दिल्ली सहारनपुर रेलमार्ग के दोहरीकरण की उम्मीद फिर ठंडे बस्ते में RTI से खुली पोल

 दिल्ली सहारनपुर रेल मार्ग के दोहरीकरण को लेकर बागपत के लोगों को अंधरे में रखा जा रहा है। ना तो किसी नेता के कहने पर विद्युतीकरण हो रहा है और ना ही दोहरीकरण की अभी तक कोई उम्मीद है। खेकडा के अधिवक्ता की आरटीआई में 1500 करोड़ से रेलवे लाइन कार्य का क्रेडिट झूठा साबित हुआ है।


बागपत सांसद सत्यपाल सिंह ने बागपत के लोगों को रेलवे के दोहरीकरण और विद्युतीकरण को लेकर बताया था कि यह कार्य उनके प्रयासों से किया जा रहा है। 1500 करोड़ की लागत से रेलवे लाइन का कार्य किया जा रहा, जिसका क्रेडिट नेताजी ले रहे हैं। लेकिन बागपत के खेकडा निवासी अधिवक्ता हर्ष शर्मा की आरटीआई ने सांसद के दावों की पोल खोल कर रख दी। दिल्ली सहारनपुर रेलवे मार्ग का दोहरीकरण की अभी तक कोई डीपीआर प्रस्तावित नहीं हो पाई है और विद्युतीकरण भी कोर्ट के आदेश के बाद सम्भव हो पाया है।

अधिवक्ता का कहना था कि उनके द्वारा छः बिन्दुओं पर लोक सूचना अधिकारी/डीआरएम दिल्ली डिवीजन भारतीय रेल विभाग में आरटीआई डाली गयी थी। जिसके जवाब में पहले तो जवाब देने में आना कानी की गई। लेकिन जब जवाब आया तो वह चौंकाने वाला था। जवाब में बताया गया है कि दोहरीकरण सबंधी डीपीआर भेजी हुई है, जो अभी तक भी प्रस्तावित नहीं हुई है। जबकि बागपत के सांसद सत्यपाल सिंह द्वारा 1500 करोड़ की लागत से रेलवे के दोहरीकरण का क्रेडिट लिया जा रहा है।

वहीं रेलवे के विद्युतीकरण को लेकर भी जवाब में बताया गया है कि किसी मंत्री या नेता के प्रस्ताव पर विद्युतीकरण नहीं किया जा रहा है। दिल्ली सहारनपुर रेलवे मार्ग का विधुतीकरण सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेशों के तहत हो रहा है।


         रेलमार्ग स्टेशन का वास्तविक चित्र 

आरटीआई का जवाब

आरटीआई आवेदन की कॉपी


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