली पीडी के भविष्य का भी ध्यान रखना हे। 

अतः आओ सब हरियाणा वासी एक तरफ़ अन्न aur खाद्य पदार्थ को बर्बाद होने से बचाए और पानी की एक एक बूँद बचा कर संतान को संस्कार दे मुख्य मंत्री जी को आश्वासन दे के हम सब मिल इस निमित द्रड़ संकल्प हे।

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