छठे दिन की रामलीला में केवट की नाव पर सवार होकर गंगा पार पहुंचे राम, लखन, सीता

 कांटे थे हम निकल गए, अब भरत से राज चलाए...

-छठे दिन की रामलीला में केवट की नाव पर सवार होकर गंगा पार पहुंचे राम, लखन, सीता

-पुत्र वियोग में राजा दशरथ ने तड़प-तड़प कर दी जान



गुरुग्राम। रामलीला में राम, लक्ष्मण, सीता को वनों से वापिस अयोध्या नगरी ले जाने को निषाद राज मनाने पहुंचते हैं। निषाद राज को राम कहते हैं कि वे तो रघुकुल की रीत को निभा रहे हैं। अपने पिता के वचनों को पूरा कर रहे हैं। रघुकुल में प्राण तो जा सकते हैं, लेकिन वचन नहीं जा सकते। इसलिए वे वापिस लौट जाएं। 

यहां जैकबपुरा स्थित श्री दुर्गा रामलीला में छठे दिन की लीला का मंचन निषाद राज (फूल सिंह सैनी) द्बारा श्रीराम (करण बख्शी) को मनाने से शुरू किया गया। राम जी ने उन्हें कहा कि रघुकुल में कोई अपने वचनों से वापस नहीं हटता। इसलिए वे उनसे अयोध्या चलने को न कहें। निषाद राज और लक्ष्मण (समीर तंवर) के बीच संवाद हुआ। लक्ष्मण कहते हैं कि कोई किसी के दुख का साथी नहीं हो सकता। सपने में लोग राजा बन जाते हैं, राजा भिखारी बन जाते हैं। पर हकीकत में यह सब मिथ्या है। माता कैकेयी (गोविंद मौर्या) पर गुस्सा निकालते हुए लक्ष्मण कहते हैं कि-कह देना कैकेयी माता से-घी के दीये जलाए वो, कांटे थे हम निकल गए-अब भरत से राज चलाए वो। लाख प्रयासों के बाद भी जब राम (करण बख्शी), लक्ष्मण (समीर तंवर), सीता (कुणाल गुप्ता) वापस चलने को तैयार नहीं होते तो निषाद राज परेशान होकर अयोध्या वापस लौटते हंैं। राम, लक्ष्मण, सीता आगे बढ़ते हुए गंगा तक पहुंच जाते हैं। वहां पर केवट (केशव जलिंद्रा) से वे गंगा पार कराने की कहते हैं। केवट उन्हें मना कर देता है। एक गीत के माध्यम से राम जी उनसे अनुरोध करते हैं कि-नइया वाले जरा नाव लाना, हमें गंगा पार लगाना। कई बार अनुरोध के बाद केवट गंगा पार कराने को राजी तो हुए, पहले उन्होंने उनके पांव धोने की बात कही। ऐसा इसलिए कि उनके पांव से एक पत्थर नारी बन गई। कही उनकी लकड़ी की नाव कुछ और न बन जाए। इसके बाद केवट ने तीनों के पांव धोए। पांव धोते-धोते केवट ने राम जी का आशीर्वाद भी ले लिया। इसके बाद उन्होंने नाव में बैठकर गंगा पार की।      

दूसरी ओर निषाद राज राम जी से मिलने के बाद अयोध्या पहुंच जाता है। उसके आने की बात सुनकर राजा दशरथ उठकर कहते हैं कि कहां हैं मेरे राम, लक्ष्मण, सीता। निषाद राज जब बताता है कि वे उनके साथ नहीं आए। इस कारण से राजा दशरथ व्याकुल हो उठे। पुत्र वियोग में राजा दशरथ परेशान हो उठते हैं। करीब एक घंटे तक राजा दशरथ बने कलाकार ने व्याकुलता से जनता को बांधे रखा। राजा दशरथ की मृत्यु हो गई। भरत और शत्रुघ्न को ननिहाल से वापस बुला लिया गया। छठे दिन की लीला की खास बात यह रही कि इस लीला में निखादराज (फूल सिंह सैनी) और खेवट का रोल बहुत प्रभावी रहा। दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। गत दो साल पूर्व तक राम की भूमिका अदा करने वाले केशव जलिंद्रा ने खेटव की भूमिका निभाई।

Post a Comment

0 Comments